अंडर-19 विश्व कप फ़ाइनल: इन खिलाड़ियों पर टीम इंडिया का दारोमदार

    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

वेस्टइंडीज़ में खेले जा रहे आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप का फ़ाइनल चार बार के चैंपियन और पिछली बार के उपविजेता भारत और इंग्लैंड के बीच आज खेला जाएगा.

यश ढुल की कप्तानी में खेल रही भारतीय टीम ने सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया को बेहद आसानी से 96 रन से हराया और शान से फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की.

दूसरी तरफ़ इंग्लैंड ने दूसरे सेमीफ़ाइनल में अफ़ग़ानिस्तान को एक रोमांचक मुक़ाबले में 15 रन से हराया और 24 साल बाद फ़ाइनल में खेलने का हक़ हासिल किया.

इससे पहले इंग्लैंड साल 1998 में पहली बार विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँचा था और वहाँ उसने न्यूज़ीलैंड को सात विकेट से हराकर अपना अभी तक का इकलौता ख़िताब जीतने में कामयाब रहा था.

अंडर-19 विश्व कप में भारत के दबदबे का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि वह आठवीं बार फ़ाइनल में पहुँचा है. चार बार उसने ख़िताबी जीत हासिल की है और तीन बार उपविजेता रहा है.

भारत ने इस टूर्नामेंट को साल 2000 में मोहम्मद कैफ़ की कप्तानी में पहली बार जीता. उसके बाद साल 2008 में विराट कोहली, 2012 में उन्मुक्त चंद और 2018 में पृथ्वी शॉ की कप्तानी में इसे अपने नाम किया.

पाँचवीं बार चैंपियन बनने के लिए इन पर निगाहें

लगातार चौथी बार फ़ाइनल में पहुँची भारतीय टीम ने अभी तक इस विश्व कप में बहुत ही दमदार और शानदार प्रदर्शन किया है.

ख़ासकर यह देखते हुए कि उसने दक्षिण अफ़्रीका को पहले ही मैच में 45 रन से हराकर अपने अभियान का आग़ाज़ किया लेकिन उसके बाद उसके कप्तान यश ढुल, शेख़ रशीद, आराध्य यादव, मानव पारख और सिद्धार्थ यादव कोरोना की चपेट में आ गए.

भारत अगले मुक़ाबले में युगांडा के ख़िलाफ़ छह रिज़र्व खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतरा. भारत ने युगांडा को तो हराया ही उसके बाद आयरलैंड और क्वार्टर फ़ाइनल में बांग्लादेश को मात दी. पिछली बार फ़ाइनल में भारत बांग्लादेश से ही हारा था.

वैसे तो भारतीय टीम ने एकजुट होकर फ़ाइनल में अपनी जगह बनाई है और बल्लेबाज़ी में कप्तान यश ढुल, उपकप्तान शेख़ रशीद, अंगकृष रघुवंशी जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी उसके पास है.

गेंदबाज़ी में रवि कुमार, विकी ओस्तवाल, राज्यवर्धन हंगरगेकर, निशांत सिंधु और कौशल तांबे के अलावा राज बावा जैसे तेज़ और स्पिनर भी टीम में हैं जिनके दम पर इंग्लैंड से पार पाया जा सकता है.

आख़िरकार क्यों है इन पर दारोमदार और क्या है इनमें ख़ास?

1. कप्तान यश ढुल- भारतीय टीम की कमान सँभाल रहे यश ढुल ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मैच में रन आउट होने से पहले 110 गेंदों पर 110 रनों की पारी खेली. वह नंबर चार पर खेलते हैं और टीम की ज़रूरत के अनुसार तेज़ और धीमा खेल सकते हैं.

वह टूर्नामेंट के इतिहास में शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय कप्तान है. उनसे पहले साल 2008 में विराट कोहली और साल 2012 में उन्मुक्त चंद ने यह कारनामा किया था.

यश ढुल ने सेमीफ़ाइनल में तब टीम को संभाला जब उसके शुरुआती दो विकेट केवल 37 रन पर गिर चुके थे. उन्होंने तीसरे विकेट के लिए शेख़ रशीद के साथ मिलकर 204 रन जोड़े और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ी की कमर ही तोड़ दी. उनके शतक के दम पर भारत ने पाँच विकेट पर 290 रन बनाए जो जीत की वजह बने.

यश ढुल ने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ भी 82 रनों की शानदार पारी खेली थी लेकिन उसके बाद वह कोविड-19 का शिकार हो गए और फ़िर बांग्लादेश के ख़िलाफ क्वार्टर फ़ाइनल में खेले और नाबाद 20 रन बनाए.

2. उपकप्तान शेख़ रशीद- किसी भी खिलाड़ी की असली परीक्षा बड़े मुक़ाबले में बड़ी टीम के ख़िलाफ़ होती है जिसमें शेख़ रशीद पूरी तरह कामयाब रहे.

युगांडा, आयरलैंड जैसी टीमों को शुरुआत में हराने के बाद भारत का असली टक्कर तो सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ही था जहां उन्होंने बेहद समझदारी से बल्लेबाज़ी करते हुए 108 गेंदों पर 94 रन बनाए.

वह शतक से भले ही चूक गए लेकिन उन्होंने कप्तान यश धुल के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए जो 204 रन जोड़े और टीम को 290 रन तक पहुँचाया दरअसल वह स्कोर ऑस्ट्रेलिया पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में कामयाब रहा और भारत आसानी से 96 रन से जीत गया.

