कितना सुरक्षित है आज का क्रिकेट?

फ़िलिप हयूज़

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ फ़िलिप ह्यूज़ बीते मंगलवार को शेफील्ड शील्ड के एक मैच में तेज़ गेंदबाज़ शॉन एबॉट के बाउंसर पर चोटग्रस्त हो गए.

गेंद उनके सिर के पिछले हिस्से में लगी. उनकी सर्जरी भी की गई है, लेकिन बचाया नहीं जा सका और बुधवार को उनकी मौत हो गई.

क्रिकेट में तमाम तरह के बचाव के उपकरण हैं, इसके बावजूद ऐसे हादसे अतीत में भी होते रहे हैं.

आदेश गुप्त की रिपोर्ट

इस पर भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते हैं, "गलतियां किसी खिलाड़ी की तकनीक में हो सकती हैं लेकिन उन्होंने तो शॉट खेल दिया था. गेंद उनके हेलमेट के पीछे हिस्से में जाकर लगी जो पूरी तरह से सिर को कवर नहीं कर रहा था."

नरी कॉन्ट्रैक्टर के साथ ग्राहम गूच

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इमेज कैप्शन, नरी कॉन्ट्रैक्टर के साथ ग्राहम गूच

उन्होंने कहा, "हेलमेट कंपनी का भी कहना है कि उन्होंने नवीनतम हेलमेट नहीं पहना था, वह हल्का और पुराना था."

मनिंदर सिंह यह भी कहते हैं कि चोट तो क्रिकेट में लगती रहती है हालांकि यह बेहद गंभीर चोट है. क्रिकेट में हेलमेट, अच्छे ग्लव्स, थाईपैड इत्यादि सब कुछ हैं लेकिन फिर भी चोट का ख़तरा तो बना ही रहता है.

क्रिकेट में सुरक्षा से जुड़े उपकरणों को लेकर भारत के पूर्व विकेट कीपर बल्लेबाज़ विजय दहिया कहते हैं कि पहले गेंद बल्ले से लगकर हेलमेट में घुसकर नाक पर लगती थी क्योंकि उसमें सामने लगी जाली कमज़ोर होती थी.

दहिया बताते हैं, "अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर जो हेलमेट इस्तेमाल करते हैं, उसमें वह जाली टाइटेनियम की बनी होती है और दोहरी होती है. इसके अलावा अब अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार हेलमेट पर एक बार गेंद लगने के बाद उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता."

रमण लाम्बा की मौत

रमण लांबा
इमेज कैप्शन, सिर में चोट लगने के रमण लांबा की मौत हो गई थी.

वैसे क्रिकेट में इससे पहले भी अनेक हादसे हुए हैं. सचिन तेंदुलकर को तो अपने पहले टेस्ट मैच में ही वकार यूनुस के बाउंसर से नाक से ख़ून बहने का अनुभव हुआ था.

इनके अलावा भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ मनोज प्रभाकर, पूर्व बल्लेबाज़ के श्रीकांत और संदीप पाटिल भी बाउंसर पर गंभीर रूप से चोटग्रस्त हो चुके हैं.

क्रिकेट के सबसे दर्दनाक हादसों में भारत के बल्लेबाज़ रमण लाम्बा की मौत है. जब बांग्लादेश में एक मैच के दौरान फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फ़ील्डिंग करते हुए बल्लेबाज़ का तेज़ शॉट उनके सिर पर लगा था.

इसके अलावा साल 1961-62 में वेस्टइंडीज़ का दौरा करने वाली भारतीय टीम के बल्लेबाज़ नरी कॉन्ट्रैक्टर चार्ली ग्रिफिथ के बाउंसर का शिकार हुए.

नरी को ऑपरेशन के बाद मुश्किल से बचाया जा सका. उनके सिर में बाद में मेटल की प्लेट लगाई गई.

खेल से बड़ी ज़िंदगी

फ़िलिप हयूज़

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भारत के सलामी बल्लेबाज़ आकाश चोपड़ा बताते हैं कि एक बार ऑस्ट्रेलिया में फॉरवर्ड शॉर्टलेग पर फिल्डिंग करते समय मैथ्यू हैडन का दमदार शॉट उनके हेलमेट से टकराकर बाउंड्री लाइन के पास गिरा.

ऐसे में अगर सेकेंड के सौवें हिस्से में भी गेंद अगर कहीं गर्दन के आस पास लग गई तो आप सोच ही सकते हैं कि क्या हो सकता है.

जहां तक पुराने समय में बिना हेलमेट खेलने की बात है तब खिलाड़ियों की रक्षात्मक तकनीक बहुत मजबूत हुआ करती थी. अब हेलमेट आने के बाद खिलाड़ी अधिक जोखिम उठाने को तैयार दिखते हैं.

क्रिकेट में तमाम तरह के उपकरणों के बावजूद कई तरह के ख़तरे हैं लेकिन ज़िंदगी खेल से बड़ी है. उम्मीद है कि फ़िलिप ह्यूज़ स्वस्थ होकर जल्दी लौटेंगे.

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