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पदक की दौड़ में पीछे छूटीं कुंजारानी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
निशानेबाज़ी के बाद भारोत्तोलन में भी भारतीय उम्मीदों को शुरुआती चरण में ही झटका लगा है. 48 किलोग्राम वर्ग में अनुभवी महिला भारोत्तोलक कुंजारानी पाँचवें स्थान पर रहीं और पदक जीतने का मौक़ा उनके हाथ नहीं लग पाया. कुंजारानी ने कुल 190 किलो भार उठाया लेकिन यह कोई पदक जीतने के लिए काफ़ी नहीं था. इसी वर्ग में स्वर्ण पदक हाथ लगा तुर्की की नुरकन तैयलान को जिन्होंने रिकॉर्ड 210 किलो भार उठाया. चीन की ली जू ने 205 किलो वज़न के साथ रजत पदक और थाईलैंड की एरी विराथावॉर्न को 200 किलो भार के साथ काँस्य पदक हासिल हुआ. राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन कर चुकीं कुंजारानी ने अपनी ओर से जी-तोड़ कोशिश तो की लेकिन पहले नंबर पर रहीं तुर्की की नुरकन तैयलान के मुक़ाबले उन्होंने 20 किलो कम वज़न उठाया. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वे कितनी पीछे रह गईं. कुंजारानी की शुरुआत ही ख़राब रही जब वे पहली कोशिश में ही 82.5 किलो वज़न नहीं उठा पाईं. हालाँकि दूसरी कोशिश में उन्होंने भार उठा लिया लेकिन 85 किलो वज़न उठाने से वे फिर चूक गईं. इस तरह स्नैच मुक़ाबले में वे सातवें स्थान पर पिछड़ गईं. जर्क में उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार अवश्य किया लेकिन इसके बावजूद वे पदक की दौड़ में पीछे ही रहीं. |
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