एशियाई खेल: कुश्ती में चलेगा भारत का दांव?

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

दक्षिण कोरिया के इंचियोन होने जा रहे 17वें एशियाई खेलों में भारत को अपने पहलवानों से बहुत उम्मीदें हैं.

अब यह बात अलग हैं कि विश्व चैंपियन और लंदन ओलंपिक के रजत और बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार के चोटिल होकर हटने से भारत को गहरा झटका लगा हैं.

इन एशियाई खेलों में फ्री स्टाइल शैली में भारत के योगेश्वर दत्त के अलावा अमित कुमार, बजरंग, प्रवीन राणा, नरसिंह पंचम यादव, पवन कुमार और सत्यव्रत कादयान अपना दमख़म दिखाएंगे.

वहीं ग्रीको रोमन मे भारत के रवींद्र, संदीप यादव, कृष्ण कुमार यादव, गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह, मनोज कुमार और धर्मेंद्र दलाल हिस्सा लेंगे.

महिला वर्ग में भारत की चुनौती बबीता कुमारी, ज्योति, गीतिका जाखड़ और विनेश रखेंगी.

लक्ष्य स्वर्ण पदक

सुशील कुमार

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साल 2006 में दोहा एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत चुके योगेश्वर दत्त का मानना हैं कि उनका लक्ष्य हर हाल में स्वर्ण पदक ही जीतना हैं. इससे उन्हें रियो में 2016 में होने वाले ओलंपिक खेलों में मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा.

अमित पहली बार एशियाई खेलों में उतरेंगे

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इमेज कैप्शन, अमित पहली बार एशियाई खेलों में उतरेंगे

योगेश्वर दत्त के बाद भारत को सबसे अधिक उम्मीदें युवा पहलवान अमित कुमार से हैं. अमित कुमार का यह पहला एशियाई खेल है.

इससे पहले अमित विश्व चैंपियनशिप में रजत और पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. अमित कुमार मानते हैं कि हर बार की तरह इस बार भी वह पदक जीतेंगे.

उनके अलावा बजरंग विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य और पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीत चुके हैं. बजरंग मानते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों के मुक़ाबले एशियाई खेलों में अलग तरह की चुनौती होगी.

नरसिंह पंचम यादव दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीत चुके हैं. वह मानते हैं कि इन दिनों कज़ाख़स्तान, उज़बेकिस्तान और ईरान के पहलवान कड़ी चुनौती दे रहे हैं.

महिला वर्ग में बबीता और विनेश पर रहेंगी ख़ास नज़रें
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पिछले एशियाई खेलों में भारत को फ्री स्टाइल शैली में एक कांस्य और ग्रीको रोमन शैली में दो कांस्य पदक सहित तीन पदक ही मिले थे.

वैसे भारत के लिए अंतिम बार एशियाई खेलों में कुश्ती का स्वर्ण पदक 1986 में सोल में करतार सिंह ने जीता था.

ऐसे में क्या भारत 28 साल से स्वर्ण पदक के सूखे को समाप्त करता है या नहीं, इस पर नज़रें टिकी हैं.

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