'मैच से पहले भारतीय बड़े बोल बंद करें'

विराट कोहली

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए

मेज़बान श्रीलंका ने गॉल में खेले गए पहले क्रिकेट टेस्ट मैच में गज़ब की वापसी करते हुए भारत को 63 रन से मात दे दी.

चौथे दिन भोजनकाल के थोड़ी ही देर बाद भारतीय टीम मायूसी से ड्रेसिंग रूम में अपना सामान समेट रही थी तो मैदान में मौजूद दर्शक जश्न मना रहे थे.

इससे पहले, तीन दिन तक तो मैच में भारत का ही पलड़ा भारी था. आख़िरकार चौथे दिन भारत को जीत के लिए बचे-खुचे 153 रन बनाने थे और 9 विकेट उसके हाथ में थे.

लेकिन रंगना हेराथ की गेंदो के सामने उनकी एक ना चली. हेराथ ने 48 रन पर 7 विकेट लेकर पासा पलट दिया और भारत के बारे में एक कहावत फिर याद आ गई- 'घर के शेर, बाहर ढेर.'

श्रीलंका को मौका

भारतीय टीम गॉल में

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इस शर्मनाक हार को लेकर भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन कहते हैं, "भारत ने श्रीलंका को मैच में वापस आने का अवसर दिया. पहले तो सलामी बल्लेबाज़ राहुल कुछ नहीं कर सके. उसके बाद शिखर धवन ने चौथे दिन अपना पहला रन बनाने के लिए 36 गेंदों का सहारा लिया. बस यहीं से श्रीलंका को भरोसा हो गया कि वह अभी भी टेस्ट मैच में है, और टेस्ट क्रिकेट इसी मानसिकता का खेल है."

रंगना हेराथ की गेंदबाज़ी और पिच से मदद मिलने के सवाल को लेकर अतुल वासन मानते हैं कि विकेट में इससे पहले दिन काफी टर्न था और यह ऐसा विकेट नहीं था जिस पर 176 रन भी ना बन सकें.

उन्होंने कहा कि रोहित शर्मा अपने खेल से सबको हैरान कर रहे हैं.

चांदीमल का शतक

श्रीलंकाई के खिलाड़ी चांदीमोल

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दूसरी तरफ, श्रीलंका के दिनेश चांदीमल ने शतक जमाकर दिखाया कि विकेट में हव्वे जैसी कोई बात नहीं है.

गेंदबाज़ी में ईशांत शर्मा, वरुण एरोन और हरभजन सिंह कुछ ख़ास नहीं कर सके. ईशांत शर्मा तो इतना अनुभव हासिल करने के बाद भी टीम में अपनी भूमिका आज तक समझ ही नहीं सके हैं.

क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन का मानना है कि इस हार से टीम मैनेजमैंट को सबक लेना चाहिए.

एक तो उन्हे बड़ी-बड़ी बातें, वह भी मैच से पहले करनी छोड़नी चाहिए, जैसे- हम यहां जीतने आए हैं, आक्रामक क्रिकेट खेलेंगे. भारत के पास टेस्ट मैच के लिए अनुभवहीन टीम है.

बल्लेबाज़ी में स्थिरता नहीं

शिखर धवन और विराट कोहली

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मैगज़ीन कहते हैं, "विराट कोहली और अाजिंक्य रहाणे के अलावा कोई बल्लेबाज़ नहीं है जो टेस्ट टीम को स्थिरता दे. इसके बाद पांच गेंदबाज़ों को लेकर बल्लेबाज़ी कमज़ोर कर दी. पांच गेंदबाज़ों में भी दो को जैसे रिटायरमेंट से निकाला हो. अश्विन ने अच्छी गेंदबाज़ी की, हरभजन सिंह कभी बेहतरीन गेंदबाज़ हुआ करते थे."

मैगज़ीन के मुताबिक़, अमित मिश्रा अच्छे गेंदबाज़ हैं, पर उन पर दबाव साफ़ नज़र आ रहा था. परिस्थितियां अनुकूल होने के बावजूद वह अच्छी गेंदबाज़ी नहीं कर सके.

इससे यह साफ़ होता है कि भारत श्रीलंका जैसी टीम को भी नहीं हरा सकता, जो ख़ुद परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है.

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