अगर फ़ाइनल में भारत सेमीफ़ाइनल जैसा ही बड़ा स्कोर बनाना चाहता है तो उसमें शेख़ रशीद की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहेगी.

इससे पहले उन्होंने इसी विश्व कप में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 31 रन बनाए. इसके बाद वह कोविड-19 का शिकार होने वालों की लिस्ट में शामिल थे. कोविड-19 से उबरकर वह क्वार्टर फ़ाइनल में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ उतरे और उन्होंने 26 रन बनाए.

3. अंगकृष रघुवंशी- सलामी बल्लेबाज़ अंगकृष रघुवंशी भी उन खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने इस विश्व कप में शतक का स्वाद चखा है. उन्होंने युगांडा के ख़िलाफ़ 120 गेंदों पर 22 चौके और चार छक्कों की मदद से 144 रन बनाए और भारत को पाँच विकेट पर 405 रन तक पहुँचाने में अपना अहम योगदान दिया.

उसके बाद उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 44 रन बनाए. शुरुआती मैचों में आयरलैंड के ख़िलाफ़ भी 79 रन बनाए. अगर उन्होंने फ़ाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टीम को अच्छी शुरुआत दी तो फ़िर भारत का काम आसान हो सकता है.

4. राज बावा- क्रिकेट में एक कहावत है कि शतक आख़िर में शतक ही होता है चाहे वह किसी भी टीम के ख़िलाफ़ हो. राज बावा ने इसे सही साबित करते हुए युगांडा के ख़िलाफ़ केवल 108 गेंदों पर 14 चौके और आठ छक्कों की मदद से नाबाद 162 रन बनाकर मैदान में जैसे तूफ़ान उठा दिया.

इससे पहले उन्होंने आयरलैंड के ख़िलाफ़ भी 42 रनों की उपयोगी पारी खेली. वह खब्बू बल्लेबाज़ है लेकिन सीधे हाथ से मध्यम तेज़ गति से गेंदबाज़ी भी करते हैं. उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 47 रन देकर चार विकेट भी झटके.

5. रवि कुमार- खब्बू तेज़ गेंदबाज़ राजेंद्र सिंह रवि कुमार अपने गेंदबाज़ी एक्शन में थोड़ी थोड़ी पूर्व तेज़ गेंदबाज़ आशीष नेहरा जैसी झलक देते है. उन्होंने सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ 37 रन देकर दो और क्वार्टर फ़ाइनल में बांग्लादेश के ख़िलाफ 14 रन देकर तीन विकेट लिए और कप्तान और टीम के भरोसे पर खरा उतरे.

क्वार्टर फ़ाइनल में भारत उस बांग्लादेश के ख़िलाफ उतरा था जिसने उसे पिछले विश्व कप के फ़ाइनल में हराया था. उस हार की टीस पर रवि कुमार ने तब मरहम लगाया जब उन्होंने तूफ़ानी गेंदबाज़ी करते हुए बांग्लादेश के शुरूआती तीन विकेट केवल 14 रन तक उखाड़ फैंके. इन झटकों के बाद बांग्लादेश केवल 111 रन पर सिमट गई और भारत पाँच विकेट से जीतने में कामयाब रहा.

6. विकी ओत्सवाल- खब्बू लेग स्पिनर विकी ओत्सवाल ने सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ 42 रन देकर तीन विकेट हासिल किए और बल्लेबाज़ों की मेहनत पर पानी नहीं फिरने दिया जिनकी बदौलत भारत ने पाँच विकेट खोकर 290 रन बनाए थे.

इसके अलावा उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ खेले गए पहले ही मैच में केवल 28 रन देकर पाँच विकेट अपने नाम किए. बांग्लादेश के ख़िलाफ क्वार्टर फ़ाइनल में भी उन्होंने दो विकेट हासिल किए. वह काफ़ी तेज़ी से गेंद को स्पिन कराते हैं और बहुत कम फ़्लाइट देते हैं.

7. निशांत सिंधु- निशांत सिंधु भी विकी ओत्सवाल की तरह खब्बू लैग स्पिनर हैं और उन्होंने सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ 25 रन देकर दो विकेट लिए थे. शुरुआती चरण में युगांडा के ख़िलाफ़ केवल 19 रन देकर चार विकेट भी झटके थे.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में निशांत सिंधु और विकी ओत्सवाल की स्पिन जोड़ी पर भारत का दारोमदार रहेगा. इनका साथ देने के लिए तीसरे स्पिनर कौशल ताँबे होंगे. कौशल ताँबे ने अभी तक केवल चार विकेट लिए है लेकिन वह किफ़ायती गेंदबाज़ी करने में माहिर है.

अब देखना है कि इन खिलाड़ियों के दम पर भारत फ़ाइनल में इंग्लैंड के विरूद्ध कैसा प्रदर्शन करता है. इंग्लैंड दूसरी और भारत पाँचवीं बार चैंपियन बनने उतरेगा. वैसे भारतीय टीम के कोच ऋषिकेश कानितकर के अलावा भारत के पूर्व बल्लेबाज़ और एनसीए यानी नेशनल क्रिकेट एकेडमी के डायरेक्टर वीवीएस लक्ष्मण भी ड्रेसिंग रूम में मौजूद होंगे.

ऋषिकेश कानितकर ने एक ही मूल मंत्र टीम को दिया है कि आगे का बहुत कुछ ना सोचकर वर्तमान पर ध्यान दो. अगर भारतीय टीम चैंपियन बनी तो यह उनके और पूरे भारत के लिए वैरी वैरी स्पेशल तोहफ़ा होगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)