26 जनवरी को 30 साल पहले क्रिकेट में बना था ये रिकॉर्ड जो आज तक है कायम

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    • Author, अभिजीत श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय क्रिकेट टीम ने श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड से तीन-तीन मैचों की वनडे सिरीज़ क्लीन स्वीप कर ली है. इसके साथ ही उसने टी20 के बाद अब वनडे क्रिकेट की आईसीसी रैंकिंग में भी अपनी बादशाहत कायम कर ली है यानी इस लिस्ट में टॉप पर पहुंच गई है.

अब अगले महीने ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के दौरे पर आ रही है. कंगारुओं के साथ भारतीय टीम चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेलेगी.

इस सिरीज़ को 2-0 या 3-1 से जीतने की सूरत में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में भी नंबर-1 बन जाएगी.

ऑस्ट्र्लियाई टीम पिछले 15 टेस्ट मैचों में से केवल एक हारी है. हालांकि भारत के साथ खेली गई पिछली तीनों सिरीज़ में आस्ट्रेलिया को हार मिली है.

लेकिन क्या ऑस्ट्रेलियाई टीम को हरा कर टी20, वनडे के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट में भी भारत अपनी बादशाहत कायम कर पाएगा? इसका जवाब तो अभी भविष्य में छिपा है लेकिन इस सवाल के बीच चलिए हम ऑस्ट्रेलियाई टीम से जुड़े उस टेस्ट मैच की कहानी को याद करते हैं जिसका नतीजा आज भी टेस्ट मैच में सबसे छोटे अंतर से मिली जीत के रूप दर्ज है.

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  • ऑस्ट्रेलियाई टीम के भारत दौरे के दौरान दोनों के बीच चार टेस्ट मैचों के अलावा तीन वनडे मैच खेले जाएंगे.
  • टेस्ट मैच 9 से 13 फ़रवरी को नागपुर में, 17 से 21 फ़रवरी को दिल्ली में, 1 से 5 मार्च को धर्मशाला में और 9 से 13 मार्च को अहमदाबाद में होंगे.
  • वहीं वनडे सिरीज़ में तीन मुक़ाबले होंगे. पहला 17 मार्च को वानखेड़े में, दूसरा 19 मार्च को विशाखापत्तनम में और तीसरा 22 मार्च को चेन्नई में खेला जाएगा.
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Courtney Walsh, कर्टनी वाल्श, 26january

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सबसे कम रन से जीत का रिकॉर्ड

26 जनवरी यानी आज उस यादगार और ऐतिहासिक मैच के 30 साल पूरे हो गए हैं जो 1993 में खेला गया था. इसमें टेस्ट मैच के इतिहास में सबसे कम रन से जीत का रिकॉर्ड बना था, जो आज भी बरकरार है.

आज के दौर में बेशक टी20 और वनडे मुक़ाबलों में आख़िरी गेंद पर और एक रन के अंतर से जीतने के कई उदाहरण बड़ी आसानी से मिल जाएंगे. लेकिन आपको ये जान कर हैरानी होगी कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसा केवल एक ही बार हुआ था और उस टेस्ट मैच का फ़ैसला 26 जनवरी 1993 को आया था.

ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज़ के बीच एडिलेड में खेले गए उस टेस्ट मैच में कैरिबियाई टीम केवल एक रन से जीती थी. ये आज भी केवल एक रन से कोई टेस्ट मैच जीतने का एकमात्र उदाहरण है. तो 26 जनवरी 1993 को एडिलेड टेस्ट में इतिहास रचा गया था. ये टेस्ट बेहद रोमांचक था और इसकी बानगी न उससे पहले न उसके बाद कभी देखी गई.

वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट टीम, 26january

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वेस्ट इंडीज़ टेस्ट क्रिकेट का स्वर्णिम दौर

आज के दौर में वेस्ट इंडीज़ की जो कमज़ोर टीम दिखती है, अपने स्वर्णिम युग में वो इसके ठीक उलट थी. 1976 से शुरू हुए उसके स्वर्णिम काल के दौरान उसे हराना बहुत मुश्किल था.

