सूर्यकुमार यादव का जलवा कायम, श्रीलंका के साथ टी-20 सीरीज़ में भारत को कितने नए सितारे मिले

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
राजकोट में आमतौर पर सूर्य की चमक शाम पांच बजे तक ही रहती है. पर शनिवार रात साढ़े आठ बजे तक चमक दिखी. यह चमक दिखाने वाले थे सूर्यकुमार यादव. उन्होंने अपने नाबाद शतक से भारत को तीसरा टी-20 मैच जिताने के साथ-साथ भारत को 2-1 से सिरीज़ पर कब्ज़ा भी करा दिया.
सूर्यकुमार यादव के बल्लेबाज़ी करते समय पूरे समय दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में खुशी में इतना हो हल्ला मचा हुआ था कि कुछ भी सुनाई देना आसान नहीं था. सही मायनों में सूर्यकुमार ने पैसा वसूल बल्लेबाज़ी की. कमेंटेटर हर्षा भोगले ने तो यहां तक कह दिया कि जिस तरह की वह बल्लेबाज़ी करते हैं, वैसी बल्लेबाज़ी की बहुत से बल्लेबाज़ तो कल्पना तक नहीं कर सकते हैं.
उन्होंने नाबाद 112 रनों की पारी में सात चौकों और नौ छक्के लगाकर दर्शकों को ही नहीं टेलीविजन सेट से चिपके बैठे क्रिकेट प्रेमियों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने लेपशॉट से तीन छक्के लगाए. हर छक्का इतना दर्शनीय था कि हर कोई वाह-वाह कर उठा.
सूर्यकुमार ने लूटी खूब वाह-वाही

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सूर्यकुमार यादव द्वारा खेले गए लेपशॉटों के बारे में कमेंटरी कर रहे इरफ़ान पठान ने कहा, ".....इस तरह के शॉट खेलने के लिए ज़ेहनी तौर पर अलग तरह का होना होता है. उनमें स्वैग है, जिगरा है और साथ ही गज़ब की काबिलियत. उनके सामने गेंदबाज़ जोफ्रा ऑर्चर हों या मधुशंका, वह इस शॉट को खेलने में कभी झिझकते नहीं हैं. इस तरह के शॉट खेलने में बहुत महारत होने की ज़रूरत होती है, क्योंकि गेंद आपके हेलमेट पर भी लग सकती है."
एक अन्य कमेंटेटर संजय बांगड़ ने सूर्यकुमार के बारे में कहा, "सूर्य नमस्कार में 12 स्टेप होते हैं. उसी तरह उनमें मैदान में हर तरफ शॉट खेलने की क्षमता है. वह अपने इस अंदाज़ वाले खेल से गौरवान्वित कराते हैं. इस कारण ही हम सभी उन्हें 360 डिग्री वाला खिलाड़ी कहते हैं."
सूर्यकुमार ने कहा, "आप तैयारी के समय अपने ऊपर जितना दबाव डालेंगे, उतना ही अच्छा आप खेल सकते हैं. मेरे इस खेल में कड़ी मेहनत शामिल है. यह मेहनत उन्होंने अब तक खेले 44 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रदर्शन में साफ दिखती है. उन्होंने इन मैचों में 43 से ऊपर के औसत और 177 से ऊपर के स्ट्राइक रेट से 1466 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक शामिल हैं."
सूर्यकुमार यादव के इस तरह के प्रदर्शन के बाद कमेंटेटर संजय बांगड़ कहते हैं कि वह जिस तरह के खिलाड़ी हैं, उन्हें टेस्ट मैचों में भी आज़माया जा सकता है. यह तो आने वाला समय बताएगा कि भारतीय चयनकर्ता उनके बारे में क्या सोचते हैं. पर इतना ज़रूर है कि वह इस साल घर में होने वाले वनडे विश्व कप में भारतीय टीम में अहम भूमिका ज़रूर निभा सकते हैं.

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पारी को गति देने वाले राहुल त्रिपाठी
राहुल त्रिपाठी की काबिलियत से क्रिकेट प्रेमी काफी पहले से वाकिफ़ हैं. इसकी वजह उनका पिछले कुछ सालों में आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करना है. वह ऐसे समय में खेलने आए थे, जब ओपनर ईशान पहले ही ओवर में लौट गए थे और अगला ओवर रजिथा ने मेडन फेंककर टीम को दबाव में ला दिया था. इस स्थिति में राहुल त्रिपाठी ने आक्रामक बल्लेबाज़ी करके टीम पर से दबाव हटा दिया.
राहुल त्रिपाठी ने तीक्षणा के एक ही ओवर में तीन चौके मारकर टीम पर से दबाव ही नहीं हटाया बल्कि यह भी दिखाया कि वह किस अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करना जानते हैं. वह पहले मैच में कुछ खास नहीं कर पाए थे. इसलिए लग रहा था कि उन पर दबाव रह सकता है. लेकिन उनका यह बेखौफ़ अंदाज़ टीम के लिए बहुत कारगर साबित हो सकता है.
यह सही है कि वह अपना पहला अर्धशतक नहीं बना सके. पर उनके 16 गेंदों में पांच चौकों और दो छक्कों से बनाए 35 रन टीम के लिए बहुत बहुमूल्य रन रहे. भारतीय टीम प्रबंधन जिस तरह के युवा बल्लेबाज़ इस प्रारूप में चाहता है, राहुल त्रिपाठी उस पर पूरे तरह से खरे उतरते हैं.

