आरसीबी और आईपीएल की कहानी: मज़बूत और जीत की दावेदार होने के बावजूद कहां चूक रही है टीम

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    • Author, शिवाकुमार उलगनाथन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर यानी आरसीबी आईपीएल के किसी भी सीज़न की सबसे रोमांचक टीमों में से एक है. इसी तरह कई आईपीएल सीज़न में ये टीम सबसे निराश करने वाली टीम भी साबित हुई है.

हर सीज़न की शुरुआत आरसीबी के प्रमुख खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ़ ताज़ा ऊर्जा और आत्मविश्वास भरे बयानों के साथ करते हैं.

उनके प्रशंसक मैदान और सोशल मीडिया पर आरसीबी की प्रशंसा करते हैं और उनसे बड़ी उम्मीदें पालते हैं.

आरसीबी को बढ़ावा देने के लिए उनके प्रशंसक अक्सर कन्नड़ भाषा में 'ई साल कप नामदे' (इस साल कप हमारा है) के स्लोगन लगाते हैं.

इस स्लोगन का इस्तेमाल आरसीबी के आधिकारिक सोशल मीडिया से भी किया गया था. लेकिन आईपीएल के ख़त्म होने तक आरसीबी और उसके प्रशंसक सोशल मीडिया में ट्रोल सामग्री बन जाते हैं.

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आरसीबी के पास अच्छे बल्लेबाज हैं, कुछ सीज़न में तो सबसे बेहतर बल्लेबाज़ रहे हैं. विराट कोहली शुरुआत से ही आरसीबी के लिए खेल रहे हैं. एबी डिविलियर्स 11 सीज़न और क्रिस गेल 7 सीज़न खेल चुके हैं.

ये तीनों मैच जिताने का सामर्थ्य रखने वाले बल्लेबाज़ 2011-2017 तक साथ खेले, इस दौरान कई सीज़न में उन्होंने बेहतरीन पार्टनरशिप को निभाया.

मार्कस स्टोइनिस, देवदत्त पडिक्कल, सरफ़राज़ खान और ग्लेन मैक्सवेल जैसे खिलाड़ियों ने सीमित सीज़न में अच्छा प्रभाव डाला. टीम के पास हर सीज़न में अच्छे गेंदबाज़ थे.

इन सभी खूबियों के बावजूद आरसीबी अब तक आईपीएल ख़िताब नहीं जीत सकी है. ये टीम अब तक 3 बार फ़ाइनल में पहुंची है, 2 बार फ़ाइनल क़रीबी अंतर से हार चुकी है.

लेकिन तीन बार आईपीएल के फ़ाइनल मैच खेलने और एक बार आईपीएल विजेता होने में बड़ा अंतर है.

सर्वश्रेष्ठ स्क्वॉड की कमी

आरसीबी के पास हमेशा टीम के सक्षमता के मुद्दे थे. आमतौर पर उन्हें गुणवत्ता और साझेदार बल्लेबाज़ों से संबंधित मुद्दों का सामना नहीं करना पड़ता है. लेकिन टीम के लिए ऑलराउंडर खिलाड़ी और गेंदबाज़ चुनने पर हमेशा बहस होती रही है.

पहले सीज़न (2008) में ख़राब प्रदर्शन के बाद तत्कालीन मालिक विजय माल्या ने टीम के सिलेक्शन को लेकर टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ और सीईओ चारू शर्मा की सार्वजनिक आलोचना की थी.

आने वाले कुछ सीज़न में भी टीम के सिलेक्शन को लेकर अक्सर विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने आलोचना की थी.

कई बार सिलेक्टर बहुत अच्छे ऑलराउंडर और मैच विनर खिलाड़ी चुनते थे, लेकिन किसी तरह वे या तो उम्मीदों के मुताबिक़ प्रदर्शन नहीं कर पाते थे या एक इकाई के तौर खेल नहीं पाते थे. उदाहरणों में जैक्स कैलिस, शेन वॉटसन और क्विंटन डी कॉक शामिल हैं.

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इमेज कैप्शन, आईपीएल के पांचवें सीज़न में गेंदबाज़ ज़हीर ख़ान, विराट कोहली और क्रिस गेल

गेंदबाज़ी की चुनौतियां

भले ही उनके पास बहुत ख़तरनाक और गुणवत्ता वाले बल्लेबाज़ हैं, लेकिन उनके पास गुणवत्ता वाले टी-20 तेज़ गेंदबाज़ नहीं हैं. मिचेल स्टार्क अपवाद हो सकते हैं, क्योंकि अब तक उन्होंने सिर्फ 2 सीज़न ही खेले हैं.

ज़हीर ख़ान, टिम साउदी और डेल स्टेन अपनी आईपीएल फ्रेंचाइज़ी के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन का जादू नहीं दोहरा सके.

विनय कुमार और मोहम्मद सिराज ने अलग-अलग मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन बहुत ख़तरनाक या लगातार मैच जीतने वाला प्रदर्शन नहीं था.