उत्तरी अटलांटिक महासागर और कैरिबियाई सागर से घिरे द्वीप समूहों के खिलाड़ियों से बनी वेस्ट इंडीज़ की टीम 95 वर्षों (1928) से टेस्ट क्रिकेट खेल रही है. अब तक उसने 163 टेस्ट सिरीज़ में से 66 में जीत हासिल की है. वहीं अपने स्वर्णिम युग के दौरान कैरिबियाई टीम ने 25 टेस्ट मैच जीते, दो टेस्ट सिरीज़ हारी और नौ सिरीज़ ड्रॉ खेले.

ये वो दौर था जब इस चैंपियन टीम की कमान क्लाइव लॉयड से होते हुए रिची रिचर्डसन तक पहुंची थी.

लॉयड वेस्ट इंडीज़ को दो बार वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान भी थे. टीम के पास उस दौरान अलग-अलग समय में एक से बढ़ कर एक बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ ही नहीं बल्कि विकेटकीपर और फ़ील्डर भी मौजूद थे.

स्वर्णिम काल के इन वर्षों के दौरान टीम के पास जोएल गार्नर, माइकल होल्डिंग, मैल्कम मार्शल, कर्टले एम्ब्रोज, कर्टने वाल्श, इयान बिशप जैसे ख़ौफ़नाक तेज़ गेंदबाज़ों एक लंबी फेहरिस्त थी, तो बल्लेबाज़ी में लॉयड, सर विवियन रिचर्ड्स, गॉर्डन ग्रिनीज, डेसमंड हेंस, फिल सिमंस, लैरी गोम्स, गस लोगी, ब्रायन लारा, कार्ल हूपर, रिची रिचर्डसन, जेफ़ डुजॉन जैसे विपक्षी गेंदबाज़ों की धार को कुंद करने वाले बेहतरीन बल्लेबाज़ हुआ करते थे.

साठ के दशक से ही क्रिकेट के पटल पर अपनी बादशाहत कायम करने वाली वेस्ट इंडीज़ की टीम ने स्वर्णिम काल के दौरान अपनी क्रिकेट को एक ऐसी ऊंचाई दी जिसकी चर्चा आज तक कायम है.

ये ऐतिहासिक मैच उसी दौर में खेला गया था. हालांकि तब वेस्ट इंडीज क्रिकेट का स्वर्णिम काल अपने ढलान पर था. तब वेस्ट इंडीज़ की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी. जहां एडिलेड में टेस्ट सिरीज़ का दूसरा मुक़ाबला खेला जा रहा था.

1993 एडिलेड टेस्ट, 26january

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एडिलेड टेस्ट में क्या हुआ था?

कंगारुओं के जबड़े से जीत चुरा ले जाने के रिकॉर्ड के रूप में दर्ज उस टेस्ट मैच में वेस्ट इंडीज़ की टीम ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी करना चुना.

पारी की शुरुआत तो अच्छी हुई लेकिन 84 रन के योग पर एक बार फिल सिमंस और डेसमंड हेंस की सलामी जोड़ी टूट गई तो मध्य क्रम में ब्रायन लारा और जूनियर मरे की बल्लेबाज़ी को छोड़ कर और कोई बल्लेबाज़ नहीं चला. कैरिबियाई टीम ने लड़खड़ाते हुए रन 252 का स्कोर खड़ा किया. ऑस्ट्रेलिया की ओर से मर्व ह्यूज ने पांच विकेट लिए.

इसके जवाब में कंगारुओं ने स्टीव वॉ (42 रन) और मर्व ह्यूज के 43 रनों की बदौलत 213 रन बनाए.

पहली पारी के आधार पर वेस्ट इंडीज़ को मामूली बढ़त मिली लेकिन दूसरी पारी में कैरिबियाई टीम पूरी तरह से लड़खड़ा गई और केवल 146 रन ढेर हो गई. इसमें से 72 रन तो अकेले कप्तान रिचर्डसन ने बनाए.

चार साल बाद टीम में वापसी कर रहे टिम मे ने 9 रन देते हुए पांच विकेट लिए तो क्रेग मैक्डरमॉट ने तीन विकेट चटकाए.

अब ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए महज 186 रन का लक्ष्य था. ऑस्ट्रेलियाई टीम के ओपनर्स डेविड बून (शून्य) और मार्क टेलर (7 रन) जल्दी जल्दी आउट हो गए. 26 रन की पारी खेल कर मार्क वॉ भी आउट हो गए. जस्टिन लेंगर ने अर्धशतक जमाया लेकिन 144 रन बनने तक 9 खिलाड़ी आउट हो गए.

