'तो शायद मैं आत्महत्या कर चुकी होती'

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- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
शरीर में अधिक एंड्रोजन हार्मोन होने के कारण टीम से बाहर कर दी गईं ओडिशा की धाविका दुती चांद की दुनिया ही बदल गई है.
केवल दुती को ही नहीं बल्कि पूरे देश को यह उम्मीद थी कि 100 और 200 मीटर की राष्ट्रीय चैंपियन धाविका ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में पदक ज़रूर जीतेंगी.
दुती ने इसी साल जून में चीनी ताइपे में विश्व जूनियर चैंपियनशिप में 100 मीटर और 4 गुणा 400 मीटर रिले रेस में स्वर्ण पदक जीता था.
लेकिन कॉमनवेल्थ खेलों से ठीक पहले उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया.
कल तक दुनिया में देश का नाम रोशन करने का सपने देख रही इस 18 वर्षीय धाविका को अब भी समझ में नहीं आ रहा कि आख़िर उसकी ग़लती क्या थी?
'मैंने डोपिंग तो नहीं की'
उन्होंने बीबीसी हिन्दी से कहा, "मैंने डोपिंग तो नहीं की और शरीर तो भगवान का बनाया होता है. अगर मेरे शरीर में एंड्रोजन की मात्रा अधिक है, तो मैं इसमें क्या कर सकती हूं?"

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दुती का मलाल समझा जा सकता है, क्योंकि कॉमनवेल्थ से पहले भी उन्होंने कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और मेडल जीते, लेकिन कभी कोई समस्या नहीं हुई.
वो कहती हैं, "मुझे तो बताया भी नहीं गया कि मुझे किस कारण टीम से निकल दिया गया. मुझे तो अगले दिन अख़बार पढ़ने पर वजह पता लगी."
कठिन समय देखा
दुती ने बताया कि टीम से बाहर होने की ख़बर पाने के अगले कुछ दिन उनके लिए सबसे कठिन थे.
वो कहती हैं, "मैं उस समय बैंगलुरू में थी. अगले दिन मैंने ओडिशा के खेल मंत्री को फ़ोन किया तो उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वे मेरी हरसंभव सहायता करेंगे. फिर उन्होंने दो महिला प्रशिक्षकों को बैंगलुरू भेजा, जो मुझे भुवनेश्वर लेकर आए."
लेकिन दुती को समझ नहीं आ रहा है कि कॉमनवेल्थ खेलों से पहले ही यह बात सामने क्यों आई.
वो कहती हैं, "आख़िर मैं पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेती रही हूं और हर बार मेरा ब्लड टेस्ट हुआ था, लेकिन कभी कोई समस्या नहीं हुई."
फ़ैसले का इंतज़ार
दुती कहती हैं, "हर मनुष्य का शरीर अलग होता है और हमें यह स्वीकार करना चाहिए. इसके लिए किसी को खेलने से रोकना नहीं चाहिए."

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जाहिर है जबसे प्रतिबंध लगा है, दुती के लिए हर पल दूभर हो रहा है.
उन्होंने कहा, "अगर मुझे मेरे परिवार का भरपूर समर्थन नहीं मिला होता तो शायद मैं आत्महत्या कर चुकी होती."
दुती को उम्मीद है कि वे शीघ्र ट्रैक पर पर लौटेंगी. वो कहती हैं, "वैसे सब कुछ आर्बिट्रेशन के फ़ैसले पर निर्भर करता है."
तो क्या ट्रेनिंग ज़ारी है? दुती कहती हैं, "अगर कोई इम्तहान में फ़ेल हो जाए, तो पास करने के लिए और ज़्यादा मेहनत करता है, मैं भी पहले से अधिक गंभीरता से प्रैक्टिस कर रही हूं."
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