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बृज भूषण शरण सिंह की जाँच के मामले में विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया क्यों हैं नाराज़
क़रीब एक महीने से ज़्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन विवादों से घिरे कुश्ती संघ और उसके अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह से संबंधित मामले में कोई हल नहीं निकल पाया है.
सरकार की ओर से गठित कमेटी अब भी संघ अध्यक्ष पर लगे यौन शोषण के आरोपों की जाँच कर रही है.
लेकिन खिलाड़ियों ने कमेटी के एक सदस्य के ख़िलाफ़ ही पक्षपात और जानकारी लीक करने के आरोप लगा दिए हैं.
खिलाड़ियों की मांग पर सरकार ने जाँच कमेटी में पूर्व पहलवान बबीता फोगाट को शामिल किया, लेकिन पहलवानों ने इस बीच दो बड़े मुक़ाबलों में हिस्सा ना लेकर सरकार को नाराज़ ही किया है.
फ़रवरी के महीने में दो बड़े मुक़ाबले हुए. इनमें रैंकिंग अंक मिलते हैं. एक ज़ाग्रेब ओपन, क्रोएशिया में और दूसरा मिस्र के एलेक्ज़ेंड्रिया में.
लेकिन चोटी के पहलवान जैसे विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, अंशु मलिक और रवि दहिया ने इन मुक़ाबलों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया.
इस मुक़ाबले में भारत के दूसरे पहलवान कुछ ख़ास नहीं कर पाए. कुल मिला कर इन दोनों टूर्नामेंटों में भारत को सिर्फ़ चार कांस्य पदक मिले.
ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं कि सरकार इस बात से ख़ुश नहीं है कि जब खिलाडियों की मांगें मान ली गई थीं तो उन्होंने इन मुक़ाबलों में भाग क्यों नहीं लिया.
मांग
ये समझा जा सकता है कि ज़ाग्रेब टूर्नामेंट के समय खिलाड़ी न तो शारीरिक और ना ही मानसिक रूप से तैयार थे, क्योंकि उनका धरना प्रदर्शन तब ख़त्म ही हुआ था. लेकिन मिस्र के टूर्नामेंट से पहले उनके पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय था.
ग़ौरतलब है कि खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के दौरान ही ये एलान कर दिया था कि जब तक संघ को भंग नहीं किया जाता और बृज भूषण सिंह को उनके पद ने नहीं हटाया जाता, वो भारत के किसी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में हिस्सा नहीं लेंगे.
खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, "खिलाड़ियों की ट्रेनिंग हो या विदेशी दौरों का एक्सपोज़र, सरकार इन खिलाड़यों को पूरा समर्थन देती है. उनकी मांगें भी मान ली गई थीं, संघ के अध्यक्ष को जाँच पूरी होने तक संघ से दूर रहने का आदेश भी दे दिया गया था.
बबीता फोगाट को भी जाँच कमेटी में शामिल किया गया, इसलिए ये समझ नहीं आता कि अब इन खिलाड़ियों की क्या समस्या थी कि उन्होंने ज़ाग्रेब और मिस्र जाने से मना कर दिया, ये मनमानी ठीक नहीं लगती."
फ़िलहाल अपनी जाँच पूरी करने के लिए ओवरसाइट कमेटी को दो सप्ताह का समय और मिला है. सरकार ने शुरुआत में जाँच पैनल को 23 फ़रवरी तक का समय दिया था, लेकिन सदस्यों के आग्रह पर अब उनके पास 9 मार्च तक का समय है.
नाराज़गी
लेकिन विनेश फोगाट ने ट्विटर पर अपना रोष प्रकट करते हुए कहा कि जाँच कमेटी का एक सदस्य मीडिया को संवेदनशील जानकारी लीक कर रहा है.
विनेश ने किसी का नाम नहीं लिया है. लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त की ओर है.
दरअसल, खिलाड़ी शुरू से ही जाँच पैनल में योगेश्वर दत्त की मौजूदगी से नाराज़ थे.
उन्हें लगता है कि योगेश्वर बृज भूषण के पक्ष की ही बात करते हैं. इसीलिए उन्होंने बबीता फोगाट को पैनल में रखने की मांग की थी.