हर्षल पटेल आरसीबी के तेज़ गेंदबाज हैं जिन्होंने कई सीज़न में अच्छा प्रदर्शन किया है.

आरसीबी के पास बहुत ख़तरनाक और मैच जिताने वाले स्पिनर गेंदबाज़ भी नहीं हैं.

युज़वेंद्र चहल ने 7 से ज़्यादा सीज़न खेले हैं और कई विकेट लिए हैं. अनिल कुंबले ने शुरुआती सीज़न में काफ़ी कोशिश की थी. लेकिन मुरलीधरन और डेनियल विटोरी जैसे चैंपियन गेंदबाज़ों ने भी टीम को बड़ी सफलता नहीं दिलाई.

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दबावों से निपटारा

आरसीबी और दक्षिण अफ़्रीका की मेन्स नेशनल क्रिकेट टीम में कुछ समानता है.

दोनों में से कोई भी अपने ऊपर पड़ने वाले चोकर्स टैग को नहीं रोक पा रहा है. दक्षिण अफ़्रीका भी कोई आईसीसी विश्व कप नहीं जीत सका है.

1992 के विश्व कप के बाद से लगभग हर बार दक्षिण अफ़्रीका पसंदीदा टीम की सूची में रहा है, लेकिन अंत उनके लिए निराशाजनक होता है.

1999 के विश्व कप में दक्षिण अफ़्रीका के पास कालिस, क्लूसनर, डोनाल्ड, बाउचर, क्रोन्ये और रोड्स शानदार फॉर्म में थे. लेकिन वे सेमीफाइनल में सबसे अविश्वसनीय तरीके से ऑस्ट्रेलिया से हार गए. 2015 विश्व कप सेमीफाइनल में भी ऐसा ही हुआ.

घरेलू ग्राउंड में खेलने और दमदार खिलाड़ियों के लाइन-अप के बावजूद 2003 के विश्व कप में दूसरे चरण के लिए साउथ अफ़्रीका की टीम क्वालीफाई नहीं कर पाई. ज़्यादातर बार टीम और विशेषज्ञों ने 'दबाव से निपटने' की बात को इसका कारण बताया.

आरसीबी भी दबाव से अच्छे से न निपट पाने के कारण करीबी नॉकआउट मैच हार गई. टीम के पास 2016 के फ़ाइनल में जीतने का बहुत अच्छा मौक़ा था. जिस तरह से उन्होंने आरसीबी की बल्लेबाज़ी के आधे चरण तक उनका पीछा करना शुरू किया, उनसे आसान जीत की उम्मीद थी.

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लेकिन बल्लेबाज़ों के ढह जाने के बाद और दबाव को संभालने में अक्षम होने की वजह से एक बार फिर आरसीबी बदनसीब रही और हार गई.

क्या 2023 सीज़न आरसीबी की किस्मत में कोई बदलाव होगा.

क्रिकेट विशेषज्ञ आनंद वेंकटरमन ने बीबीसी के साथ अपने विचार साझा किए हैं.

वो कहते हैं, "आरसीबी के साथ हमेशा गेंदबाज़ी की चुनौतियां रही हैं. टीम के पास कभी बहुत मज़बूत गेंदबाज़ नहीं थे और कभी-कभी उनके द्वारा चुने गए सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ अपनी क्षमता के अनुसार नहीं खेल पाते थे. यहां तक ​​कि कई सीज़न में उनके पास मैच विनिंग ऑलराउंडर भी नहीं थे.''

"आरसीबी के पास अतीत को भुलाकर इस बार गौरव हासिल करने का अच्छा मौका है. डु प्लेसिस, विराट कोहली और दिनेश कार्तिक काफी सीनियर खिलाड़ी हैं. इन्होंने अपने दम पर कई आईपीएल और टी-20 मैच जीते हैं.मौजू़दा टीम में ऑल राउंडर और गेंदबाजों का अनुभवी और युवा ख़िलाड़ियों का एक दिलचस्प मिश्रण है.''

आनंद वेंकटरमन कहते हैं, "आरसीबी का अपने घरेलू स्टेडियम में खेलने के लिए वापस आना उनके लिए एक और सकारात्मक संकेत है. अगर वे नॉक-आउट मैचों में दबाव को अच्छी तरह से संभाल लेते हैं, तो आरसीबी को ख़िताब पर कब्ज़ा करने में ज़्यादा बाधा नहीं होगी.''

जैसा कि वे हमेशा कहते हैं, "कप और होंठ के बीच कई बार फ़िसलन होती है", आरसीबी को होने वाली घटनाओं की वजह से सभी पर नज़र रखनी होगी.

यह देखना होगा कि आरसीबी दबाव को अच्छी तरह से संभालते हुए और टूर्नामेंट के अंत में ट्रॉफ़ी हाथों में लेकर आख़िरकार, वे 'ई साल कप नामदे' को सच साबित करेंगे.

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