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यादगार रही वनडे सिरीज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लाहौर के आख़िरी एक दिवसीय मैच में जीत के साथ भारत ने सैमसंग कप पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है. सालों बाद पाकिस्तान के दौरे पर आई भारतीय टीम के लिए यह भी गर्व की बात है कि उसने पहली बार पाकिस्तान में कोई एक दिवसीय सिरीज़ जीती है. आख़िरी मौक़े पर आकर पिछड़ जाने वाली भारतीय टीम ने फ़ाइनल कहे जाने वाले इस मैच में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया. पिछले कुछ सालों से एक टीम की तरह प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम ने इस मैच में साबित कर दिया कि वे यूँ हीं नहीं विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीमों में एक हैं. इस मैच में सहवाग नहीं चले, द्रविड़ सस्ते में निपटे, सचिन भी कुछ ख़ास नहीं कर पाए और कप्तान गांगुली भी 45 रन बनाकर पवेलियन लौटे. लेकिन आज तो बारी थी इस सिरीज़ में लगातार नाकाम हो रहे वीवीएस लक्ष्मण की. उन्होंने एक छोर संभाले रखा और साथी खिलाड़ियों की सहायता से अच्छे लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे. मिल-जुल कर प्रदर्शन शायद यही इन दिनों भारतीय टीम की ख़ासियत बन रही है कि सचिन नहीं चले,सौरभ नहीं चले फिर भी टीम जीती.
गेंदबाज़ी में आक्रमण की कमान संभाली एक कम अनुभवी खिलाड़ी इरफ़ान पठान ने. जो पाकिस्तान दौरे पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा अंडर 19 टीम के सदस्य के रूप में मनवा चुका था. या यों कहें कि पाकिस्तान दौरे से ही उसके लिए भारत की सीनियर टीम का दरवाज़ा खुला. पहला मैच नहीं खेलने वाले इरफ़ान पठान ने दूसरे मैच से ही ज़हीर ख़ान सहित दूसरे साथी गेंदबाज़ों की मौजूदगी में भी आक्रमण का ज़िम्मा जैसे अपने कंधों पर उठाया. इस आख़िरी वनडे में भी पाकिस्तान के तीन शीर्ष बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेज कर जैसे उन्होंने भारतीय जीत की बुनियाद रखी. योगदान बालाजी और आशीष नेहरा के योगदान को भी नहीं भूला जा सकता. बालाजी ने कुछ मौक़े पर बल्ले से भी जौहर दिखाए और गेंद से भी.
दो मैचों के बाद घायल हो कर टीम से निकल चुके आशीष नेहरा की कमी भारतीय टीम को खूब खली. कराची के पहले मैच में आख़िरी ओवर की आख़िरी गेंद पर जीत दिलाने वाली गेंद को कौन भूल सकता है. ज़हीर ख़ान आख़िरी दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन कर पाए. लेकिन काफ़ी समय बाद टीम में लौटे ज़हीर की मुश्किल समझी जा सकती है. बल्लेबाज़ी में भारतीय पाकिस्तान पर बीस हैं इससे शायद ही किसी को इंकार होगा. और सभी ने अपनी भूमिका के अनुरूप बल्लेबाज़ी भी की. यह ज़रूर है कि किसी मैच में कोई चला तो किसी में कोई. लेकिन कुल मिलाकर बल्लेबाज़ी के मोर्चे पर भारतीय खिलाड़ी चले. लक्ष्मण ने एक शतक लगाया तो सचिन ने भी. द्रविड़ दो मैचों में भारतीय जीत के कर्णधार बने तो कैफ़ की संयमपूर्ण पारी कौन भूलेगा. युवराज और सहवाग ने भी धमाकेदार पारी से भारतीय पारी की बुनियाद बनाई. भारत के लिए यह सिरीज़ याद करने वाला रहा. सुधरते संबंधों के बीच सुरक्षा चिंता मन में लिए भारतीय टीम को पाकिस्तान गई और अच्छा प्रदर्शन किया. पाकिस्तान के भी उतने ही ज़ोरदार प्रदर्शन से सिरीज़ और भी यादगार बनी. सबके लिए. |
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