इनाम में 101 किलो घी

- Author, पवन नारा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
हरियाणा में एक कहावत है- जहाँ दूध दही का खाणा, देसा में देस हरियाणा. इसी कहावत पर हरियाणा ने राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को इनाम में घी दिया है. वो भी एक या दो किलो नहीं पूरे 101 किलो, 51 किलो और 21 किलो.
इनाम में सिर्फ़ घी ही नहीं, बल्कि इसकी सूची काफ़ी लंबी है.
हरियाणा दिवस के अवसर पर हरियाणा की ओर से राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 15 लाख रुपए, एक लग्ज़री कार, 101 किलो देसी घी और एक आधुनिक मोबाइल फ़ोन, रजत पदक विजेताओं को 10 लाख रुपए, एक मिडसाइज़ कार, 51 किलो देसी घी और एक आधुनिक मोबाइल फ़ोन और कांस्य पदक विजेताओं को पाँच लाख रुपए, एक छोटी कार, 21 किलो देसी घी और एक आधुनिक मोबाइल फ़ोन दिया गया है.
इस तरह कुल 16 स्वर्ण पदक, आठ रजत और आठ कांस्य पदक विजेताओं को इनाम दिए गए.
राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला पहलवान गीता कार पाकर खुश थीं. गीता ने कहा, "कार मिली है काफ़ी खुश हूँ, मुझे तो चलानी आती है लेकिन बहन को नहीं आती. लेकिन मैं उसको सिखा दूँगी."
इनाम देने के लिए सोनीपत के राई खेल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पूरे हरियाणा से 20 हज़ार से ज़्यादा लोग मौजूद थे.
हालांकि इस समारोह का अयोजन किसी राजनीतिक रैली की तर्ज़ पर पर था लेकिन मंच का पूरा ध्यान खिलाड़ियों पर था.
बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवान सुशील कुमार भी इनाम पाकर खुश थे. सुशील ने कहा कि इस तरह का सम्मान युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा.
सुशील कुमार का कहना था, " इस तरह हज़ारों लोगों के सामने पुरस्कार पाना किसी टॉनिक से कम नहीं. मैं चोट की वजह से एशियाई खेलों में नहीं जा पा रहा हूँ, लेकिन मैं ओलंपिक की तैयारियों में पूरे जोश में जुटा हुआ हूँ."
चार स्वर्ण पदक जीतने वाले गगन नारंग को कुल 37 लाख 50 हज़ार रुपए मिले, जबकि दो स्वर्ण पदक जितने वाले हरप्रीत सिंह और अनीसा सईद को 22 लाख 50 हज़ार रुपए मिले.
मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीत कर छोटी कार के हक़दार थे लेकिन उनके बीजिंग ओलंपिक के प्रदर्शन को देखते हुए लंबी कार दी गई, हालांकि विजेंदर सिंह इस कार को लेने के लिए मौजूद नहीं थे. उनके स्थान पर उनके पिता ने कार की चाबी ली.
जिन खिलाड़ियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा भर लिया, उन्हें भी दो-दो लाख रुपए दिए गए.
पंचायत को भी इनाम
इनाम खिलाड़ियों के कोच को भी दिए गए. स्वर्ण पदक विजेता के कोच को पाँच लाख, रजत पदक विजेता के कोच को तीन लाख और कांस्य पदक विजेता के कोच को एक लाख रुपए दिए गए.
ऐसा नहीं है कि इनाम इन खिलाड़ियों को ही मिले हैं, इन खिलाड़ियों की ग्राम पंचायत को भी छप्पर फाड़ कर इनाम मिले हैं.
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी की ग्राम पंचायत को खेल के विकास के लिए 51 लाख, रजत पदक विजेता खिलाड़ी की ग्राम पंचायत के लिए 31 लाख रुपए, कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी की ग्राम पंचायत के लिए 21 लाख रुपए और सिर्फ़ हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी की ग्राम पंचायत के लिए 11 लाख रुपए देने की घोषणा भी की.
इसी मंच से भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने सभी खिलाड़ियों को नौकरी का खुला निमंत्रण भी दिया.
भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा, "जो खिलाड़ी हरियाणा की सेवा करना चाहे, उसे उसकी योग्यता के हिसाब से नौकरी भी दी जाएगी."
आगामी एशियाई खेलों और 2012 में होने वाले लंदन ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए भी इनाम की घोषणा की गई.
जो भी खिलाड़ी एशियाई खेल में स्वर्ण पदक जीतेगा उसे 25 लाख रुपए, रजत के लिए 15 लाख और कांस्य के लिए 10 लाख रुपए दिए जाएँगे.
जो भी खिलाड़ी लंदन ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतेगा, उसे दो करोड़ रुपए, रजत पदक विजेताओं को एक करोड़ और कांस्य पदक विजेता को 51 लाख रुपए दिए जाएंगे यानी हरियाणा के खिलाड़ियों पर इनामों की बरसात होती रहेगी.
जिस अंदाज़ में सोमवार को हरियाणा के खिलाड़ियों के कुछ सपने हकीक़त में बदले, उन्हें देख हज़ारों युवाओं ने भी कुछ सपने संजोए होंगे और उन्ही सपनों में भारत के लिए पदक छिपे हुए हैं.












