क्या वही करिश्मा दोहराएंगे योगेश्वर?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जो दिल में दर्द था, वह पदक से ही ठीक हो सकता था. आंख-पैर कुछ भी टूटे बस पदक चाहिए था.
यह आंख ठीक हो जाएगी, पैर भी ठीक हो जाएगा, मगर यहां भी पदक नहीं आया तो पूरी ज़िंदगी जीना मुश्किल हो जाएगा.
अभी तक इसीलिए जी रहे थे, क्योंकि दबाव बहुत था. तीसरा ओलंपिक था.
अगली बार के लिए अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है और कोशिश होगी कि इसका रंग बदल दूं.
ये कहना था साल 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त का.
तब दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में लंदन ओलंपिक के पदक विजेताओँ का सम्मान किया गया था.
लंदन में पदक जीतने की यात्रा में उनकी आंख में बुरी तरह चोट लगी थी. इसके बावजूद पदक जीतकर उन्होंने अपना लोहा मनवाया था.

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वही योगेश्वर दत्त अब रविवार को रियो में चल रहे 31वें ओलंपिक खेलों में कुश्ती के 65 किलो भार वर्ग में अपनी चुनौती पेश करेंगे.
योगेश्वर दत्त रियो में पुरूष वर्ग के कुश्ती मुक़ाबलों में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद हैं.
ओलंपिक खेलों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब भारत ने कुश्ती के तीनों वर्गो फ्री स्टाइल, ग्रीको रोमन और महिलाओं के मुक़ाबलों में अपनी जगह बनाई.
रियो में भारतीय खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन को आख़िरकार कुश्ती ने ही कामयाबी में बदला.

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साक्षी मलिक ने महिलाओं के 58 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीता है.
उसके बाद पीवी सिंधू ने बैडमिंटन के महिला एकल वर्ग में रजत पदक जीता.
अब अगर योगेश्वर दत्त कुश्ती में भारत को पदक दिला देते हैं तो भारत कम से कम अपने बीजिंग में जीते गए तीन पदकों की बराबरी तो कर सकेगा.
तब निशानेबाज़ी में अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण, कुश्ती में सुशील कुमार और मुक्केबाज़ी में विजेन्दर सिंह ने कांस्य पदक जीता था.

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लंदन के बाद योगेश्वर दत्त की आंख तो जल्दी ही ठीक हो गई लेकिन उन्हें अपने घुटने के तीन ऑपरेशन कराने पडे.
लंदन ओलंपिक के बाद उन्होंने बहुत अधिक टूर्नामेंट नहीं खेले लेकिन उन्होंने रियो के लिए क्वालीफाइंग टूर्नामेंट मे स्वर्ण पदक के साथ जगह बनाई.
इसके बाद उन्होंने भारत में आयोजित पहली इंडियन रेसलिंग लीग में भी हिस्सा लेकर अपनी फ़िटनेस और दमख़म दिखाया.
योगेश्वर दत्त सुशील कुमार की ही तरह भारत के सबसे कामयाब पहलवानों में से एक है.
लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक के अलावा वे साल 2010 के दिल्ली और 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.
इसके अलावा उनके खाते में साल 2014 में ही इंच्योन एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक और साल 2006 के दोहा एशियाई खेलों का कांस्य पदक भी है.

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वे साल 2003 में लंदन, 2005 में केपटाउन और 2007 में लंदन में हुई राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुके है.
अब देखना है कि अपना आख़िरी ओलंपिक खेल रहे योगेश्वर दत्त क्या करिश्मा दिखाते हैं.
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