You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
धोनी की आईपीएल से विदाई की कहानी होती जा रही है दिलचस्प
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
2008 में टीम इंडिया के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सचिन तेंदुलकर जिस-जिस मैदान में बल्लेबाज़ी करने के लिए जाते थे, तो उन्हें हर मैच में स्टैंडिंग ओवेशन (जब दर्शक सम्मान में खड़े होकर तालियाँ बजाते हैं) मिलता था.
रिपोर्टर के तौर पर ये मेरी पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा थी और मैं तेंदुलकर के प्रति इस सम्मान-भाव को देखकर हतप्रभ था.
एक स्थानीय पत्रकार से मैंने उत्सुकतावश पूछा कि मुझे अंदाज़ा नहीं था कि तेंदुलकर को लोग इस मुल्क में इस कदर चाहते हैं.
इस पर उनका जवाब था- "देखिए, तेंदुलकर तो अपने पहले दौरे से ही हीरो हैं ऑस्ट्रलियाई नज़रों में. लेकिन स्टैंडिंग ओवेशन की वजह कुछ और है. फ़ैंस को लगता है कि वो आख़िरी बार ऑस्ट्रेलियाई ज़मीं पर मास्टर को साक्षात बल्लेबाज़ी करते हुए देख रहे हैं."
"हो सकता है कि सचिन 2-3 साल और खेलें लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि वो फिर से ऑस्ट्रेलिया दौरे पर आएँ."
बहरहाल, तेंदुलकर एक बार फिर 2011-12 में भी ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर आए, जो उनका आख़िरी दौरा भी रहा.
उस दौरे पर भी हर मैचों में उन्हें वही स्टैंडिंग ओवेशन मिला.
महेंद्र सिंह धोनी कहेंगे अलविदा?
महेंद्र सिंह धोनी के साथ इस आईपीएल में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है क्योंकि तेंदुलकर के मुक़ाबले धोनी बिल्कुल एक अलग मिज़ाज वाले लीजेंड हैं.
जहां तेदुलकर की आख़िरी टेस्ट सिरीज़ और आख़िरी मैच यानी 200वाँ टेस्ट पूरी तरह एक ख़ास इवेंट था, जिसके बारे में हर किसी को पहले से पता था.
वहीं धोनी एकदम अपरिचित अंदाज़ में 2014 में टेस्ट क्रिकेट को यूँ ही अलविदा कह गए थे.
ऐसा ही उन्होंने वन-डे क्रिकेट में भी किया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने पर भी.
दरअसल, धोनी किसी को भी ये भनक नहीं लगने देना चाहते हैं कि वो खेल को कब अलविदा कह रहे हैं.
उन्हें हमेशा इस बात से असहजता महसूस होती है कि संन्यास की बात से हर किसी का सारा फ़ोकस टीम या खेल पर ना होकर उन पर हो जाएगा.
लेकिन, धोनी ने भी शायद अब समझ लिया है कि उनके चाहने और नहीं चाहने से कुछ फ़र्क नहीं पड़ने वाला है.
वो चाहे कितना भी अपने आख़िरी आईपीएल को लेकर कुछ भी साफ़-साफ़ कहने से बचते रहें, लेकिन पूर्व खिलाड़ी, ब्रॉडकास्टर और फैंस यही मानकर चल रहे हैं कि ये सीज़न उनका आखिरी सीज़न है.
माही के लिए जज़्बातों का सैलाब
कोलकाता में जब पूरा ईडन गार्डन्स केकेआर की जर्सी की बजाए चेन्नई सुपर किंग्स की पीली जर्सी में नज़र आए और पूरे मैच के दौरान सिर्फ़ और सिर्फ़ धोनी की ही गूँज स्टेडियम में सुनाई पड़ती रही, तो आख़िर में माही को भी सार्वजिनक तौर पर ये संन्यास वाली अटकलों पर एक बयान देना पड़ा.
पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन के दौरान धोनी ने दर्शकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा- "मैं बस समर्थन के लिए दर्शकों को शुक्रिया कहना चाहता हूँ. वो लोग बड़ी संख्या में यहाँ आए हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग अगले मैच में कोलकाता की जर्सी में आएँगे. वे मुझे विदाई देने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए दर्शकों को बहुत-बहुत धन्यवाद.''
अगर आप ग़ौर से धोनी के शब्दों पर ध्यान देंगे, तो उन्होंने ये कभी नहीं कहा कि फैंस उन्हें विदाई देने आएँ हैं, बल्कि कोशिश कर रहे हैं.
इसका मतलब है कि धोनी ने इस संभावना को पूरी तरह से ख़ारिज नहीं किया.
यानी ये बात आपको फिर से तेंदुलकर के 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के हर मैच में स्टैंडिंग ओवेशन मिलने की तरफ़ ले जाती है.
