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'रैना लंबी रेस का घोड़ा साबित हुए हैं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत को शीर्ष क्रम के नहीं चल पाने पर ग़ौर करना होगा मगर अभी कुछ लोग फ़ॉर्म में नहीं हैं मगर एक ख़ूबी हो गई है कि अब मध्य और निचले क्रम के खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं. तेंदुलकर की ग़ैर-मौजूदगी में गौतम गंभीर को काफ़ी मौक़े मिल रहे हैं मगर वह उसका फ़ायदा नहीं उठा सके हैं. युवराज सिंह भी रन नहीं बना पा रहे हैं. मोहम्मद कैफ़ वैसे तो नहीं चल पा रहे हैं मगर उन्हें अब ख़ुद को साबित करने की ज़रूरत नहीं है बस उन्हें थोड़ा समय क्रीज़ पर बिताना होगा तब वो अच्छे रन बना पाएँगे. 'लंबी रेस का घोड़ा' इस मैच में सुरेश रैना के प्रदर्शन की जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है. उन्होंने न सिर्फ़ 89 गेंदों पर 81 रन बनाए बल्कि बहुत ही ज़बरदस्त अंदाज़ में बनाए. उस नाज़ुक़ स्थिति में जिस तरह विकेट पर टिककर खेलने की ज़रूरत थी रैना वैसे ही खेले. अक़सर देखा जाता है कि जब पाँच विकेट गिर जाएँ तब आप पर दबाव आ जाता है मगर उस समय अपना मानसिक संयम बनाए रखना काफ़ी मुश्किल साबित होता है. इस पारी से रैना ने ख़ुद को लंबी रेस का घोड़ा साबित कर दिया है. 'भारत को बढ़त' रमेश पवार काफ़ी अर्से से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और घरेलू क्रिकेट में तो उन्होंने ख़ुद को हरफ़नमौला खिलाड़ी की तरह साबित किया ही है उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में चार शतक भी लगाए हैं. वह किसी न किसी वजह से टीम में शामिल नहीं हो पा रहे थे क्योंकि टीम में पहले ही कई दिग्गज खिलाड़ी थे मगर उनके इस प्रदर्शन की दाद देनी होगी. जहाँ तक इस सिरीज़ की बात करें तो सात मैचों में से भारत पहले दोनों मैच जीत चुका है, जिसकी वजह से निश्चित ही उसे मानसिक रूप से बढ़त मिल गई है. रैना और धोनी ने इस मैच में जैसा प्रदर्शन किया है उससे इंग्लैंड के हौसले कुछ हद तक पस्त हुए होंगे, इसलिए सिरीज़ में उसे काफ़ी संघर्ष करना पड़ सकता है. |
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