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दमदार ऑलराउंडर अक्षर पटेल
अक्षर पटेल के रूप में भारत को एक दमदार ऑलराउंडर मिल गया है. उन्हें ऑलराउंड प्रदर्शन करने के लिए प्लेयर ऑफ द सिरीज़ चुना गया. हम सभी जानते हैं कि रविंद्र जडेजा के चोटिल होने के कारण नहीं खेलने पर अक्षर को खिलाया गया है. पर उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि वह टीम के लिए बेजोड़ हैं.
अब सवाल यह उठता है कि जडेजा की वापसी पर क्या अक्षर टीम में बने रहेंगे.
इतना ज़रूर है कि टीम प्रबंधन को इस बात की खुशी ज़रूर होगी कि उनके पास जडेजा का एक मज़बूत विकल्प तैयार है. अब उनके चोटिल होने या लय में हाने पर टीम प्रबंधन को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं होगी.
पर इतना ज़रूर है कि क्या अक्षर को इतना शानदार प्रदर्शन करने पर भी जडेजा के आने पर बाहर बैठाया जाएगा या नहीं.

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अर्शदीप का रंगत में लौटना
पिछले कुछ समय में अर्शदीप भारतीय पेस अटैक के ट्रंप कार्ड साबित हुए हैं. उन्होंने चोट की वजह से नहीं खेले जसप्रीत बुमराह तक की कमी नहीं खलने दी थी. लेकिन श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टी-20 मैच में लंबे समय बाद लौटने पर उनके पहले ही ओवर में तीन नो बॉल फेंकना ही सबसे ज़्यादा चर्चित रहा था.
पर वह दबाव से अपने को इस मैच में निकालने में सफल रहे. शुरुआत में नो बॉल से बचने के दबाव में गेंद को सही लाइन पर भले ही नहीं रख पाए. पर वह जल्द ही अपनी रंगत को पाने में सफल रहे. उन्होंने 2.4 ओवर में 20 रन देकर तीन विकेट निकाले और वह सफलतम साबित हुए.
युवा पेस गेंदबाज उमरान मलिक ने दिखाया कि उनकी रफ्तार प्रभावी साबित हो रही है. उन्होंने 150 किलोमीटर की रफ्तार से जिस तरह महेश तीक्षणा को बोल्ड मारा, वह यह दिखाता है कि उन्हें यदि ढंग से तैयार किया जाए तो वह खौफ़ फैला सकते हैं.
उमरान हर मैच में गति के कारण विकेट तो निकाल रहे हैं पर बल्लेबाज़ उनकी गति का बड़े शॉट लगाने में भी इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके लिए उनका स्लोअर गेंद पर काम करना भी बेहद ज़रूरी है. वह यदि ऐसा कर पाए तो बहुत क्षमतावान गेंदबाज़ बन सकते हैं.
भारत ने टी-20 क्रिकेट में श्रीलंका पर अपनी श्रेष्ठता को बनाए रखा. उनके साथ घर में खेली गई पिछली छह टी-20 सीरीजों में से पांचवीं सिरीज़ भारत ने जीती है. हम सभी जानते हैं कि भारत इस सिरीज़ में युवा खिलाड़ियों के साथ खेल रहा था. पिछले टी-20 विश्व कप में खेली भारतीय टीम के चार-पांच खिलाड़ी ही इस टीम में हैं. इस लिहाज़ से देखें तो सीरीज़ जीतना मायने रखता है.

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यंग ब्रिगेड का दिखा जलवा
इस साल वनडे विश्व कप है तो सारा फ़ोकस वनडे टीम पर ही रहने वाला है. इस कारण ही राहुल द्रविड़ 2024 में होने वाले टी-20 विश्व कप को ध्यान में रखकर युवाओं को मौका दे रहे हैं.
इस परीक्षा में पेस गेंदबाज़ शिवम मावी, अक्षर पटेल, दीपक हुडा और ईशान किशन छाप छोड़ने में तो सफल हुए हैं. पर अभी इन सभी को और बड़ी परीक्षा में उतारने की ज़रूरत है, तब ही पता चलेगा कि वह कितने उपयोगी हैं.
भारत ने इस सिरीज़ में शुभमन गिल को ओपनर के तौर पर आज़माया. वह आखिरी मैच में किसी हद तक विश्वास पाने में सफल हुए हैं. उन्होंने 44 रनों की पारी ज़रूर खेली पर वह काफ़ी समय तक पारी को गति देने में कामयाब नहीं हो सके. वह जिस तरह के स्ट्रोक प्लेयर हैं, उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. बहुत संभव है पहले दो मैचों में अच्छा नहीं खेल पाने का दबाव रहा हो. इसलिए उन्हें अभी एक-दो सीरीज़ और आज़माने की ज़रूरत है.
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