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निष्ठा और अनुशासन की ज़रूरत है: मिल्खा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'उड़न सिख' के नाम से मशहूर जाने-माने धावक मिल्खा सिंह ने इस बात से स्पष्ट रूप से इनकार किया है कि खिलाड़ियों के पास सुविधाओं की कमी है बल्कि उनके अनुसार कमी है निष्ठा और अनुशासन की. मिल्खा सिंह ने 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए कहा, "सुविधाओं में कमी की बात से मैं सहमत नहीं हूँ क्योंकि काफ़ी पैसा है, प्रशिक्षक हैं, नए उपकरण हैं. कमी है तो निष्ठा और मेहनत की." इसी कार्यक्रम के लिए एथेंस से बातचीत में खेल मंत्री सुनील दत्त ने ओलंपिक में खिलाड़ियों के अब तक के प्रदर्शन पर संतोष ज़ाहिर किया और कहा कि भले ही पदक नहीं मिला हो मगर प्रदर्शन अच्छा है. इसके अलावा खेल मंत्री दत्त और मिल्खा सिंह दोनों को ही उम्मीद है कि भारतीय टीम इस ओलंपिक में कुछ पदक जीतेगा. 'लंबी योजना की ज़रूरत' मिल्खा सिंह का कहना था कि वह चाहते हैं कि अपनी मौत से पहले वह किसी भारतीय को स्वर्ण पदक जीता देख सकें. 'उड़न सिख' मिल्खा सिंह ने कहा, "अगर हम जीतना चाहते हैं तो एक या दो दिन में नहीं जीत सकते, इसके लिए लंबी योजना चाहिए, अनुशासन चाहिए." मिल्खा सिंह ने कहा कि उनके समय में तो खिलाड़ी नंगे पैर ही दौड़ते थे और प्रदर्शन करते थे जबकि अब तो काफ़ी सुविधाएँ हैं और देशों में हज़ारों प्रशिक्षक भी मौजूद हैं. वैसे उनका कहना था कि प्रदर्शन की ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि देश में हज़ारों प्रशिक्षक हैं जिनकी कोई जवाबदेही तय नहीं की गई है जबकि वे इतने वर्षों से काम में लगे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनकी इतने वर्षों की उपलब्धि क्या रही है. मिल्खा सिंह का कहना था, "जितना पैसा हमारे पास है वो खिलाड़ियों पर ख़र्च नहीं होता. देश में पैसे की कमी नहीं है बस वो ठीक जगह पर ख़र्च नहीं हो रहा है. अगर ख़र्च ठीक से हो तो खिलाड़ियों को कोई कमी नहीं रहेगी." उनका कहना था कि देश में चार या आठ वर्षों की योजना बनाने की ज़रूरत है और उस पर काम होना चाहिए. खेलों में राजनीतिक हस्तक्षेप के बारे में मिल्खा सिंह का कहना था कि अगर खेल संघों के अध्यक्ष पद पर राजनेता या प्रशासनिक अधिकारी रहते हैं तो महासचिव के पद पर तो उस खेल से जुड़े लोगों को ही बैठाना चाहिए जिससे खेल का कुछ भला हो सके. 'खिलाड़ियों को मिलें सुविधाएँ' उधर खेल मंत्री सुनील दत्त का कहना था कि खिलाड़ियों को अच्छी से अच्छी सुविधाएँ दी जानी चाहिए. उनका कहना था कि खिलाड़ी ही अच्छे प्रदर्शन की जान हैं. अपने खेल मंत्रालय के बारे में उनका कहना था कि उन्हें काम करते हुए सिर्फ़ 100 दिन ही हुए हैं और इतने कम समय में कोई कमाल दिखाया नहीं जा सकता. सुनील दत्त का कहना था कि भारत खेलों में आगे बढ़ रहा है. |
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