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मुल्तान मैच दोनों के लिए बेहद अहम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच मुल्तान में खेला जाने वाला चौथा एक दिवसीय मैच बहुत ही महत्वपूर्ण होगा क्योंकि भारत को इस सिरीज में 2-1 की बढ़त हासिल है और पाकिस्तान के लिए तो इस मैच में करो या मरो वाली स्थिति है. भारतीय टीम को भी इस मैच को फाइनल जैसा ही खेलना चाहिए क्योंकि भारत अगर यह मैच हारता है तो इस सिरीज में पाकिस्तान की वापसी हो जाएगी और उसके हौसले बढ़ जाएंगे और पलड़ा पाकिस्तान की ओर झुक सकता है. मैं समझता हूँ कि भारतीय टीम बहुत अच्छे फॉर्म में है. भारतीय टीम ने इन विकेटों पर गेंदबाज़ी करना सीख लिया है. टीम स्कोर का अच्छा पीछा कर रही है, युवा खिलाड़ी बढ़िया खेल रहे हैं. भारतीय टीम ने इस दौरे पर वापसी पाई है तो अभी सब चीज़ें भारत के पक्ष में दिख रही है. पाकिस्तानी टीम के लिए कुछ मुश्किलें भी हैं. शोएब अख़्तर और शाहिद आफ़रीदी घायल होने के कारण पहले से ही नहीं खेल रहे हैं. उमर गुल की पीठ में कुछ तकलीफ़ हैं इसलिए उनका खेल पाना भी मुमिकन नहीं दिखता. मोहम्मद समी भी पूरी तरह फिट नहीं हैं और बीमार चल रहे हैं तो राव इफ्तकार अंजुम को टीम में बुलाया गया है. सलमान बट्ट के फॉर्म पर प्रश्नचिन्ह है और पिछले मैचों में वो दो बार लगातार शून्य पर आउट हो चुके हैं. इमरान फ़रहत शायद बट्ट की जगह पारी की शुरूआत करें. फिलहाल, पाकिस्तानी टीम में काफ़ी हद तक दुविधा की स्थिति बनी हुई है.
यहाँ की विकेट बहुत अच्छी है. जैसे अब तक हुए एक दिवसीय मैचों में रन बनाते रहे हैं. यहाँ भी 300 रन की विकेट लग रही है. यहाँ पर थोड़ी सी भूरी घास ज़रूर है उसका फ़ायदा शायद तेज़ गेंदबाज़ों को मिल सकता है. यहाँ पर मौसम बहुत अच्छा रहेगा. न ज़्यादा ठंड और न ही ज़्यादा गर्मी रहेगी और यहाँ पर एक दिवससीय क्रिकेट के लिए आदर्श हालात होंगे. विकल्प भारतीय टीम के पास इस समय ज़्यादा विकल्प नहीं हैं. पिछले मैच में ज़हीर ख़ान सुपर सब के रूप में थे तो मैं समझता हूँ कि इस बार उनकी जगह रमेश पोवार को शायद सुपर सब बनाया जाए क्योंकि निचले क्रम में पोवार अच्छी बल्लेबाज़ी कर सकते हैं. पूरी सिरीज में मैं यही कहता आया हूँ और यहाँ भी मेरा विचार बदला नहीं है कि जो भी टीम टॉस जीतेगी उसे स्कोर का पीछा करना चाहिए. क्योंकि स्कोर का पीछा करने में ही फ़ायदा है. ऐसे में, टीम के पास एक लक्ष्य रहता है और मन में कोई असमंजस नहीं रहता. पहले बल्लेबाज़ी करने पर विकेट में थोड़ी नमी रहती है जिसका फ़ायदा फील्डिंग कर रही टीम को मिलता है और अगर आप सोचते हैं कि मैच जीतने के लिए 300 का लक्ष्य रखना ही है तो उसको हासिल करते वक़्त दबाव में, तीन-चार विकेट जल्दी गिर जाती हैं और उसके बाद उबरना मुश्किल हो जाता है. तो फिलहाल जो टीम स्कोर का पीछा करेगी उसे ही एडवांटेज ही मिलेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें शोएब की जगह समी, आफ़रीदी घायल15 फ़रवरी, 2006 | खेल धोनी ने किया धमाका, भारत 2-1 से आगे13 फ़रवरी, 2006 | खेल उभरती हुई भारतीय टीमः अरूण लाल13 फ़रवरी, 2006 | खेल बाकी मैचों से भी बाहर रहेंगे शोएब अख़्तर12 फ़रवरी, 2006 | खेल रावलपिंडी में भारत की आसान जीत11 फ़रवरी, 2006 | खेल वन डे सिरीज़ में भारत ने बराबरी की11 फ़रवरी, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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