नए नहीं हैं बॉक्सिंग में बेईमानी के आरोप

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- Author, नौरिस प्रीतम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
- पदनाम, इंचियोन से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
इंचियोन में जो कुछ महिला मुक्केबाज़ एल सरिता देवी के साथ हुआ वो ना तो भारत के लिए नया है और ना ही खेलों पर पैनी नज़र रखने वालों के लिए.
ख़ास तौर पर बॉक्सिंग के खेल पर. अफ़सोस इस बात का है कि बेईमानी छोटे स्तर पर कम और बड़े स्तर पर ज़्यादा होती है.
और कोरिया में यह कोई पहला मौका नहीं है.
यहां इंचियोन में कोरिया टीम के कोच पार्क सी हुन खुद अपना ओलंपिक गोल्ड विवादास्पद तरीके से ही जीते थे.
और मज़े के बात यह है कि पार्क ने वो पदक कोरिया में ही 1988 के सोल ओलंपिक में जीता था.
बदलाव

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पार्क ने अमरीकी बॉक्सर रॉय जोंस के खिलाफ मुकाबला 3-2 से जीता था और क्योंकि पार्क को मालूम था कि असली विजेता वो नहीं बल्कि अमरीकी बॉक्सर हैं तो करीब दो साल बाद पार्क ने जोंस से माफी मांग ली थी.
इस मामले में मुकाबले के तीन जज में से एक को खेलों से आजीवन बाहर कर दिया गया था.
और इस विवाद के बाद ही बॉक्सिंग में स्कोरिंग के तरीके में बदलाव लाया गया. लेकिन स्थिति आज भी वही है.
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग के भूतपूर्व अध्यक्ष पाकिस्तान के अनवर चौधरी पर भी आरोप लगते रहे थे.
मेडल

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चौधरी पर आरोप लगे कि उन्होंने एक पाकिस्तानी बॉक्सर को ओलंपिक पदक दिलवा दिया था. बाद में उन पर गबन के आरोप भी साबित हुए.
सिडनी ओलंपिक खेलों में भारत के गुरचरण सिंह को भी इसी तरह हरा कर मेडल से वंचित रखा गया था.
बुरी तरह टूट जाने के बाद गुरचरण ने तो वही सिडनी में ही रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी. और बॉक्सिंग से संन्यास लेकर वो अमरीका चले गए थे.
हालांकि सरिता देवी ने अभी रिटायरमेंट की घोषणा तो नहीं की है लेकिन मेडल न लेकर उन्होंने विवाद को नया तूल ज़रूर दे दिया है.
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