बजरंग पुनिया ने विनेश का समर्थन करते हुए ट्विटर पर लिखा- जिनसे प्रेरणा लेकर खिलाड़ी हमेशा आगे बढ़े हों और वही खिलाड़ी जब अपने निजी स्वार्थ के लिए खुलेआम उन महिला खिलाड़ियों का मज़ाक बना रहे हैं जो महिला खिलाड़ी ख़ुद अपने आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं. ऐसे खिलाड़ी से हम न्याय की क्या उम्मीद करेंगे?
बृज भूषण शरण सिंह की पेशी
इस बीच कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने मंगलवार को सरकारी पैनल के सामने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. तीन घंटे तक चली पूछताछ के बाद बृज भूषण ने मीडिया से बात नहीं की.
लेकिन एक सूत्र ने बताया कि उन्होंने पैनल के सामने अपना पक्ष रखा है.
बृजभूषण लगभग 20 समर्थकों के साथ अपना पक्ष रखने पहुँचे थे, जिनमें कई पहलवान भी शामिल थे.
इस बीच इस विवाद के चलते, भारत से एशियाई चैंपियनशिप की मेज़बानी छीन ली गई है.
खिलाड़ियों ने विश्व कुश्ती संघ को एक लिखित शिकायत दर्ज की और कहा कि भारतीय संघ के अध्यक्ष ने महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण किया है.
इस बात का संज्ञान लेते हुए UWW ने दिल्ली से मेज़बानी ले कर कज़ाख़स्तान को दे दी है.
एशियाई चैंपियनशिप दिल्ली में अप्रैल के महीने में होनी थी.
कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह की छवि एक बाहुबली नेता की है.
देश के नामी पहलवानों ने उनके तानाशाही रवैए के ख़िलाफ़ मोर्चा खड़ा किया और ये आरोप लगाया कि बृज भूषण शरण सिंह ने कई महिला पहलवानों का यौन शोषण किया है.
तीन दिनों तक पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे रहे और जब तक सरकार ने निष्पक्ष जाँच का आश्वासन नहीं दिया, वहाँ से वे नहीं हिले.
बृज भूषण शरण सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया था और उल्टे खिलाड़ियों को ही घेरा था.
खिलाड़ियों के आरोप
धरने के दौरान एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विनेश फोगाट ने कहा था- कोच महिलाओं को परेशान कर रहे हैं और फ़ेडरेशन के चहेते कुछ कोच तो महिला कोचों के साथ भी अभद्रता करते हैं. वे लड़कियों को परेशान करते हैं. भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रेसीडेंट ने कई लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया है.
फोगाट ने ये भी दावा किया था, "वे हमारी निजी ज़िंदगी में दखल देते हैं और परेशान करते हैं. वे हमारा शोषण कर रहे हैं. जब हम ओलंपिक खेलने जाते हैं तो न तो हमारे पास फ़िज़ियो होता है न कोई कोच. जब हमने अपनी आवाज़ उठाई तो उहोंने हमें धमकाना शुरू कर दिया."
दूसरी ओर कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने इन आरोपों के जवाब में कहा था, "कोई भी आदमी ऐसा है जो कह सके कि कुश्ती संघ में एथलीटों का उत्पीड़न किया गया है."
उन्होंने ये भी दावा किया कि 'किसी भी एथलीट का यौन शोषण नहीं हुआ है. अगर यह सच साबित होता है तो वे फाँसी पर लटकने को तैयार हैं.'
खिलाड़ियों के आरोपों के बाद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने एमसी मेरी कॉम की अगुवाई में जाँच के लिए निगरानी समिति का गठन किया था.
इस समिति में बबीता फोगाट और योगेश्वर दत्त को शामिल किया गया था. इस दौरान समिति को मंत्रालय ने कुश्ती संघ के रोज़मर्रा के काम को देखने की भी ज़िम्मेदारी दी थी और बृज भूषण शरण सिंह को इससे अलग रखा गया था.
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(पीटीआई के खेल पत्रकार अमनप्रीत सिंह से बातचीत पर आधारित)
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