लकड़ी से सीखा स्कीइंग का ककहरा

मोहम्मद करीम
इमेज कैप्शन, करीम ने लकड़ी के सहारे स्कीइंग की शुरुआत की थी.

रूस के सोची में चल रहे शीतकालीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले पाकिस्तान के एकमात्र एथलीट मोहम्मद करीम ने लकड़ी से स्कीइंग की शुरुआत की थी.

करीम ने बुधवार को जाएंट स्लेलोम स्पर्द्धा में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया और 71वें स्थान पर रहे. भारत के हिमांशु ठाकुर 72वें और आख़िरी स्थान पर रहे.

16 साल के करीम का जन्म पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गिलगित-बल्टिस्तान में हुआ था और वहीं उन्होंने बिना उपकरणों के स्कीइंग का ककहरा सीखा था.

करीम ने बीबीसी से कहा, "चार साल की उम्र से मैंने स्कीइंग शुरू की थी. मेरे गांव में हर साल भारी बर्फबारी होती थी."

उन्होंने कहा, "मेरे चार भाई शौकिया तौर पर प्राकृतिक बर्फ की ढलानों पर स्कीइंग करते थे. मैं भी मज़े लेने के लिए उनके साथ हो लेता था."

करीम ने कहा, "फिर मैंने लकड़ियों की स्कीइंग से शुरुआत की. तब हमारे पास इसके लिए कोई पेशेवर उपकरण नहीं थे. मेरे भाई मुझसे कहते थे कि अगर आपके मन में डर होगा तो आप अच्छे स्कीयर नहीं बन पाएंगे."

उन्होंने कहा, "शुरुआत में हम ढलान के बीच में से स्कीइंग करते थे लेकिन फिर मेरे भाई मुझे ढलान के ऊपर ले गए और उन्होंने मुझे चोटी से तलहटी तक स्कीइंग करने के लिए प्रेरित किया."

ग़लतियां

इमेज स्रोत, AFP

करीम का कहना था कि शुरुआत में वो कई ग़लतियां करते थे, लेकिन फिर जल्दी ही उन्होंने अपने खेल को सुधार लिया.

वो कहते हैं, "सोची ओलंपिक से मुझे अपने खेल में बदलाव लाने और दूसरे प्रतिद्वंद्वियों से सीखने का मौका मिला. सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया के सबसे ऊंची और कठिन ढलान पर खेलने का मौका मिला. इससे मेरे करियर में बदलाव आएगा."

करीम ने कहा, "स्कीइंग करते समय जो बात मेरे दिमाग में रहती है वो यह है कि मुझे निर्धारित समय में यह दूरी पार करनी है."

उन्होंने कहा, "मेरे कोच कहते हैं कि खिलाड़ी को किसी भी स्पर्धा को बड़ा या छोटा नहीं समझना चाहिए और हमें पूरे जुनून के साथ उतरना चाहिए. मैं हमेशा इस बात को अपने दिमाग में रखता हूं. मैं हर स्कीइंग को अपनी अंतिम स्कीइंग मानता हूं और यह बात मुझे और अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है."

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