India vs South Africa : टीम इंडिया दूसरे वनडे में भी जिन ख़ामियों से पार नहीं पा सकी

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय टीम का दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ के बाद वनडे सीरीज़ खोना भी अब पक्का हो गया है.

दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय टीम को पर्ल में खेले गए दूसरे वनडे में सात विकेट से हराया. इस जीत से दक्षिण अफ्रीका ने तीन मैचों की सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है.

मैच में भारत की हार के दौरान टीम की कई ख़ामियां नज़र आईं.

इन ख़ामियों में ख़ासतौर से स्तरीय गेंदबाज़ी नहीं कर पाना, मिले मौकों का फ़ायदा नहीं उठा पाना, दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों का शानदार प्रदर्शन और केएल राहुल का कप्तानी में खिलाड़ियों को प्रभावित नहीं कर पाना है.

भारतीय टीम मिले मौकों को भुनाने में असफल रही

ड्रिंक्स इंटरवल के बाद पहले जसप्रीत बुमराह ने यानामन और चहल ने तेम्बा बवुमा के विकेट निकालकर मैच पर पकड़ बनाने की स्थिति बनाई. लेकिन भारतीय गेंदबाज़ एडन मारक्रम और रासी वान डर दुसें पर दवाब बनाने में सफल नहीं हो सके.

इसकी वजह ये रही कि बुमराह के अलावा सिर्फ़ यजुवेंद्र चहल ने ही पैनापन लिए गेंदबाज़ी की. टीम में बाकी गेंदबाज़ इस भूमिका को निभाने में असफल रहे.

जहां तक वनडे प्रारूप की बात है तो भारत को पेस गेंदबाज़ी में बदलाव करने की ज़रूरत है. हम मौजूदा गेंदबाज़ी अटैक पर निगाह डालें तो हमारे ज़्यादातर गेंदबाज़ रन रोकने वाले लगते हैं. इनमें विकेट लेने वाले गेंदबाज़ कम हैं.

भुवनेश्वर कुमार पहले इस ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाते थे. लेकिन यहां गेंद के स्विंग नहीं होने से और गेंदों में ज़्यादा गति नहीं होने से वह बहुत सक्षम नज़र नहीं आए. यही स्थिति बुमराह को छोड़कर बाकी गेंदबाज़ों की रही.

टीम इंडिया के स्ट्राइक गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह पर टीम बहुत निर्भर रहती है. टीम को सफलता मिलने की संभावनाएं ज़्यादा तब ही बनती हैं, जब दोनों तरफ से दबाव बनाया जाए. पर इस मैच में बुमराह के बनाए दबाव को सामने वाले छोर के गेंदबाज़ ख़त्म करते रहे.

असल में, भारत के बाकी तीनों पेस गेंदबाज़ शार्दुल ठाकुर, भुवनेश्वर और वेंकटेश अय्यर 130 किलोमीटर से कम रफ़्तार पर गेंदबाज़ी कर रहे थे. इसलिए 135 से 140 किलोमीटर की रफ़्तार वाले गेंदबाज़ खिलाने की ज़रूरत है.

टीम में अच्छी रफ्तार निकालने वाले गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा शामिल हैं. ज़रूरत सिर्फ उनके ऊपर भरोसा जताने की है.

केएल राहुल नहीं कर सके कप्तानी से प्रभावित

केएल राहुल लगातार दूसरे वनडे में अपने फ़ैसलों से टीम को प्रभावित नहीं कर पाते दिखे.

दक्षिण अफ्रीकी कप्तान बावुमा ने जिस खूबसूरती से गेंदबाज़ी में बदलाव करके भारतीय बल्लेबाज़ों पर दवाब बनाए रखा, वो स्पष्ट दिख रहा था. लेकिन केएल राहुल गेंदबाज़ी में चतुराई भरे फ़ैसले लेते नहीं दिखे.

शार्दुल ठाकुर के डिकॉक का विकेट निकालने के बाद अगले ओवर में उन्होंने करियर का दूसरा वनडे खेल रहे वेंकटेश अय्यर को गेंद थमा दी. यह समय था, जब वो अपने विकेट लेनेवाले गेंदबाज़ बुमराह को ला सकते थे, जिससे अफ्रीकी टीम पर दवाब बढ़ाया जा सकता था.

हम सभी जानते हैं कि वेंकटेश अय्यर को पहले वनडे में ऑलराउंडर के तौर पर खिलाने के बावजूद उनसे एक ओवर की गेंदबाज़ी नहीं करवाई गई थी. उस समय कहा गया था कि किसी विशेषज्ञ बल्लेबाज़ को खिलाना इससे बेहतर था.

इसके अलावा वह विकेट लेने के लिए गेंदबाज़ी के हिसाब से फील्डिंग सजाते भी नज़र नहीं आए. उन्होंने विकेट लेने वाले गेंदबाज़ यजुवेंद्र चहल से बिना स्लिप के गेंदबाज़ी कराई.

