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महेंद्र सिंह धोनी का करियर क्या ख़त्म हो गया है?
- Author, शिवेंद्र कुमार सिंह
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
साल 2019. नवंबर के महीने का आख़िरी हफ़्ता. दो बड़े बयान आए. पहले महेंद्र सिंह धोनी ने अपने भविष्य को लेकर कहा- जनवरी तक इंतज़ार कीजिए.
फिर 24 घंटे के भीतर ही बीसीसीआई के नए अध्यक्ष और पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने एक समाचार एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू में कहा- धोनी के भविष्य को लेकर सब कुछ साफ़ है. टीम मैनेजमेंट, बोर्ड और धोनी तीनों के बीच इसे लेकर पारदर्शिता है.
लेकिन जब बात धोनी जैसे बड़े खिलाड़ी की हो, तो ऐसी बातों को दरवाज़े के अंदर ही रखना पड़ता है. ये बातें पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म पर सार्वजनिक नहीं की जा सकती. उस समय तो ना धोनी की बात का कोई बड़ा मतलब समझ आया और ना ही गांगुली की.
पहले लगा कि हो सकता है धोनी जनवरी में मैदान में वापसी करने वाले हों. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. अब बीसीसीआई ने जब खिलाड़ियों के सालाना करार का ऐलान किया तो इन दोनों बयानों के असली संकेत समझ आए. धोनी का नाम बोर्ड के करार की फ़ेहरिस्त में किसी भी कैटेगरी में नहीं था.
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि बीसीसीआई ए (प्लस), ए, बी और सी ग्रेड में करार करती है. जिसमें ए प्लस को 7, ए को 5, बी को 3 और सी को 1 करोड़ रुपए मिलते हैं. इस साल 27 खिलाड़ियों को करार दिया गया है.
करार और संन्यास का सीधा कोई रिश्ता नहीं
असल में सारा सस्पेंस इस बात को लेकर है कि धोनी 2020 टी-20 विश्व कप में खेलेंगे या नहीं. इस सवाल के जवाब में इस सालाना करार के ऐलान के मद्देनज़र आप ये तो कह सकते हैं कि हो सकता है कि 2020 में धोनी गिने चुने मैच खेलें लेकिन आप ये क़तई नहीं कह सकते कि धोनी इस साल एक भी मैच नहीं खेलेंगे.
ऐसा इसलिए क्योंकि सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि टीम इंडिया में खेलने के लिए सालाना करार का होना ज़रूरी नहीं होता है. किसी खिलाड़ी के पास करार ना भी हो तो भी अगर वो चयन के लिए उपलब्ध है और चयनकर्ता उसे चुनते हैं तो वो टीम के लिए खेल सकता है.
अब दूसरी बात समझनी चाहिए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट उन खिलाड़ियों को दिए जाते हैं जो साल में टीम के लिए ज़्यादा से ज़्यादा मैच खेलें. चूँकि धोनी पिछले साल विश्व कप के सेमी फ़ाइनल के बाद से चयन के लिए उपलब्ध नहीं हैं. इस बात को क़रीब 6 महीने बीत चुके हैं. 2020 में भी उन्होंने मैदान में वापसी नहीं की है.
इसीलिए उन्हें कॉन्ट्रैक्ट की लिस्ट से बाहर रखना पूरी तरह तर्कसंगत है. भारतीय टीम फ़िलहाल ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ खेल रही है. इसके बाद उसे न्यूज़ीलैंड दौरे के लिए रवाना होना है. जिसके लिए टीम का ऐलान हो चुका है. यानी धोनी अभी कम से कम दो महीने और मैदान से दूर रहेंगे.
पिछले दिनों सुनील गावस्कर ने इसको लेकर नाराज़गी भी जताई थी कि कोई खिलाड़ी इतने दिनों तक चयन के लिए कैसे अनुपलब्ध रह सकता है.
धोनी के साथ बात करके ही हुआ होगा फ़ैसला
धोनी जैसे खिलाड़ी के लिए आर्थिक तौर पर इस रक़म का कोई मायने नहीं है. बोर्ड ने इस लिस्ट को फाइनल करने से पहले धोनी से निश्चित बात की होगी. दोनों पक्षों की सहमति से ही ये फ़ैसला हुआ होगा. ये जानना ज़रूरी है कि पिछले साल भी धोनी ए (प्लस) कैटेगरी में नहीं थे.
कहते हैं कि ये उन्हीं का आइडिया था कि ए (प्लस) कैटेगरी में वही खिलाड़ी रखे जाने चाहिए जो टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों फ़ॉर्मेट में खेलते हों. चूँकि धोनी टेस्ट खेलना छोड़ चुके थे इसलिए वो ए (प्लस) कैटेगरी के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करते थे.
इस साल भी इस ए (प्लस) कैटेगरी में विराट कोहली के अलावा सिर्फ़ रोहित शर्मा और जसप्रीत बुमराह को ही रखा गया है. कुल मिलाकर धोनी के भविष्य की कहानी में एक और मोड़ आ गया है. जिसने सस्पेंस घटाने की बजाए बढ़ा ही दिया है.
वैसे आपको लगे हाथ ये भी बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी इस साल इंडियन प्रीमियर लीग में जरूर खेलेंगे. एक बार फिर वो चेन्नई सुपरकिंग्स की कप्तानी करेंगे। पिछले दिनों खबरें तो ये भी थीं कि धोनी ने 2021 में होने वाले आईपीएल के लिए खुद को प्लेयर्स ऑक्शन में रखने की बात भी कही थी.
मतलब साफ़ है कि वो 2021 तक मैदान पर दिखना चाहते हैं. ऐसे में करार की सूची में उनके नाम ना होने के मायने हर कोई अपनी सहूलियत से निकालेगा.
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