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अमरीका को चाहिए भारत की मदद... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख ने उम्मीद जताई है कि अगर भारतीय क्रिकेट टीम वहाँ आकर खेलती है तो उससे अमरीका में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिलेगी. भारत ने कुछ अन्य देशों में अगले पाँच सालों के दौरान क्रिकेट मैच के प्रसारण के अधिकार बेचे हैं. भारत अमरीका को एक मुख्य बाज़ार मानता है क्योंकि वहाँ भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में बसे हैं. अमरीकी क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख गलैडस्टोन डेंटी का कहना है कि अगर भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ जैसी टीमों के मैच हों तो इन्हें देखने के लिए काफ़ी भीड़ जमा होगी. लेकिन अमरीकी क्रिकेट काफ़ी मुश्किल दौर से गुज़र रहा है. वर्ष 2005 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भी प्रोजेक्ट यूएसए नाम से शुरू की गई अपनी योजना बंद कर दी थी. आईसीसी अमरीका में क्रिकेट की स्थिति से खुश नहीं थी. अमरीका के आईसीसी अंतरद्वीपीय कप में हिस्सा लेने पर रोक भी लगाई गई थी क्योंकि वहाँ के दो गुटों में टीम के चयन को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी. हालांकि आईसीसी पिछले महीने यानि मार्च में अमरीकी क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता फिर बहाल करने पर राज़ी हो गई थी. इसमें शर्त ये लगाई गई है कि एसोसिएशन अधिकारियों का चुनाव करवाए और इस प्रकिया पर निगरानी रखी जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें सहवाग को कप्तानी, द्रविड़ को विश्राम06 अप्रैल, 2006 | खेल गंभीर की छुट्टी, उथप्पा को मौक़ा04 अप्रैल, 2006 | खेल गोवा में जीतकर भारत 3-0 से आगे03 अप्रैल, 2006 | खेल 'कैरीबियन दौरे के लिए फ़िट होंगे सचिन'31 मार्च, 2006 | खेल 'राष्ट्रमंडल खेलों में फिर लौटे क्रिकेट'26 मार्च, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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