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न खेल पाने का मलाल है: सानिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा को आजकल दिल्ली में चल रहे फ़ेडरेशन कप में न खेल पाने का मलाल है. पर सानिया अब फ़्रेच ओपन की तैयारी में लगी हैं और अपना ज़्यादा वक्त आराम करने में बिता रही हैं ताकि जून में होने वाले फ़्रेंच ओपन तक वो पूरी तरह से ठीक हो सकें. सानिया पिछले कुछ दिनों से अपने टखने की चोट के कारण खेल से दूर हो गई हैं. वो फ़ेडरेशन कप में हिस्सा तो लेने वाली थीं पर इसी चोट के कारण वो खेल नहीं पाईं. दिल्ली में शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे फ़ेडरेशन कप में न खेल पाने का दुख है. हमारे पास एक बेहतर टीम है और हमारा प्रदर्शन भी अच्छा रहा है. दुर्भाग्यवश चोट की वजह से मैं इस वर्ष नहीं खेल पा रही हूँ.” सानिया ग्रांड स्लेम के तीसरे राउंड तक पहुँचने वाली भारत की पहली महिला टेनिस खिलाड़ी हैं और इस समय दुनिया के शीर्ष 75 टेनिस खिलाड़ियों में उनको 73वाँ स्थान प्राप्त है. चिंता पर क्या फ़्रेंच ओपन में हिस्सा लेने तक वो ठीक हो जाएगी, इस बाबत सानिया बताती हैं, “मैं 30 अप्रैल को अपनी टखने की हड्डी का स्कैन करवा रही हूँ. इसके बाद ही और स्पष्ट हो पाएगा. मुझे आशा है कि मैं तबतक ठीक हो जाऊंगी.”
सानिया के पिता इमरान मिर्ज़ा ने बताया कि शीर्ष 75 में आने के बाद से सानिया से लोगों की अपेक्षाएँ बढ़ी हैं और परिवार ख़ासा मानसिक दबाव महसूस कर रहा है और सभी का प्रयास है कि उनका प्रदर्शन बेहतर हो. सानिया को एक अच्छे कोच की भी ज़रूरत है. हालांकि उन्होंने अपने भावी कोच का नाम तो नहीं बताया पर स्वीकारा कि कुछ अच्छे प्रशिक्षकों की सूची तैयार की गई हैं और भारतीय टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति इस काम में उनकी मदद कर रहे हैं. पर क्या विज्ञापनों और तमाम दूसरे कार्यक्रमों का खिलाड़ी के खेल पर नकारात्मक असर होता है, इस बारे में सानिया बताती हैं कि खिलाड़ी को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि वो उतनी ही चीज़ों में व्यस्त हो, जो कि उसके खेल को प्रभावित न करें. वो कहती हैं, “मैंने पाया कि मेरे खेल पर भी इनका प्रभाव पड़ रहा है और इसलिए मैंने इनके लिए एक सीमा तय कर दी है.” |
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