हार्दिक और जडेजा की कमी खली

भारतीय टीम को इस सीरीज़ के दौरान हार्दिक पांड्या और रविंद्र जडेजा की कमी खली है. इनके विकल्प के तौर पर खिलाए गए वेंकटेश अय्यर और अश्विन दोनों ही उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके हैं.

असल में हार्दिक और जडेजा दोनों ही आक्रामक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करने के साथ विकेट लेनेवाली गेंदबाज़ी भी करते हैं. इसके अलावा दोनों ही बेहतरीन फ़ील्डर भी हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं कि यजुवेंद्र चहल ने पूरी ताकत से गेंदबाज़ी की. वह इस मैच के दौरान पुरानी रंगत में गेंदबाज़ी करते भी नज़र आए. यह भी सही है कि अश्विन को सफलता नहीं मिलने की एक बड़ी वजह रक्षात्मक फील्डिंग सजाना भी रहा. वैसे भी वह लंबे समय बाद इस सीरीज़ में इस प्रारूप में खेल रहे हैं. पर कुल मिलाकर वह प्रभावित करने में सफल नहीं रहे हैं.

क्विंटन डिकॉक को जीवनदान देना भारी पड़ा

क्विंटन डिकॉक ने दक्षिण अफ्रीका की पारी की आक्रमक अंदाज़ में शुरुआत की. पर उनकी शुरुआती पारी में ऋषभ पंत का उन्हें स्टंपिंग करने के मौक़े को गंवाना भारत के लिए बहुत भारी पड़ा.

रविचंद्रन अश्विन की एक गेंद को वह बाहर निकलकर मारने गए, पर अंदर की तरफ आती गेंद पर उनका बल्ला एकदम से चकमा खा गया. पर गेंद को पंत पकड़ ही नहीं सके और क्रीज़ से तीन-चार कदम बाहर निकल चुके डिकॉक स्टंप होने से बच गए. डिकॉक इस मौक़े पर 32 रन पर खेल रहे थे और टीम का स्कोर 41 रन पर था.

क्विंटन डिकॉक ने इस जीवनदान का भरपूर फ़ायदा उठाया और युवा बल्लेबाज़ यानामन मलान के साथ शतकीय साझेदारी (132 रन) बनाकर टीम को लक्ष्य की तरफ बढ़ाने में मदद की. डिकॉक ने सात चौकों और तीन छक्कों से 78 रन बनाए.

इसके बाद तेम्बा बवुमा और यानामन मलान ने 90 रनों की साझेदारी बनाकर मैच पर दक्षिण अफ्रीका की पकड़ और मज़बूती दी. बाद में रासी वान डेर दुसें और एडन मारक्रम ने बिना किसी परेशानी के टीम को जीत तक पहुंचा दिया.

ऋषभ पंत ने वनडे प्रारूप में दावा पक्का किया

ऋषभ पंत पिछले काफी समय से भारतीय वनडे प्रारूप की योजना का हिस्सा नहीं रहे हैं. इसकी वजह केएल राहुल का मध्यक्रम में खेलने के साथ विकेटकीपिंग भी करना है. इस कारण पंत के सामने इस सीरीज़ के माध्यम से टीम में अपनी जगह पक्की करने की भी चुनौती है.

शिखर धवन और विराट कोहली के विकेट एक साथ निकल जाने पर उनके सामने अपनी क्षमता साबित करने का बेहतरीन मौक़ा था. वह इस स्थिति को भुनाने में किसी हद तक सफल रहे.

पंत ने आते ही गेंदबाज़ों के बनाए दवाब से टीम को निकाला और फिर तेज़ी से रन बनाकर टीम को मज़बूती की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया. उन्होंने पहले वनडे मैच में भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान करने वाले शम्सी पर आक्रामक रुख़ अपनाकर उनका स्वागत किया.

पंत इतने भरोसे के साथ खेल रहे थे कि वह शतक बनाते दिख रहे थे. लेकिन ड्रिंक इंटरवल के बाद केएल राहुल के आउट होने के बाद कप्तान तेम्बा बावुमा द्वारा बिछाए जाल में शम्सी ने उन्हें फंसा लिए.

इस जोड़ी की वापसी के बाद भारत के 300 पार जाने की संभावनाएं लगभग ख़त्म हो गई थीं. एक समय तो लग रहा था कि भारत 260-270 रनों तक पहुंच भी पाएगा या नहीं. लेकिन एक बार फिर शार्दुल ठाकुर ने अपनी बल्ले की चमक बिखेरकर टीम को 288 रन तक पहुंचा दिया. शार्दुल ने नाबाद 40 रन की पारी खेली. उनका अश्विन ने नाबाद 25 रन बनाकर अच्छा साथ निभाया. लेकिन यह स्कोर ख़राब गेंदबाज़ी के कारण जीत दिलाने लायक साबित नहीं हो सका.

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