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श्रीलंका के ख़िलाफ़ 'विराट' जीत के भारतीय क्रिकेट के लिए मायने क्या हैं
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
अंग्रेजी ड्रामा और साहित्य में एक दौर आया था जिसमें 'थियेटर ऑफ़ द ऐब्सर्ड' काफ़ी लोकप्रिय हुआ था. ऐब्सर्ड जिसे हम हिंदी में बेतुका या निरर्थक कह सकते हैं.
ऐसा थियेटर 1940-60 के दशक में ख़ूब चला. इसकी ख़ासियत होती थी कि उन्हें देखकर दर्शक हैरान होते थे कि ऐसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा - चाहे वो कोई चरित्र हो, भाषा, ड्रामा या प्लॉट हो. ऐसा ड्रामा देखकर दर्शकों को झटका लगता था.
ऐसा ही कुछ हुआ रविवार को तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफ़ील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में.
जहां एक ओर एक ऐसे बल्लेबाज़ ने, जिसे पिछले साल तक फुंका हुआ कारतूस कहा जा रहा था, एक ही पारी में रिकॉर्ड्स की बारिश कर दी. वहीं दूसरी तरफ़ विपक्षी टीम में सात बल्लेबाज़ 10 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए. दोनों टीमों के बीच इतना अंतर था कि लग रहा था कि अंतरराष्ट्रीय टीम के सामने अंडर-15 की टीम खेल रही हो.
ऐब्सर्ड मैच सिचुएशन का एक उदाहरण पहली पारी में भी देखने को मिला जब बाउंड्री की ओर जाती गेंद को रोकने के फ़िराक़ में दो फ़ील्डर सिर से टकरा गए, गेंद क्या रुकती, मैच को ही कुछ देर रोकना पड़ा ताकी चोटिल खिलाड़ी उबर सकें.
लेकिन इस तरह के एकतरफ़ा मैच से कई रोचक क़िस्से भी उभरते हैं जो मैच को यादगार बना देते हैं. एक नज़र डालते हैं मैच के ऐसे ही कुछ यादगार पहलुओं पर.
सबसे बड़ी जीत
भारत और श्रीलंका के बीच खेली गए सिरीज़ के तीसरे और अंतिम मैच में भारत ने पहले बैटिंग की और 390 रनों का बड़ा स्कोर बना डाला. 16वें ओवर में जब भारतीय कप्तान रोहित शर्मा 42 रन बनाकर आउट हुए तब श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली कि चलो ख़तरा टल गया. रोहित जिस तरह से बैटिंग कर रहे थे, लग रहा था कि वो विशाल सेंचुरी या फिर डबल सेंचुरी बना डालेंगे.
लेकिन तीसरे नंबर पर आए विराट कोहली ने दो शतकीय साझेदारी निभाई - पहले शुभमन गिल के साथ और फिर तीसरे विकेट के लिए श्रेयस अय्यर के साथ.
गिल जहां अपने छोटे से वनडे करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए 97 गेंदों पर 116 रन बनाकर आउट हुए, वहीं अय्यर ने 38 रनों का योगदान दिया. लेकिन ये सभी पारियां विराट कोहली की बल्लेबाज़ी के जादू के आगे फीकी पड़ गईं. कोहली ने 110 गेंदों में नाबाद 166 रन बनाए. लगभग 150 के स्ट्राइक रेट से खेली गई इस पारी में उन्होंने आठ छक्के और 13 चौके जड़े.
भारत के 390 के विशाल स्कोर के जवाब में दर्शकों को श्रीलंका से कड़ी चुनौती की उम्मीद थी. लेकिन श्रीलंका की ये टीम जयसूर्या, संगकारा या डिसिल्वा की टीम नहीं थी जो बड़े से बड़े स्कोर का भी पीछा कर लेती थी. श्रीलंका की बैटिंग ऐसी ही थी मानो दीवाली की रात पानी में भीगे हुए किसी पटाखे को जलाने की कोशिश की जाए.
श्रीलंका की पूरी टीम 22 ओवर ही बैटिंग कर पाई और केवल 73 रन बनाकर ऑल आउट हो गई. भारत को 317 रनों से जीत मिली जो वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़े रनों के अंतर से जीत है. इससे पहले ये रिकॉर्ड न्यूज़ीलैंड के नाम था जिन्होंने आयरलैंड को 2008 में 290 रनों से हराया था.
इस जीत के साथ ही भारत ने श्रीलंका को 96 बार हरा दिया है जो भारत का किसी एक टीम के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा जीत का रिकॉर्ड है.