तेंदुलकर को अभिवादन तो मिलता, लेकिन वो कभी जवाब में आउट होने के बाद स्वीकारोक्ति वाले अंदाज़ में पवेलियन नहीं लौटते थे.
तेंदुलकर के मन में ये था कि वो उनका आख़िरी ऑस्ट्रेलिया दौरा नहीं है.
क्या हैं संकेत
तो क्या धोनी भी कुछ ऐसा सोचते हैं. अब धोनी खुलकर तो ये कह नहीं सकते हैं कि उनका मैच हर शहर में आख़िरी मैच होगा क्योंकि इससे फ़ोकस उनकी टीम और आईपीएल की बजाए धोनी पर आ जाएगा.
लेकिन, धोनी इस भावनात्मक सैलाब को एकदम से नज़रअंदाज़ भी नहीं कर सकते हैं.
तो उन्होंने चिर-परिचित शैली में किसी को पूरी तरह से अपने संन्यास को लेकर एकदम से ठोस राय बनाने का मौक़ा नहीं दिया है.
कुछ दिन पहले धोनी के पूर्व साथी खिलाड़ी केदार जाधव ने दावा किया था कि वो 400 फ़ीसदी कामयाबी वाले आँकड़े से कह रहे हैं कि ये धोनी का आख़िरी सीज़न होगा.
लेकिन, ठीक इस बयान के कुछ दिन बाद मोइन अली ने कहा कि धोनी को देखकर ऐसा लगता है कि वो कुछ साल और खेलेंगे.
कई बार तो दबी ज़ुबां में ये भी कहा जाता है कि बीसीसीआई ने इंपैक्ट रूल धोनी को ही ध्यान में रखकर लाया है, ताकि वो अपने करियर को 2-3 साल और आगे ले जाएँ!
भले ही मौजूदा समय में रोहित शर्मा टीम इंडिया के कप्तान हैं और विराट कोहली दिग्गज बल्लेबाज़, लेकिन इनमें से कोई भी धोनी की असाधारण लोकप्रियता को चुनौती देने के क़रीब भी नहीं पहुँचता है.
हर मैच के बाद जिस तरह से धोनी विरोधी टीम के खिलाड़ियों के साथ अपना अनुभव और ज्ञान साझा करते दिखते हैं, वो कई बार तो मैच के दिलचस्प लम्हों से भी ज़्यादा लुभावना प्रतीत होता है.
जडेजा से गुज़ारिश की जल्दी आउट हो जाएं
क्या कोच और क्या अनुभवी और क्या युवा खिलाड़ी हर कोई धोनी से तल्लीन होकर इतनी गंभीरता से उनके एक-एक शब्दों को सुनता है, उससे ऐसा लगता है कि शायद आईपीएल छोड़ने के बाद धोनी कुछ साल तक बिल्कुल ही ग़ायब हो जाएँगे.
वैसे भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने के बाद धोनी ना तो कामेंट्री बॉक्स में नज़र आते हैं और ना ही किसी तरह की कोचिंग में.
आख़िर में आपको एक और बात बताता चलूँ.
इस लेख को लिखने से पहले मैंने कोलकाता में अपने एक साथी पत्रकार को फ़ोन किया कि वाक़ई में रविवार को ईडन गार्डन्स में माहौल ज़बरदस्त था?
उस अनुभवी पत्रकार के जवाब ने मुझे भी स्तब्ध कर दिया.
उन्होंने बताया, "मैं बचपन से कोलकाता में हर टेस्ट, वन-डे और आईपीएल मैच पहले फ़ैंस और बाद में पत्रकार की तरह देखता आया हूँ. लेकिन, मैंने ऐसा माहौल कभी नहीं देखा. कहने का मतलब ये कि लोग रवींद्र जडेजा से गुज़ारिश कर रहे थे कि आप आउट हो जाएँ ताकि 2-3 गेंद भी तो धोनी की बल्लेबाज़ी करते देख पाएँ! मैदान में आने से पहले, पूरे मैच के दौरान और मैच ख़त्म होने के बाद किसी शहर का एक शख़्सियत मय होना अपवाद वाला अनुभव रहा है."
कोलकाता के एक स्थानीय पत्रकार के शब्द शायद ईडन गार्डन्स के धोनीमय होने की गाथा आने वाली कई पीढ़ियों को किस्से के तौर पर सुनाते रहेंगे.
आख़िरकार, सौरव गांगुली की ग़ैर-मौजूदगी में भी अगर कोई खिलाड़ी पूरे कोलकाता को सिर्फ अपने नाम और एक झलक से ही दीवाना बना दे, तो वाक़ई में वो कोई अद्भुत शख़्स ही होगा.
किसी को धोनी के अद्भुत और अविश्वसनीय पर संदेह भी है क्या!
धोनी के बारे में ये ख़बरें भी पढ़ें -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)