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ऑस्ट्रेलिया की टीम के लिए जीत अब भी 42 रन दूर थी. ऐसे में एक छोर पर टिम मे और दूसरी पर क्रेग मैक्डरमॉट डट गए, दोनों स्कोर को 184 रन पर ले गए.

9वें विकेट की साझेदारी में 40 रन बन चुके थे और जीत के लिए अब केवल दो रन ही चाहिए थे. जीत की उम्मीद में स्टेडियम में वाल्ज़िंग मटिल्डा के गाने बजाए जाने लगे.

अब गेंदबाज़ी का छोर कर्टनी वाल्श संभाल रहे थे तो बल्लेबाजी का सिरा क्रेग मैक्डरमॉट के पास था.

वाल्श ने अगली गेंद बाउंसर डाली जो गेंद मैक्डरमॉट के ग्लव्स से लगते हुए विकेट के पीछे चली गई और अंपायर ने अपनी ऊंगली खड़ी कर दी.

लेकिन टीवी रीप्ले पर ये स्पष्ट दिखा कि गेंद और ग्लव्स के बीच पर्याप्त अंतर था.

इसके साथ ही हार के मुहाने पर खड़ी वेस्ट इंडीज़ की टीम 1 रन से जीत गई और अगला मैच जीत कर उसने सिरीज़ पर क़ब्ज़ा भी कर लिया.

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क्या बोले बॉर्डर और रिचर्डसन?

मैक्डरमॉट को आउट देने का फ़ैसला ऑन फील्ड ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डेरेल हेयर ने दिया था. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने उनके इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील भी की लेकिन डेरेल हेयर ने अपना निर्णय नहीं बदला.

टीवी पर ये साफ़ दिखा कि वाल्श की गेंद मैक्डरमॉट के ग्लव्स को छुए बग़ैर ही विकेट के पीछे गई थी.

मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एलेन बॉर्डर ने खेल भावना का पूरी परिचय देते हुए अंपायर डेरेल के फ़ैसले पर कोई सवाल नहीं उठाया.

हालांकि बॉर्डर ने कहा, "मैच के फ़ैसले की तरह ही ये बहुत ही नजदीक़ी मामला था. आप क्या कह सकते हैं- एक रन? दिन की शुरुआत में मैं बहुत आश्वस्त था कि 186 रन तो बन ही जाएगा."

वहीं कैरिबियाई टीम के कप्तान रिचर्डसन ने कहा, "मुझे लग रहा था कि वाल्श अपनी उस गेंद पर विकेट ले लेंगे. मैंने उम्मीद बिल्कुल ही नहीं छोड़ी थी."

दोनों कप्तानों ने उस मैच के हीरो रहे वेस्ट इंडीज़ के गेंदबाज़ की तारीफ़ में कोई कसर नहीं छोड़ी.

मैच का फ़ैसला बेशक कर्टनी वाल्श की गेंद पर आया लेकिन ऑस्ट्रेलियाई पारी के पतन का कारण रहे एम्ब्रोस जिन्होंने मैच में 10 विकेट लिए. एम्ब्रोस ने मैच के आखिरी दिन लंच के बाद केवल 19 गेंदों के दरम्यान स्टीव वॉ, मार्क वॉ और मर्व ह्यूज को आउट भी किया था.

डेरेल हेयर, मुरलीधरन, 26january

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इमेज कैप्शन, जब डेरेल हेयर ने मुरलीधरन की लगातार सात गेंदों को नो बॉल दिया था

डेरेल हेयर के विवादास्पद फ़ैसलों के सिलसिले की शुरुआत

ये मैच इस लिहाज से भी यादगार रहा कि डेरेल हेयर के विवादास्पद अंपायरिंग करियर की शुरुआत भी इससे हुई थी.

हेयर ने 1992 में अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में अंपायरिंग शुरू की थी लेकिन वे कई विवादास्पद फ़ैसलों के लिए चर्चा में रहे और ऐसी नौबत भी आई कि आईसीसी को उन्हें अंपायरिंग से हटाना पड़ा.