विराट शतक
भारत की इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे पूर्व कप्तान विराट कोहली. उन्होंने इस सिरीज़ का दूसरा और पिछले चार एकदिवसीय मैचों में अपना तीसरा शतक लगाया. 46 शतकों के साथ अब वो सचिव तेंदुलकर के 49 शतकों के रिकॉर्ड के बेहद क़रीब पहुंच गए हैं.
2019 के बाद विराट कोहली शतक लगाने से लगातार चूक रहे थे. पिछले साल उन्होंने इस सूखे को तोड़ा था, लेकिन अब चार मैचों में तीन शतक लगाकर उन्होंने शतकों की बाढ़ ला दी है. वनडे में सबसे ज़्यादा शतक लगाने की लिस्ट में सचिन तेंदुलकर के बाद वो दूसरे नंबर पर हैं.
वहीं वनडे में सर्वाधिक रन बनाने की लिस्ट में वो सचिन, संगकारा, पोंटिंग और जयसूर्या के बाद पांचवें नंबर पर आते हैं. लेकिन औसत के मामले में वो इन सबसे बेहतर हैं और 258 मैचों में 58 के औसत से उन्होंने अब तक 12754 रन बनाए हैं.
इस पारी में उन्होंने सचिन के एक और रिकॉर्ड को तोड़ा - किसी एक टीम के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड. उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ 10 शतक लगा लिए हैं और सचिन के ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध नौ शतकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है.
मौके का पूरा फ़ायदा उठा रहे हैं गिल
वहीं युवा ओपनर शुभमन गिल ने मौके का पूरा फ़ायदा उठाते हुए अपने करियर की दूसरी सेंचुरी लगाई. उन्होंने 97 गेंदों में 116 रनों की अपनी पारी में 14 चौके और 2 छक्के लगाए.
गिल के लिए ये आंकड़े इसलिए अहम हो जाते हैं क्योंकि वो वनडे में अपनी जगह पक्की करना चाहते हैं. ओपनर के तौर पर उनकी युवा ईशान किशन और अनुभवी केएल राहुल के साथ सीधी टक्कर है. जहां बांग्लादेश में किशन ने ताबड़तोड़ बैटिंग से सबका दिल जीता, वहीं श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक अर्धशतक और एक शतक लगाकर शुभमन गिल ने भी अपनी दावेदारी मज़बूत कर दी है.
भारतीय क्रिकेट के लिए ये अच्छी बात है कि युवा खिलाड़ी सबसे बड़े स्तर पर शतक लगा रहे हैं. फ़िलहाल किशन और गिल की रेस अभी जारी है और आने वाले मुक़ाबले जिसमें भारत ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के साथ खेलेगा, इन दोनों प्लेयर्स के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
सिराज की धारदार बोलिंग
जहां भारतीय बल्लेबाज़ों ने श्रीलंकाई बोलर्स की जमकर धुनाई की, वहीं गेंदबाज़ों ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी. पिछले मैच में तीन विकेट ले चुके मोहम्मद सिराज एक बार फिर चमके और उन्होंने 10 ओवरों में 32 रन देकर चार विकेट लिए.
सिराज की धारदार बोलिंग के आगे श्रीलंका की टॉप ऑर्डर झुक गई. सिराज ने पहले तीनों बल्लेबाज़ों को सस्ते में आउट करते हुए श्रीलंका के रनचेज़ को खोखला कर दिया. जसप्रीत बुमराह की ग़ैर मौजूदगी में मोहम्मद सिराज ने भारतीय पेस अटैक की कमान अपने हाथों में संभाली है और इस रोल में वो ख़ूब जंच भी रहे हैं.
सिराज के अलावा मोहम्मद शमी और कुलदीप यादव ने भारत के लिए 2-2 विकेट लिए.
शारजाह की हार का बदला लिया
इस जीत के साथ भारत ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ अपनी सबसे बड़ी हार का हिसाब भी बराबर कर दिया. साल 2000 में शारजाह में श्रीलंका के 299 के स्कोर के जवाब में भारतीय टीम 54 रन बनाकर 27वें ओवर में ऑल आउट हो गई थी. उस मैच में श्रीलंका के हीरो थे जयसूर्या और मुरलीधरन.
ऐसी जोड़ी श्रीलंका के पास अब कहां, लेकिन अगर दासुन शनाका की टीम 90 और 2000 के दशकों की श्रीलंकाई टीम का आत्मविश्वास और एक-दूसरे का साथ देने की टीम स्पिरिट ला सकती है तो ये टीम भी आगे चलकर कमाल कर सकती है और उनका अस्तित्व सिर्फ़ बेतुकी और एकतरफ़ा मैच का हिस्सा बनने के लिए ही नहीं रह जाएगा.
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