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मुरलीधरन के आगे चारों खाने चित इंग्लैंड | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़िरकी के जादूगर मुथैया मुरलीधरन ने ट्रेंटब्रिज में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट क्रिकेट का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और इंग्लैंड की टीम तीसरे टेस्ट के चौथे दिन ही हार गई. दूसरी पारी में मुरली के आगे इंग्लैंड की टीम ने घुटने टेक दिए और मुरली ने 70 रन देकर उसके आठ खिलाड़ियों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. दूसरी पारी में जीत हासिल करने के लिए इंग्लैंड को 325 रनों की आवश्यकता थी. लेकिन उसके खिलाड़ी सिर्फ़ 190 रन ही बना पाए. इस तरह श्रीलंका ने 134 रनों से जीत दर्ज की और तीन टेस्ट मैचों की सिरीज़ 1-1 से बराबर कर दी. इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट ड्रॉ हुआ था, जबकि दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने श्रीलंका को छह विकेट से हराया था. यह श्रीलंका की इंग्लैंड में सिर्फ़ दूसरी टेस्ट विजय है. 1998 में ओवल टेस्ट में श्रीलंका ने इंग्लैंड को हराया था. उस समय मुरलीधरन ने सिर्फ़ 65 रन देकर नौ विकेट लिए थे. ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में मुरलीधरन ने कुल 11 विकेट लिए. उनके शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें मैन ऑफ़ द मैच चुना गया. एज़बेस्टन के दूसरे टेस्ट में भी मुरलीधरन ने 10 विकेट लिए थे. उन्हें इंग्लैंड के केविन पीटरसन के साथ संयुक्त रूप से मैन ऑफ़ द सिरीज़ का पुरस्कार भी मिला. लक्ष्य ट्रेंटब्रिज टेस्ट के चौथे दिन जब खेल शुरू हुआ, उस समय श्रीलंका का दूसरी पारी में स्कोर था सात विकेट पर 286 रन.
मोंटी पनेसर की अच्छी गेंदबाज़ी जारी रही और श्रीलंका की पूरी टीम 322 रन पर आउट हो गई. मोंटी पनेसर ने दूसरी पारी में पाँच विकेट लिए. मैथ्यू होगर्ड और लियम प्लंकेट को दो-दो विकेट लिए. कप्तान फ़्लिंटफ़ के खाते में सिर्फ़ एक विकेट ही आया. श्रीलंका को पहली पारी के आधार पर दो रनों की बढ़त हासिल हुई थी. इस तरह इंग्लैंड के सामने जीत के लिए लक्ष्य था 325 रन का. इंग्लैंड ने शुरुआत भी काफ़ी अच्छी की. मार्कस ट्रेस्कोथिक और एंड्रयू स्ट्रॉस ने संभल कर खेलना शुरू किया और अच्छे स्ट्रोक भी लगाए.
दोनों के बीच पहले विकेट की साझेदारी में 84 रन बने. ट्रेस्कोथिक 31 रन बनाकर मुरलीधरन की गेंद पर बोल्ड हो गए. इसके बाद तो जैसे विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया. एंड्रयू स्ट्रॉस के 55 रन बनाकर आउट होते ही स्थिति और नाजुक हो गई. मुरलीधरन की घूमती गेंदों को किसी भी बल्लेबाज़ के पास जवाब नहीं था. ट्रेस्कोथिक और स्ट्रॉस के बाद प्लंकेट और मोंटी पनेसर का स्कोर ही दो अंकों तक पहुँच पाया. प्लंकेट 22 रन पर नाबाद रहे जबकि पनेसर ने 26 रन बनाए. मुरली ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट करियर का दूसरा बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिर्फ़ 70 रन देकर आठ विकेट चटकाए. इंग्लैंड की पूरी टीम सिर्फ़ 190 रन बनाकर आउट हो गई. मुरलीधरन की घातक गेंदबाज़ी का अंदाज़ा इसी से लगता है कि पहला विकेट 84 रन पर गिरा और 190 पर पूरी टीम आउट हो गई. | इससे जुड़ी ख़बरें दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड छह विकेट से जीता28 मई, 2006 | खेल आख़िरकार ड्रॉ हुआ श्रीलंका-इंग्लैंड टेस्ट15 मई, 2006 | खेल खेलने से ही आता है अनुभव: मुनाफ़04 जून, 2006 | खेल भारतीय क्रिकेट टीम की रैंकिंग गिरी30 मई, 2006 | खेल आख़िरी वनडे मैच में भी नाक नहीं बची28 मई, 2006 | खेल हार के लिए बल्लेबाज़ ज़िम्मेदार- द्रविड़27 मई, 2006 | खेल वेस्टइंडीज़ का वनडे सिरीज़ पर क़ब्ज़ा26 मई, 2006 | खेल सचिन फिट नहीं, वेस्टइंडीज़ नहीं जाएँगे23 मई, 2006 | खेल इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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