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'डालमिया की छाया में काम नहीं करूँगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के नए अध्यक्ष बने हैं रणबीर सिंह महेंद्र. नाटकीय घटनाक्रम और तमाम जोड़-तोड़ के बीच महेंद्र अध्यक्ष तो बन गए हैं लेकिन उनके सामने कई तरह की चुनौती है. डालमिया के बड़े व्यक्तित्व के बीच बोर्ड में वे कितने प्रभावी रहेंगे. यह भी एक बड़ा सवाल है. इन सभी मुद्दों पर हमने बात की रणबीर सिंह महेंद्र से. आपके अध्यक्ष चुने जाने के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि आप जगमोहन डालमिया के समर्थन से अध्यक्ष बने हैं, इसलिए आप उनकी ही छाया में काम करते रहंगे, कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पाएंगे. मैं अकेले डालमियाजी की मदद से नहीं बल्कि बोर्ड के सदस्यों की मदद से अध्यक्ष बना हूं. यह ठीक है कि डालमियाजी ने मुझे समर्थन दिया लेकिन मैं केवल उनकी छाया में काम करूंगा, ऐसा नहीं है. मैं तो 'सबकी' छाया में काम करूंगा. मैं तो अपने विरोधियों से भी सहयोग लूँगा. अपने विरोधियों का विश्वास प्राप्त करने और उनसे सहयोग लेने के लिए आप क्या कर रहै हैं और आगे क्या करेंगे? मेरे सहयोगियों से मैंने पहले भी अनुरोध किया था और अब भी जो मिलता है, मैं उन सबसे कहता हूं कि आप मुझे अपनी सलाह दीजिए और जो विचार मेरे सामने आएंगे, मैं उनपर अमल करूँगा. आपके चुनाव में जिस तरह से आपकी जीत सुनिश्चित की गई, उसे लेकर चारों ओर ऊँगलियाँ उठायी जा रही हैं और कहा जा रहा है कि शरद पवार को हराने के लिए महाराष्ट्र के प्रतिनिधि ध्यानेश्वर अगाशे को डालमियाजी ने बैठक में हिस्सा नहीं लेने दिया और जान-बूझ कर चुनाव में विलंब करते रहे. क्या कहेंगे आप? मराराष्ट्र क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में श्री अगाशे की मौजूदगी को चुनौती दी गयी थी जिसमें यह कहा गया था कि वह महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं. लेकिन वही ध्यानेश्वर अगासे जब कुछ ही दिनों पहले उस बैठक में उपस्थित थे जिसमें जगमोहन डालमिया को मुख्य संरक्षक चुना जाना था तब उनपर किसी ने आपत्ति नहीं की जबकि मतदान तो उस दिन भी होने वाला था. लेकिन मतदान तो हुआ ही नहीं. सर्वसम्मति से डालमिया जी को मुख्य संरक्षक चुना गया उसमें मत तो डाले ही नहीं गए.
लेकिन उस दिन अगाशे जी ने बैठक में हिस्सा तो लिया था. उन्हें आपके चुनाव वाले दिन की तरह बैठक से निकाल बाहर नहीं किया गया था. बैठक में वो इसिलए थे क्योंकि उस दिन किसी ने उन्हें 'चैलेंज' नहीं किया था. आपके चुनाव वाले दिन उन्हें चैलेंज कर दिया, ऐसा क्यों? जिस दिन वह डालमिया जी का समर्थन कर रहे थे, उस दिन उनका उपस्थित रहना आप सबको स्वीकार्य था पर जिस दिन वह शरद पवार का समर्थन कर रहे थे और उनके समर्थन से शरद पवार का जीतना तय था, उस दिन उन्हें बैठक में बैठने भी नहीं दिया गया? ऐसा क्यों? उस दिन तो उनका ही कोई आदमी आया था पुणे से, कोई दूसरा, जिसने चैलेन्ज कर दिया. उसने कहा कि .... मुझे नहीं पता उसने क्या कहा, मेरा ख्याल है उसने कहा कि मैं प्रतिनिधि हूँ- इस पर क़ानूनी सलाह ली गयी और फिर अध्यक्षजी ने फैसला किया. जो भी फ़ैसला उन्होंने किया, वह उनका फ़ैसला था. कुछ ऐसी ख़बरें भी आई हैं कि भारतीय कप्तान सौरभ गाँगुली और आपके बीच अतीत में कुछ मतभेद रहे हैं, कुछ छींटाकशी भी होती रही है. ऐसे में आप अपने सम्बन्धों को कैसे मधुर बनाएँगे? नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. न तो कभी कोई ऐसी बात हुई, न मेरा उनसे मतभेद होने का कोई कारण, न हम दोनों में कोई 'कॉमन' चीज़ है. ये तो लोग न अंदाज़ा लगा रहे हैं. मुझे यह भी किसी ने कहा कि आपने खराब रिपोर्ट दे रखी है, गाँगुली के बारे में. मेरी रिपोर्ट तो बोर्ड में रखी है सारी की सारी. यह सब मनगढ़ंत विवादों को हवा देने के लिए कहा जा रहा है. आपने अध्यक्ष बनते ही प्रसारण अधिकारों के बारे में अहम् फ़ैसले किए हैं. क्या सोचा है आपने? टेन स्पोर्ट्स के माध्यम से हम प्रोडक्शन करेंगे और सोनी के माध्यम से हम मार्केटिंग करेंगे लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले को ध्यान में रखकर ही ऐसा किया जाएगा. |
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