विश्व कुश्ती चैंपियनशिप: कौन कौन दिखाएंगे दम

- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
हंगरी में सोमवार से शुरू हो रही विश्व कुश्ती चैंपियनशिप भारतीय पहलवानों के लिए अपना दमखम दिखाने का एक बढ़िया मौका है.
ये बात अलग है कि <link type="page"><caption> सुशील कुमार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2012/08/120812_sushil_kumar_olympic_final_adg.shtml" platform="highweb"/></link> और योगेश्वर दत्त जैसे भारत के स्टार पहलवान चोटिल होने की वजह से इस चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.
वैसे ख़ुद सुशील कुमार का कहना है कि अगर टीम के डॉक्टरों ने अनुमति दे दी तो वो दो-दो हाथ कर सकते है.
सुशील कुमार ने पिछले साल लंदन <link type="page"><caption> ओलंपिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/02/130216_wrestling_fila_fma.shtml" platform="highweb"/></link> में रजत पदक जीता था. उनके साथी <link type="page"><caption> योगेश्वर दत्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/02/130212_yogeshwar_wrestling_pn.shtml" platform="highweb"/></link> ने भी वहां कांस्य पदक जीता था. अब दोनों ही चोटिल है और उसके बाद से उन्होंने किसी टूर्नामेंट में हिस्सा नही लिया है.
किनसे करें करें उम्मीद
ऐसा नही है कि इस बार भारतीय दल में एक भी ऐसा <link type="page"><caption> पहलवान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130213_budding_wrestler_sad_sy.shtml" platform="highweb"/></link> नहीं है जिससे पदक की उम्मीद हो. इस दल में वैसे तो कुल मिलाकर भारत के 22 महिला और पुरूष पहलवान ताल ठोकने के लिए तैयार हैं.
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच यशवीर सिंह का कहना है कि सबसे ज़्यादा उम्मीद फ्रीस्टाइल वर्ग में 55 किलो भार वर्ग में अमित कुमार, 60 किलो भार वर्ग में बजरंग और 74 किलो भार वर्ग में उतरने वाले नरसिंह पंचम यादव से है.
महिला वर्ग में भारत का दारोमदार गीता और अनुभवी गीतिका जाखड़ पर रहेगा.
वैसे भारतीय महिलाओं ने कनाडा में हुई पिछली विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीते थे. यह कामयाबी गीता फोगाट और बबीता कुमारी ने दिलाई थी. इनके अलावा अलका तोमर भी भारत को कांस्य पदक दिला चुकी है.
निरंतरता का अभाव
अलका तोमर भारत की पहली महिला पहलवान हैं जिन्होंने साल 2006 में चीन के ग्वांग्ज़ू शहर में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में सुशील कुमार के अलावा भारत के केवल दो पहलवान ही पदक जीत सके है.
भारत को सबसे पहली कामयाबी उदय चंद ने साल 1961 में जापान के योकोहामा में कांस्य पदक जीतकर दिलाई.
उनके अलावा बिशम्बर सिंह ने साल 1967 में दिल्ली में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप मे रजत पदक जीता. ये कामयाबी साबित करती है कि कुश्ती में सफलता भारत को बहुत पहले से मिलती रही है लेकिन उसमें निरंतरता का अभाव रहा है.
अब <link type="page"><caption> कुश्ती ओलंपिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/09/130908_wrestling_olympic_comeback_ar.shtml" platform="highweb"/></link> में भी बनी रहेगी लेकिन भारतीय खेल प्रेमियों को इंतज़ार है कि सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त की कमी कौन पूरी करेगा.
इस लिहाज से विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का महत्व बढ़ जाता है. भारतीय खेमे का हौसला बढ़ाने के लिए सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त भी हंगरी में ही मौजूद है.
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