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शनिवार, 19 मार्च, 2005 को 20:48 GMT तक के समाचार
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शतक से चूकने का मलाल नहीं: कार्तिक

कार्तिक
शतक से चूकने का मलाल नहीं बशर्ते टीम जीत जाए
कोलकाता टेस्ट मैच की पहली पारी में 28 और आज दूसरी में 93 रन बनाने वाले भारत के विकेटकीपर दिनेश कार्तिक का कहना है कि भले ही वो शतक से चूँक गए हों, अगर उनकी टीम ये टेस्ट जीत लेती है तो भरपाई हो जाएगी.

दिनेश कार्तिक ने बीबीसी को बताया कि ये टेस्ट उनके लिए अच्छा रहा है लेकिन अभी भी वो टीम में अपनी जगह पक्की नहीं समझ रहे.

वो मानते हैं कि पार्थिव पटेल और महेन्द्र सिंह धोनी से उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है.

कार्तिक की माँ पदमिनी हर दौरे पर अपने बेटे के साथ जाती हैं और दूसरी पारी में उसकी बल्लेबाज़ी से काफ़ी ख़ुश हैं.

माँ का साथ

क्रिकेट का खेल खिलाड़ियों को पूरे साल दुनिया के अलग अलग कोनों में ले जाता है और ऐसे में अपने परिवार की याद सताना लाज़मी है.

इसीलिए क्रिकेट बोर्ड डेढ़ दो महीनों तक चलने वाले दौरों पर पत्नियों को ले जाने की इजाज़त दे देते हैं.

पर भारतीय टीम में सबसे कम उम्र के सदस्य दिनेश कार्तिक क्या करते हैं क्योंकि अभी तो वो सिर्फ़ 19 साल के हैं और शादी का तो सवाल ही नहीं उठता. वो हर जगह अपनी माँ पद्मिनी को साथ ले जाते हैं.

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माँ पद्मिनी दौरे पर भी साथ होती हैं

और तो और श्रीमती पदमिनी ने अपने बेटे के साथ रहने के लिए अपनी अच्छी ख़ासी नौकरी तक छोड़ दी.

वो कहती हैं, मैं पिछले 24 साल से नौकरी कर रही थी लेकिन दिनेश के भारतीय टीम में आने के बाद मैंने नौकरी छोड़ दी क्योंकि मेरे बेटे को मेरी ज़रूरत थी. उसकी कामयाबी मेरी कामयाबी है. अब उसे ऐसे खेलते देख मुझे लग रहा है, मैंने सही फ़ैसला किया था.

कोलकाता टेस्ट में ठोस बल्लेबाज़ी कर दिनेश कार्तिक ने पाकिस्तान पर बड़ी बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई है.

वो मानते हैं कि इस प्रदर्शन के बावजूद वो टीम में अपनी जगह को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.
वो कहते हैं, ये टेस्ट मेरे लिए अच्छा रहा है. टीम में जगह पक्की करने के बारे में तो मैं सोच भी नहीं रहा. हर मैच के बाद मेरे खेल में सुधार हो रहा है.

दिनेश मानते हैं कि उन्हें भारतीय टीम के दरवाज़े पर दस्तक दे रहे अन्य विकेटकीपरों पार्थिव पटेल और महेन्द्र सिंह धोनी से कड़ी टक्कर मिल रही है.

कुंबले और भज्जी

कार्तिक के मुताबिक़ दुनिया के शीर्ष स्पिनरों के सामने विकेटकीपिंग आसान नहीं होती.

वो कहते हैं, भारतीय पिचों पर कुंबले और हरभजन के सामने विकेटकीपिंग सचमुच चुनौती भरा काम है क्योंकि पिचों में उछाल और घुमाव होता है.

कम ही लोग जानते होंगे कि कार्तिक पहले एक स्पिनर थे लेकिन बाद में उन्होंने विकेटकीपिंग के दस्ताने पहन लिए.

शौक़

कार्तिक के पिता कृष्ण कुमार कुवैत में काम करते हैं. वो भी क्रिकेटर थे लेकिन भारतीय टीम में आने की उनकी इच्छा पूरी न हो सकी.

लेकिन अब अपने बेटे को नाम कमाते देख उन्हें कैसा लग रहा होगा, ये अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहीं.

कार्तिक की माँ पदमिनी बताती हैं कि उनका बेटा संगीत और किताबों का शौक़ीन है और मांसाहारी खाना तो उसकी जान है.

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