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शुक्रवार, 10 सितंबर, 2004 को 05:39 GMT तक के समाचार
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कौन देश हैं कितने पानी में

पोंटिंग
विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया इस प्रतियोगिता में भी अपना वर्चस्व साबित करना चाहेगी
किसके हाथ लगेगी 2004 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी ? भारत से टक्कर लेने वाली दुनिया की 11 टीमें कितने-कितने पानी में हैं?

बारह देशों की टीमें अपनी-अपनी क़िस्मत आज़माएंगी, बल्ले और गेंद की उस लड़ाई में, जो 15 दिनों तक इंग्लैंड के तीन मैदानों पर क्रिकेट-प्रेमी दर्शकों के सामने लड़ी जाएगी.

क्रिकेट की लोकप्रियता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गयी इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए इस बार अमरीका की टीम को भी न्यौता दिया गया है और उसे पूल "ए" में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीमों के साथ रखा गया है.

पूल बी में हैं वेस्ट इंडीज़, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश की टीमें, पूल सी में भारत, पाकिस्तान और कीनिया और पूल डी में हैं इंग्लैंड, श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे.

पलड़ा भारी

पूर्व भारतीय टेस्ट क्रिकेटर सैयद किरमानी और मनिंदर सिंह दोनों का ही मानना है कि अब तक इस "मिनी" विश्व कप में जीत से वंचित रहने वाली ऑस्ट्रेलिया की टीम, चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने की हरसंभव कोशिश करेगी और पलड़ा भी उसी का सबसे भारी दीखता है.

 ऑस्ट्रेलिया की टीम के पास अनुभवी खिलाड़ी हैं. साथ ही खेल के प्रति उनका नज़रिया और बेहतरीन प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया इस प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ टीम है
सैयद किरमानी

सैयद किरमानी कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया की टीम के पास अनुभवी खिलाड़ी हैं. साथ ही खेल के प्रति उनका नज़रिया और बेहतरीन प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया इस प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ टीम है.

ग्रूप "ए" में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले मुकाबले की ओर क्रिकेट प्रेमियों की नज़र लगी रहेगी.

लेकिन अगर ऑस्ट्रेलिया के पास मैथ्यू हेडन, एडम गिलक्रिस्ट और रिकी पोटिंग हैं तो न्यूज़ीलैंड के पास भी डेनियल वेटोरी और डेरेल टफ़ी जैसे खिलाड़ी हैं और साथ में हैं ब्रेन्डन मैककुलम.

क्रिस केन्स अकेले ही मैच जिताने की क्षमता रखते हैं. फिर भी ऑस्ट्रेलिया को हराना आसान नहीं होगा.

ज़बरदस्त होगा मुक़ाबला

पूल बी में वेस्ट इंडीज़ की टीम की बात करें तो एक दिवसीय मैचों में उसके प्रदर्शन में कुछ ठहराव अवश्य आया है.

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हाल के दिनों में ख़राब प्रदर्शन के बावजूद दक्षिण अफ़्रीका की टीम को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता

लारा के साथ-साथ क्रिस गेल को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता. गेंदबाज़ी में टीम की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन युवा ऑलराउन्डर ड्वेन ब्रेभो से टीम को काफी उम्मीदें हैं.

पूल बी की दूसरी टीम दक्षिण अफ़्रीका भारत की तरह ही हर बार इस प्रतियोगिता के सेमी फ़ाइनल में पहुंचता रहा है लेकिन न्यूज़ीलैंड और श्रीलंका के हाथों लगातार दस मैचों में हार का मुँह देखने के बाद दक्षिण अफ़्रीका को वेस्ट इंडीज़ से कड़ा मुक़ाबला करना होगा.

वैसे ग्रैम स्मिथ की इस टीम में बाउचर, पोलक और निकी बोए जैसे ऑल राउंडर तो हैं ही, जैक कैलिस भी हैं जो 1998 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी के "मैन ऑफ द सिरीज़" भी रह चुके हैं.

उधर, डेव वाटमोर की देखरेख में अपने खेल को सुधारने में जुटी बांग्लादेश की टीम, वेस्ट इंडीज़ में अपने प्रदर्शन से बहुत निराश नहीं है और मोहम्मद रफ़ीक़ जैसे स्पिनर कोई चमत्कार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

पाकिस्तान भी है दावेदार

भारत के क्रिकेट प्रेमियों के लिए शायद पूल सी के उस मैच से अधिक रोमांचकारी कोई और मैच नहीं हो जिसमें 19 सितंबर को भारत और पाकिस्तान की टीमें भिड़ेंगी.

बॉब वूल्मर ने पाकिस्तान के नए कोच के रूप में टीम में नयी जान फूँकने की कोशिश की है और एशिया कप के बाद हॉलैंड में भी पाकिस्तान की टीम का सराहनीय प्रदर्शन रहा है.

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नए कोच के अधीन पाकिस्तान की टीम अच्छा खेल रही है

शोएब अख़्तर के अलावा शोएब मलिक शानदार फ़ॉर्म में हैं और ऑल राउंडर अज़हर महमूद की वापसी को प्रतिद्वन्द्वी टीमें गंभीरता से लेंगी.

उधर कीनिया की टीम मौरिस ओडुम्बे और कॉलिन्स ओबूया के बिना ही टूर्नामेंट में भाग लेगी और अकेले स्टीव टिकोलो के लिए सारा बोझ अपने सर पर लेना शायद संभव नहीं हो.

अंत में चर्चा पूल-डी की जिसमें इंग्लैंड की टीम के साथ है श्रीलंका की टीम भी.

इंग्लैंड की टीम में विक्रम सोलंकी और स्टीव हार्मिसन जैसे नए सितारों हैं तो फ्लिंटफ़ जैसे धुआँधार बल्लेबाज़ भी, जिनके प्रदर्शन को देखते हुए दुनिया के अनेक जाने-माने विशेषज्ञ यह कहने लगे हैं कि इंग्लैंड की टीम को अब हाशिए पर नहीं रखा जा सकता.

भारत के ख़िलाफ़ नैटवेस्ट सिरीज़ में निर्णायक जीत हासिल करने के बाद इंग्लैंड के हौसले बुलंद तो हैं मगर अपने पूल में उसका मुक़ाबला श्रीलंका की उसी टीम से होगा जिसने न केवल एशिया कप जीता है बल्कि दक्षिण अफ़्रीका को पांच-शून्य से रौंदा भी है.

कुमार संगकरा बेहतरीन फ़ॉर्म में हैं और मुथैया मुरलीधरन की अनुपस्थिति के बावजूद श्रीलंकाई करिश्मे की संभावना बहुत क्षीण नहीं दिखती.

पूल डी की तीसरी टीम ज़िम्बाब्वे अनुभव की कमी वाले युवा खिलाड़ियों की टीम है जिससे कुछ खास उम्मीद नहीं की जा सकती है.

कुल मिलाकर देखें तो एक सवाल जो सबकी ज़ुबान पर है वो ये कि क्रिकेट की विश्व विजेता भारी-भरकम ऑस्ट्रेलिया की टीम इस बार चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीत पाएगी या नहीं?

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