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रविवार, 03 अक्तूबर, 2004 को 16:32 GMT तक के समाचार
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बोर्ड में पुराने खिलाड़ी मनोनीत हों:वाडेकर

अजीत वाडेकर
वाडेकर मानते हैं कि उनके समय में क्रिकेट में इतना पैसा नहीं था
भारतीय क्रिकेट टीम के सफलतम कप्तानों में से एक अजीत वाडेकर का कहना है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में कुछ पुराने खिलाड़ियों को भी मनोनीत किया जाना चाहिए.

दूसरी तरफ़ बोर्ड के उपाध्यक्ष कमल मोरारका का कहना है कि जहाँ भी खिलाड़ियों के चयन का सवाल है वहाँ यह काम सिर्फ़ खिलाड़ियों के ही हाथों में हैं.

'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए अजीत वाडेकर और कमल मोरारका दोनों ने कहा कि बोर्ड के चुनाव में जो कुछ हुआ वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरुप था.

कार्यक्रम का विषय था- 'क्या क्रिकेट अब खेल के मैदान से ज़्यादा अदालतों और राजनीति के अखाड़े में खेली जा रही है?'

 यह ठीक है कि पहले पैसा नहीं था और हम लोग सिर्फ़ देश के लिए खेलते थे और अब पैसा आ गया है, लेकिन यह कहना ठीक नहीं है कि अब खिलाड़ी देश के लिए नहीं खेलते
अजीत वाडेकर

कमल मोरारका का कहना था कि यदि चुनाव होंगे तो इसी तरह हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि मैचों के प्रसारण के अधिकार के मामले में चैनलों के साथ जो मामला चल रहा है वह भी प्रतिस्पर्धा के कारण हो रहा है.

उनका कहना था, "पाँच चैनल हैं और उनमें से प्रसारण का अधिकार किसी एक को ही मिलेगा फिर दूसरे उसके लिए कोशिश करेंगे. अब इसे रोकने के लिए तानाशाही चलाकर किसी एक को अधिकार तो नहीं दिया जा सकता.यदि मामला अदालत में चला गया है तो इसमें ग़लत क्या है."

पैसे का खेल

इस सवाल पर कि क्रिकेट खिलाड़ी अब देश के लिए नहीं पैसे के लिए खेलते हैं, पूर्व कप्तान वाडेकर ने कहा, "यह ठीक है कि पहले पैसा नहीं था और हम लोग सिर्फ़ देश के लिए खेलते थे. अब पैसा आ गया है, लेकिन यह कहना ठीक नहीं है कि अब खिलाड़ी देश के लिए नहीं खेलते."

बीसीसीआई के पैसे और उसके कारण राजनीति के सवाल पर वाडेकर ने कहा कि बोर्ड के पास पैसा आ गया है इससे खेल को सुधारने की कोशिश होनी चाहिए और बोर्ड में अनुभवी खिलाड़ियों को मनोनीत करना चाहिए.

 जब इंसान पैसों से दूर नहीं रह सकता तो फिर बोर्ड इससे दूर कैसे हो सकता है
कमल मोरारका

कमल मोरारका ने कहा कि यह सही नहीं है कि पैसे के कारण राजनेता और उद्योगपति बोर्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं. उनका कहना था कि इसका कारण ग्लैमर ज़रुर हो सकता है क्योंकि मीडिया क्रिकेट को जिस तरह महत्व देता है उससे लोगों के मन में एक आकर्षण हो सकता है.

पैसों के बारे में उन्होंने कहा, "जब इंसान पैसों से दूर नहीं रह सकता तो फिर बोर्ड इससे दूर कैसे हो सकता है."

खिलाड़ियों को बोर्ड में लेने के सवाल पर कमल मोरारका का कहना था कि राज्य की इकाइयों को खिलाड़ियों को चुनकर भेजना होगा तभी वे बोर्ड में चुनाव लड़ सकेंगे.

दोनों ने ही स्वीकार किया कि भारतीय टीम के प्रदर्शन में एकरुपता नहीं होती और उनमें 'किलिंग इंस्टिंक्ट' की ज़रुरत है.

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