बॉक्सिंग का बैले डांसिंग से ख़ास रिश्ता

बॉक्सिंग का बैले डांसिंग से क्या रिश्ता हो सकता है? अगर ये रिश्ता है तो कितना दिलचस्प है. जानना चाहेंगे आप?

जॉन गुडमैन
इमेज कैप्शन, अमरीकी फ़ोटोग्राफ़र जॉन गुडमैन ने बॉक्सिंग और बैले डांस की दुनिया पर काफ़ी काम किया है. इन दोनों कार्यों को दर्शाने वाली उनकी पहली प्रदर्शनी न्यूयार्क में लगी है.
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इमेज कैप्शन, बॉक्सिंग की फ़ोटोग्राफ्स पर आधारित उनका मोनोग्राफ है ' द टाइम्स स्क्वायर ज़िम' और बैले ड़ांसिंग पर फोटो आलेख 'बॉस्टन बैले.'
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इमेज कैप्शन, दरअसल टाइम्स स्क्वायर ज़िम न्यूयार्क की संस्था थी जहां कई दशकों तक एथलीट प्रशिक्षण हासिल करते रहे. इसमें नामचीन और नामालूम दोनों तरह के एथलीट शामिल रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, गुडमैन की तस्वीरों में मुक्केबाज़ी की दुनिया के लीजेंड मोहम्मद अली की तस्वीर भी शामिल है, जो 1975 में एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान ली गई थी.
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इमेज कैप्शन, द टाइम्स स्क्वायर ज़िम किताब में लिखे एक लेख में पेटे हामिल ने लिखा है कि यह ज़िम नायाब कलात्मकता का उदाहरण है. इसे श्रमिक वर्ग के लोगों की उपलब्धियों के मिसाल की तौर पर भी देखा जाता रहा है.
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इमेज कैप्शन, बोस्टन बैले डांसर्स बोस्टन में पेशेवर बैले डांसरों की एक मशहूर कंपनी है, जिसकी स्थापना 1963 में ई. वर्जिनिया विलियम्स ने की. इसके कलाकार भी किसी योद्धा से कम मेहनत नहीं करते.
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इमेज कैप्शन, गुडमैन अपनी तस्वीरों के बारे में कहते हैं, "मैंने मानव शरीर पर और उसके विरोधाभास को पकड़ने की कोशिश की है." इस कोशिश में उन्होंने प्रकाश-अंधेरे, ताकत-दया, दृढ़ता-कोमलता के बीच संघर्ष को भी बखूबी पकड़ा है.
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इमेज कैप्शन, इन तस्वीरों के बारे में रिक वेस्टर फ़ाइन आर्ट की ओर से कहा गया है कि चाहे वो बॉक्सिंग या बैले डांसिंग, दोनों ही फ़न में इंसानी शरीर की लोच, गति और तेजी और विस्मय भरी व्याकुलता मौजूद होती है.
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इमेज कैप्शन, बॉक्सिंग और बैले डांसिंग के ऐतिहासिक पलों को अपने में समेटने वाली ये प्रदर्शनी रिक वेस्टर फाइन आर्ट, न्यूयार्क में 3 अप्रैल से लेकर 31 मई, 2014 तक चलेगी. सभी तस्वीरें रिक वेस्टर फ़ाइन आर्ट के सौजन्य से प्राप्त हुई हैं और इनका कॉपीराइट जॉन गुडमैन का है.