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शनिवार, 02 जुलाई, 2005 को 22:23 GMT तक के समाचार
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लॉर्ड्स में रोमांचक फ़ाइनल का रोचक अंत
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संयुक्त विजेता बने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड
लंदन के लॉर्ड्स मैदान में हुए नैटवेस्ट सिरीज़ के रोमांचक फ़ाइनल मैच का रोमांचक अंत हुआ.

मेजबान इंग्लैंड और विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए फ़ाइनल मैच का रोमांच आख़िरी गेंद तक बना रहा और परिणाम टाई रहा.

फ़ाइनल मैच में दोनों ही टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया. दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ियों ने बल्लेबाज़ी अच्छी की, तो कुछ ने बेहतरीन गेंदबाज़ी की. दोनों ही टीमों की ओर से कुछ अच्छी साझेदारियाँ हुईं तो दबाव में कुछ ग़लतियाँ भी.

बल्लेबाज़ी में कमाल दिखाया ऑस्ट्रेलिया के माइक हुसी ने तो इंग्लैंड की ओर से बल्लेबाज़ी का मोर्चा संभाला पॉल कॉलिंगवुड और गैरेंट जोन्स ने.

फ़ाइनल में इंग्लैंड को हार से उबारने वाले गैरेंट जोन्स को मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार मिला.

जबकि शुरुआती दो मैचों में बांग्लादेश और इंग्लैंड से हारने वाली ऑस्ट्रेलिया टीम को फ़ाइनल में पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एंड्रयू सिमंड्स को मैन ऑफ़ द सिरीज़ का पुरस्कार मिला.

गेंदबाज़ी में इंग्लैंड के एंड्रयू फ़्लिंटफ़ और स्टीव हार्मिसन छाए तो ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्लेन मैकग्रा और ब्रेट ली ने सबकी तालियाँ बटोरी.

ऑस्ट्रेलियाई पारी

इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले ऑस्ट्रेलिया को बल्लेबाज़ी के लिए उतारा. ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत कोई ख़ास नहीं रही और समय-समय पर विकेट गिरते रहे.

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इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने अच्छा प्रदर्शन किया

इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता था कि ऑस्ट्रेलिया की ओर से सबसे बड़ी साझेदारी 54 रनों की सिमंड्स और हुसी के बीच हुई.

ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 48.5 ओवर में 196 रन बनाकर आउट हो गई. सबसे ज़्यादा 62 रन माइक हुसी ने बनाए. सिमंड्स ने 29 और गिलक्रिस्ट ने 27 रन बनाए.

इंग्लैंड की ओर से फ़्लिंटफ़ और हार्मिसन ने तीन-तीन विकेट चटकाए. जबकि डेरेन गफ़ को दो विकेट मिले. कॉलिंगवुड और साइमन जोन्स को एक-एक विकेट मिले.

ख़राब शुरुआत

फ़ाइनल में 197 रनों का लक्ष्य इंग्लैंड के लिए आसान माना जा रहा था. लेकिन इंग्लैंड की शुरुआत बहुत ख़राब रही.

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मैकग्रॉ और ली ने बल्लेबाज़ों की कमर तोड़ दी

ग्लेन मैकग्रॉ और ब्रेट ली ने ऐसी गेंदबाज़ी की कि इंग्लैंड के शीर्ष बल्लेबाज़ टिक नहीं पाए. 33 रन पर इंग्लैंड का पाँच विकेट गिर चुके थे.

लेकिन पॉल कॉलिंगवुड और गैरेंट जोन्स ने साहसिक पारी खेली. संयम और संघर्ष से भरी इस पारी ने ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ों को परेशान कर दिया और एक समय तो इंग्लैंड की जीत पक्की नज़र आने लगी.

लेकिन दोनों के विकेट गिरते ही इंग्लैंड की टीम फिर दबाव में आ गई. छठे विकेट के लिए कॉलिंगवुड और जोन्स ने 116 रनों की साझेदारी की.

आठ विकेट 192 रनों पर गँवाने के बाद इंग्लैंड की पारी संभालने की ज़िम्मेदारी उठाई डेरेन गफ़ और एशले जाइल्स ने.

ग्लेन मैकग्रॉ के आख़िरी ओवर में 10 रन बनाने थे और इंग्लैंड के पास विकेट थे दो. मैकग्रॉ जैसे अनुभवी गेंदबाज़ ने पहली गेंद नो बॉल फेंकी.

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जोन्स ने साहसिक बल्लेबाज़ी की और मैन ऑफ़ द मैच रहे

उसके बाद आख़िरी ओवर में ही डेरेन गफ़ रन आउट हो गए और फिर आख़िरी गेंद पर जीत के लिए इंग्लैंड को चाहिए थे तीन रन.

आख़िरी गेंद जाइल्स के पैर से लगी और नज़दीक खड़े फ़ील्डरों को चकमा दे गई. मैकग्रॉ और गिलक्रिस्ट एलबीडब्लू की अपील करते रह गए और खिलाड़ियों ने दो रन बना लिए और स्कोर टाई हो गया.

इसके साथ ही रोमांच से भरपूर इस नेटवेस्ट सिरीज़ का अंत भी काफ़ी रोमांचक रहा और दोनों टीमें बनीं संयुक्त विजेता.

इंग्लैंड की ओर से सर्वाधिक 71 रन बनाए विकेटकीपर जोन्स ने जबकि कॉलिंगवुड ने 53 रनों का योगदान किया.

ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्लेन मैकग्रॉ ने तीन विकेट लिए जबकि ब्रेट ली के खाते में आए दो विकेट. ब्रेड हॉग और माइक हुसी को एक-एक विकेट मिला.

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