हेयर ही वो अंपायर हैं जिन्होंने श्रीलंका के स्टार गेंदबाज़ मुथैया मुरलीधरन की गेंदबाज़ी एक्शन को ग़लत ठहराया था.

मुरलीधरन की गेंद को हेयर तब तक नो बॉल देते रहे जब तक कि कप्तान अर्जुन रणातुंगा ने उन्हें गेंदबाज़ी से हटा नहीं लिया. तब हेयर ने मुरलीधरन के तीन ओवर की सात गेंदों को नो बॉल दिया था. हेयर का मानना था कि मुरलीधरन चकिंग कर रहे हैं. वहीं मैच के दूसरे अंपायर न्यूज़ीलैंड के स्टीव डन को मुरलीधरन के एक्शन में कोई परेशानी नहीं दिखी.

हेयर के मुरलीधरन की गेंदों पर लिए गए फ़ैसलों से कप्तान अर्जुन रणतुंगा ख़फ़ा हो गए और टीम को मैदान से बाहर ले गए. हालांकि वो टीम को दोबारा मैदान पर लेकर लौटे भी.

जब पाकिस्तान की टीम ने किया था हेयर का विरोध

2006 में डेरेल हेयर ने पाकिस्तान की टीम पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाया और उस पर पांच रन जुर्माना लगा दिया.

इंग्लैंड के साथ ओवल में खेले गए इस (चौथे) टेस्ट मैच में पाकिस्तानी टीम ने इसका विरोध करते हुए टी ब्रेक के बाद मैदान पर नहीं उतरने का फ़ैसला किया.

तब इस विवाद को सुलझाने की घंटों कोशिश की गई और पाकिस्तान की टीम मैदान में उतरी भी लेकिन तब तक अंपायर ने इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया था.

इस टेस्ट मैच के बाद आईसीसी ने उन्हें अंपायरिंग से हटा लिया और हेयर अगले 21 महीने अंपायरिंग से बाहर रहे. फिर 2008 में उन्होंने वापसी की लेकिन केवल दो मैचों के बाद उन्होंने इसे (अंपायरिंग को) हमेशा के लिए छोड़ दिया.

1987 रिलाएंस वर्ल्ड कप के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम, 26january

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इमेज कैप्शन, 1987 रिलाएंस वर्ल्ड कप के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम

एडिलेड टेस्ट- एक अहम मोड़

क्रिकेट एंथोलॉजी ऑफ़ द एशेज में साइमन ह्यूज लिखते हैं, "वेस्ट इंडीज़ के इस ऑस्ट्रेलियाई दौरे में एडिलेड टेस्ट का बहुत महत्व है, क्योंकि ये वो मौक़ा था जब कैरिबियाई टीम की बादशाहत को एक बहुत बड़ी चुनौती मिली थी."

तब कैरिबिाई खिलाड़ी घरेलू मैदानों पर शेर तो थे ही, विदेशी धरती पर भी उनकी तूती बोल रही थी.

लेकिन ऑस्ट्रेलिया 1987 के वनडे वर्ल्ड कप को अपने नाम कर चुका था और इस दौरान टेस्ट क्रिकेट में वेस्ट इंडीज़ की टीम एक भी सिरीज़ नहीं हारी थी. लेकिन 1993 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के पहले मैच में ही उसकी हार हुई और दूसरे में केवल 1 रन के अंतर से जीत मिली थी. इसने ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एलेन बॉर्डर को ये सोच दी कि कैरिबियाई टीम पर जीत भी हासिल की जा सकती है और कंगारू टीम ऐसा करने में कामयाब भी हो गई.

वेस्ट इंडीज़ की टीम को 1995 में क़रीब 15 साल बाद टेस्ट सिरीज़ में हार का सामना करना पड़ा और इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के रूप में क्रिकेट के एक नए बादशाह का जन्म हुआ.

अब ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के दौरे पर आ रही है और टेस्ट क्रिकेट में इस वक़्त कंगारू टीम नंबर-1 है, जबकि भारतीय टीम नंबर-2 पर है.

अगर ऑस्ट्रेलियाई टीम पर भारतीय टीम ऊपर बताए अंतर से जीत हासिल करती है तो वो टेस्ट में नंबर-1 टीम बन जाएगी और साथ ही ऐसा पहली बार होगा जब क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में रैंकिंग का बादशाह भारत होगा.

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