वानखेड़े में सचिन: मां का डर और 'नर्वस नाइंटीज़'

- Author, तुषार बनर्जी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई से
सचिन तेंदुलकर का 200वां टेस्ट हर मायने में ख़ास है.
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में जब सचिन आख़िरी बार भारत की यूनिफॉर्म में खेल रहे होंगे तो न सिर्फ़ वहां मौजूद दर्शक, बल्कि करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की नज़रें भी टीवी के माध्यम से उन पर टिकी होंगी.
लेकिन इस बार बात केवल क्रिकेट प्रेमियों की नहीं है. स्टेडियम में हज़ारों दर्शकों की भीड़ में सचिन की मां रजनी तेंदुलकर भी होंगी जिनकी ये इच्छा थी कि वो स्टेडियम जाकर सचिन के आख़िरी मैच की साक्षी बनें.
बीमार चल रहीं रजनी तेंदुलकर इससे पहले सचिन को खेलते देखने के लिए कभी स्टेडियम नहीं गई.
वर्षों पहले एक समाचार पत्र को दिए एक दुर्लभ साक्षात्कार में रजनी तेंदुलकर ने कहा था कि वो स्टेडियम जाकर मैच नहीं देखती क्योंकि इससे उन्हें मैच के 'नतीजे का तनाव होता है.'
मां की मौजूदगी
साक्षात्कार के अनुसार, तनाव से बचने के लिए रजनी तेंदुलकर लाइव की जगह मैच के 'हाइलाइट' देखना पसंद करती थी क्योंकि तब तक उन्हें नतीजे का पता चल चुका होता था.
ज़ाहिर है मां का स्टेडियम में मौजूद होना सचिन के लिए मानसिक तौर पर बड़े सुकून की बात होगी.
छोटे भाई सचिन की प्रतिभा को देखकर उन्हें क्रिकेट की दुनिया से रूबरू कराने वाले अजित तेंदुलकर भी स्टेडियम में इस मैच को देखेंगे.

लेकिन गौरवशाली 24 वर्षों के करियर के अंतिम पांच दिन भी सचिन अपने चाहने वालों की अपेक्षाओं से मुक्त नहीं हो सकेंगे.
वानखेड़े वहीं मैदान है जहां वर्ष 2011 में भारत ने विश्वकप जीता था और साथी खिलाड़ियों ने सचिन को कंधे पर बैठाकर मैदान का चक्कर लगाया था.
सुखद यादें
मगर वानखेड़े मैदान के साथ सचिन की सिर्फ सुखद यादें ही नहीं हैं.
इसी मैदान पर सचिन दो बार 'नर्वस नाइंटीज़' के शिकार बन चुके हैं. मास्टर ब्लास्टर दो अलग पारियों में शानदार बल्लेबाज़ी करने के बाद सैकड़े से चूक गए थे.
साल 2011 में वेस्टइंडीज़ के साथ ही खेलते हुए सचिन वानखेड़े में 94 रनों पर आउट हो गए थे. रवि रामपॉल की गेंद पर जैसे ही वेस्टइंडीज़ के कप्तान डैरेन सैमी ने कैच लपका था, पूरे स्टेडियम में ख़ामोशी छा गई थी.
लेकिन इस बार बात कुछ ख़ास है, अपनी विदाई मैच में वानखेड़े का चक्रव्यूह तोड़ने के लिए सचिन ने पूरी तैयारी की है.
दूसरी तरफ उनके चाहने वाले अपने प्रिय 'तेंदल्या' के आख़िरी टैस्ट को ख़ास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












