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आर या पार की लड़ाई है लाहौर में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच इससे रोमाँचक मुक़ाबले की कल्पना ही नहीं की जा सकती कि दोनों टीमें दो-दो मैच से बराबर हों और श्रृंखला का फ़ैसला पाँचवें और अंतिम मैच से हो. इस समय सबसे ज़्यादा दबाव में हैं पाकिस्तानी गेंदबाज़. शोएब अख़्तर अपना रन अप सुधारने और दम-खम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं तो शब्बीर अहमद और मोहम्मद समी की लय वापस लाने के लिए उन्हें कोच जावेद मियाँदाद की कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है. टीम प्रबंधन वैसे तो प्रकट कर रहा है कि उसे अपने गेंदबाज़ों पर पूरा विश्वास है लेकिन भारतीय मध्यक्रम पर तेज़ गेंदबाज़ों का कोई असर नहीं पड़ता देख उनकी चिंता बढ़ी भी ज़रूर है. इस मैच की पिच को भी बल्लेबाज़ों की पिच माना जा रहा है जहाँ टॉस के जीतने या हारने का कोई असर नहीं पड़ना चाहिए.
जावेद मियाँदाद शाहिद अफ़रीदी के प्रदर्शन से कतई खुश नहीं हैं इसलिए उनके स्थान पर किसी नए आरंभिक बल्लेबाज़ को उतारा जा सकता है. दूसरी तरफ़ भारतीय टीम उन्हीं 12 खिलाड़ियों के साथ उतर रही है जिन्होंने पिछला मैच खेला था. लेकिन हाल के दिनों में फ़ाइनल मैच में भारत का रिकॉर्ड बहुत ख़राब रहा है. मगर भारत के उपकप्तान राहुल द्रविड़ का कहना है कि भारत पिछले चार फ़ाइनल ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हारा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया के मुक़ाबले कुछ नहीं है इसलिए भारत का पलड़ा भारी होना चाहिए. पिछले मैच में भारतीय गेंदबाज़ों ने पहले 15 ओवर में अच्छी गेंदबाज़ी की मगर अंतिम 10 ओवरों में वे बुरी तरह पिट गए. वीवीएस लक्ष्मण और ज़हीर ख़ान ऑभी तक अपनी पुरानी फ़ॉर्म नहीं पा सके हैं. लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ों ने ये दिखा दिया है कि पाकिस्तान की धारदार गेंदबाज़ी पर क़ाबू पाया जा सकता है. फिर भी इस मैच में खिलाड़ियों के कौशल से ज़्यादा उनकी मानसिक दृढ़ता की परीक्षा होगी. क़द्दाफ़ी स्टेडियम के सभी टिकट एक बार फिर बिक चुके हैं और सभी को इंतज़ार है भारत और पाकिस्तान के बीच ज़बरदस्त मुक़ाबले का. |
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