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भारतीय क्रिकेट दौरे पर संकट के बादल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट बोर्ड की अंदरूनी कलह और न्यज़ीलैंड के ज़िंबाब्वे से मतभेद के कारण भारतीय क्रिकेट टीम के अगले दो दौरे खटाई में पड़ सकते हैं. भारतीय टीम जुलाई के आख़िर में त्रिकोणीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए श्रीलंका का दौरा करने वाली है जहाँ वेस्ट इंडीज़ तीसरी टीम होगी. उसके बाद अगस्त में भारतीय टीम एक और त्रिकोणीय प्रतियोगिता में खेलने के लिए ज़िंबाब्वे का दौरा करेगी जहाँ न्यूज़ीलैंड को भी भाग लेना है. लेकिन वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड और उसके खिलाड़ियों के बीच अनुबंध को लेकर विवाद चल रहा है. इस विवाद के कारण बोर्ड के लिए श्रीलंका के विरूद्ध 13 जुलाई से खेले जानेवाले पहले क्रिकेट टेस्ट मैच के लिए खिलाड़ियों को चुनना मुश्किल हो रहा है. वेस्टइंडीज़ के केवल तीन खिलाड़ियों ने अब तक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं. वहीं न्यूज़ीलैंड सरकार चाहती है कि न्यूज़ीलैंड की टीम ज़िंबाब्वे की रॉबर्ट मुगाबे सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध स्वरूप ज़िंबाब्वे के दौरे पर ना जाए. अगर वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड का अपने खिलाड़ियों के साथ विवाद और न्यज़ीलैंड का ज़िंबाब्वे के साथ मसला नहीं सुलझा तो भारत के दोनों दौरे खटाई में पड़ सकते हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड वेस्ट इंडीज़ और न्यज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड के फ़ैसलों के इंतज़ार में है और वहाँ के घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं. उधर भारतीय खिलाड़ियों ने नए कोच ग्रेग चैपल के मार्गदर्शन में सोमवार से अपना प्रशिक्षण शुरु कर दिया है. मगर सबकी नज़रें टिकी हैं लंदन में चल रही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की वार्षिक बैठक की ओर. न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री फ़िल गॉफ़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से अपील की है कि वो ज़िंबाब्वे के साथ ना खेलने की सूरत में न्यूज़ीलैंड पर लगाया जानेवाला जुर्माना माफ़ कर दे. |
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