सिरीज़ जीतने के लिए भिड़ेंगे भारत-दक्षिण अफ़्रीका

भारत दक्षिण अफ्रीका टेस्ट
    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

इससे पहले कि भारत और दक्षिण अफ़्रीका के खिलाडी जोहानिसबर्ग में ड्रॉ रहे पहले टेस्ट मैच की थकान मिटा पाते दूसरा टेस्ट मैच उनके सिर पर आ गया.

दोनों टीमें गुरुवार से डरबन में दूसरा और मौजूता सिरीज़ का अंतिम टेस्ट खेलने उतरेंगी.

इससे पहले क्रिकेट की दुनिया में दूसरी पारी में सबसे बड़ी हार या सबसे बड़ी जीत का गवाह बनने से सिर्फ आठ रन दूर रहे जोहानिसबर्ग का न्यू वांडरर्स स्टेडियम ऐतिहासिक बनते-बनते रह गया.

उसके बाद से दोनों टीमों के कप्तान और खिलाड़ी ख़ुद अपने ऊपर ज़िम्मेदारी लेने की जगह एक दूसरे पर मैच को ड्रॉ कराने का आरोप लगा रहे हैं.

विराट कोहली तो साफ-साफ कह चुके हैं कि उन्हें समझ नही आया कि जब चार ओवर का ही खेल बचा रहे तब भी फ़िलैंडर और डेल स्टेन रन बनाने की कोशिश ना करें.

दूसरी तरफ दक्षिण अफ़्रीका के कप्तान ग्रैम स्मिथ ने भी भारतीय गेंदबाज़ो के विकेट टू विकेट गेंदबाज़ी कर बाकी बचे बल्लेबाज़ो को आउट करने की कोशिश की जगह विकेट से दूर गेंदबाज़ी कर मेडिन ओवर करने की रणनीति पर सवाल उठाए.

खैर कुछ भी हो, अंत में लाभ मेहमान टीम को ही हुआ क्योंकि अगर भारत पहला टेस्ट मैच हार जाता तो फिर डरबन में उस पर बेहद दबाव होता.

भारत आज तक दक्षिण अफ़्रीका में कभी भी टेस्ट सिरीज़ नही जीत सका है लेकिन अब डरबन में उसके पास इतिहास बनाने का मौका है.

वैसे भी डरबन में दक्षिण अफ़्रीका का रिकॉर्ड पिछले पांच सालों में कोई बहुत अच्छा नही रहा है. उसने साल 2008 के जनवरी में वेस्टइंडीज़ को एक पारी और 100 रन से हराया था. इसके बाद वह डरबन में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत और श्रीलंका के हाथों हार चुका है.

विदेशी पिच

ज़हीर खान

भारत ने उसे साल 2010 में हुए पिछले दौरे में डरबन में 87 रन से हराया था. तब ज़हीर खान ने पहली पारी में 36 रन देकर तीन और दूसरी पारी में भी 57 रन देकर तीन विकेट लिए थे. अब इस दौरे पर भी ज़हीर खान ने पहले टेस्ट मैच में कुल मिलाकर पाँच विकेट लिए लेकिन इसमें पहली पारी में लिए गए चार विकेट शामिल हैं.

काश उन्होंने दूसरी पारी में भी धारदार गेंदबाज़ी की होती तो भारत जीत भी सकता था लेकिन ज़हीर ही क्या इशांत शर्मा और आर अश्विन भी कुछ नही कर सके. विदेशी पिचों पर तो वैसे भी अश्विन की गेंदे जैसे घूमना बंद कर देती है. अब भले ही भारत ने पिछले दौरे में डरबन में भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को मात दी थी.

लेकिन साल 2006-07 के दौरे में दक्षिण अफ़्रीका ने भारत को डरबन में ही 174 रन के विशाल अंतर से हराया था. इसके अलावा भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच साल 1992-93 में चार टेस्ट मैच की सिरीज़ में डरबन में खेला गया टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया था. इसके अलावा दक्षिण अफ़्रीका ने भारत को साल 1996-97 में खेली गई सिरीज़ में डरबन में 328 रन से हार का स्वाद चखाया था.

अब अगर वर्तमान दौरे की बात की जाए तो भारतीय टीम की चिंता का सबसे बड़ा कारण सलामी जोड़ी शिखर धवन और मुरली विजय का एक अच्छी शुरूआत ना देना है. पहले तो एकदिवसीय सिरीज़ और उसके बाद पहले टेस्ट मैच की दोनो पारियों में इनकी नाकामी से बल्लेबाज़ी का सारा दबाव चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली के कंधो पर आ गया.

निर्णायक मुकाबला

हाशिम अमला

अजिंक्य रहाणे ने भी टीम को अच्छा सहारा दिया लेकिन रोहित शर्मा के बल्लेबाज़ी की लय ने भी शायद उनका साथ छोड दिया है. चेतेश्वर पुजारा कई बार कह चुके हैं कि अगर दक्षिण अफ़्रीका को मात देनी है तो फिर पूरी टीम को एक इकाई की तरह खेलना होगा. भारतीय टीम विदेशों में हमेशा टुकड़ों-टुकड़ों में शानदार खेल दिखाती है. कभी किसी पारी में उसके बल्लेबाज़ चलते हैं तो कभी गेंदबाज.

दूसरी तरफ पहले टेस्ट मैच में जीत के करीब पहुंचकर मैच को ड्रॉ करवाने के बाद अपनी ही ज़मीन पर दक्षिण अफ़्रीका चारो तरफ से आलोचनाओं का सामना कर रही है. यहां तक कि क्रिकेट के पंडित अब एक बार फिर उसे 'चोकर्स कब' रहे है. ऐसे में मोर्कल के चोटिल होने से उनकी समस्याएं बढ़ गई हैं. उनकी जगह तेज़ गेंदबाज काइल अबोट खेल सकते हैं.

हाशिम अमला और यक कालिस ने पहले टेस्ट मैच में तो कुछ खास नही किया लेकिन अगर दूसरे टेस्ट मैच में भी उनका यही हाल रहा तो दक्षिण अफ़्रीका मुश्किल में पड़ सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डरबन में कौन विजेता बनता है और क्या भारत डरबन में जीत हासिल कर पहली बार वहां सिरीज़ जीतने का सपना पूरा कर पाता है या नही ?

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