IPL 2021 फ़ाइनल: क्या चेन्नई के पास है, कोलकाता की मिस्ट्री स्पिन का तोड़?

धोनी और जडेजा

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

आख़िरकार आईपीएल- 2021 का फ़ाइनल मुक़ाबला तय हो ही गया. शुक्रवार को तीन बार की चैम्पियन चेन्नई सुपर किंग्स और दो बार की चैम्पियन कोलकाता नाइटराइडर्स एक और ख़िताब के लिए आमने-सामने होंगे.

चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम यूँ तो कई ख़िताब हैं, लेकिन वो अपनी कप्तानी में जीते गए 2007 के पहले टी-20 विश्व कप और उसके बाद 2011 में जीते गए एकदिवसीय विश्व कप को सबसे अहम मानते हैं. इसके बावजूद यदि वो इस बार आईपीएल में अपनी टीम को चैम्पियन बनाने में कामयाब रहे तो ये उपलब्धि भी उनके लिए बेहद ख़ास होगी.

धोनी मानते हैं कि 2007 में टी-20 विश्व कप जीतने के बाद जब वो भारत आए और खुली बस में यात्रा की तो तो मुंबई में हर तरफ़ जाम लगा था. वह स्वागत शानदार था. और दूसरा ये कि साल 2011 में खेले गए एकदिवसीय विश्व कप में जब भारत जीत के क़रीब था तो दर्शक ''वंदे मातरम'' गा रहे थे.

महेंद्र सिंह धोनी

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धोनी का जलवा अब भी बरक़रार

आज धोनी भले ही संन्यास लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हो गए हैं, लेकिन आईपीएल में उनका जलवा अभी भी बरक़रार है.

दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ प्लेऑफ़ में खेले गए पहले क्वालिफ़ायर में उन्होंने केवल छह गेंदों पर एक छक्के और तीन चौकों की मदद से नाबाद 18 रन बनाकर अपनी टीम को दो गेंद शेष रहते चार विकेट से जीत दिला दी.

हालांकि एक समय उनकी टीम रितुराज गायकवाड़ के 70 और रॉबिन उथप्पा के 63 रन की मदद से जीत के लिए 173 रनों के लक्ष्य की तरफ़ आसानी से बढ़ रही थी. लेकिन शार्दुल ठाकुर, अंबाती रायडू और मोईन अली के आउट होने से उनकी टीम अचानक लड़खड़ा गई.

धोनी ने आख़िरी ओवर में जीत के लिए आवश्यक 13 रन जिस अंदाज़ में बनाए, उसे देखकर दिल्ली के कोच और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग भी हैरान रह गए. बाद में उन्होंने कहा कि जब धोनी खेल को पूरी तरह खेलना छोड़ देंगे, तब भी उन्हें बेहतरीन फ़िनिशर के तौर पर याद रखा जाएगा.

ख़ुद धोनी को इसमें कोई शक़ नहीं कि वो साल 2022 के भी आईपीएल में दिखाई देंगे. लेकिन वो ये नहीं जानते कि तब उनकी जर्सी पीले रंग वाली उनकी फ़्रेंचाइज़ी चेन्नई सुपर किंग्स की ही होगी या नहीं. उन्होंने कहा है कि उन्हें रिटेंशन यानि खिलाड़ियों को बरक़रार रखने की नीति के बारे में पता नहीं है.

ऐसे में अगर वह चेन्नई को चौथी बार ख़िताब दिला गए तो इससे बेहतर क्या होगा. उनकी कप्तानी में चेन्नई साल 2010, 2011 और 2018 में चैम्पियन रह चुकी हैं. चेन्नई साल 2019 में उपविजेता रही, जबकि 2020 में सातवें पायदान पर रही. कोई और फ़्रेंचाइज़ी होती तो शायद वो धोनी को कप्तानी से हटा कर किसी और के हाथ में कमान सौंप देती. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उनका भरोसा रंग लाया.

इयॉन मोर्गन

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दोनों कप्तान बल्लेबाज़ी में असरदार नहीं

वैसे धोनी के बल्ले से इस सीज़न में खेले गए 15 मैचों में केवल 114 रन निकले हैं. लेकिन जिस अंदाज़ में उन्होंने कप्तानी की है उसे देखकर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक ब्रेयरली की याद आती है, जो केवल अपनी चालाकी भरी कप्तानी के दम पर टेस्ट सिरीज़ खेल जाते थे.

कुछ यही हाल कोलकाता के कप्तान इयॉन मोर्गन का भी है. दिल्ली के ख़िलाफ़ खेले दूसरे क्वालिफ़ायर मैच में उनका खाता भी नहीं खुला. मोर्गन ने इस बार 16 मैच खेलकर 129 रन बनाए हैं.

जहां तक दूसरे क्वालिफ़ायर की बात है, तो इस मैच का नतीजा भी पहले क्वालिफ़ायर की तरह अनेक रंग दिखाता रहा. दिल्ली के ही ख़िलाफ़ कोलकाता भी एक समय जीत के लिए 136 रनों की तरफ़ बेहद आसानी से बढ़ रहा था. सलामी जोड़ी शुभमन गिल ने 46 और वेंकटेश अय्यर ने पहले विकेट के लिए 12.2 ओवर में ही 96 रन भी जोड़ लिए थे.

इसके बाद 130 रन तक पहुँचते-पहुँचते उसके सात विकेट ढह गए. इनमें दिनेश कार्तिक, कप्तान इयॉन मोर्गन, शाकिब अल हसन और सुनील नारायण कोई रन नहीं बना सके. वो तो राहुल त्रिपाठी थे जिन्होंने आर अश्विन की शॉर्ट पिच गेंद पर स्ट्रेट बाउंड्री के पार छक्का लगाकर टीम को हैरान करने वाली जीत दिला दी. वरना कोलकाता की लुटिया तो डूब ही चुकी थी.

राहुल त्रिपाठी

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ऋषभ पंत को अभी बहुत कुछ सीखना होगा

अब जो जीता उसे ही सिकंदर कहा जाएगा. दोनों क्वालिफ़ायर में हारने वाली और पिछली बार की उपविजेता रही दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत के निर्णयों में कई कमियाँ निकाली जा सकती हैं. लेकिन दोनों मैचों का अंतिम ओवर तक जाना बताता है कि वो इतने ख़राब कप्तान भी नहीं हैं. बस उनके बल्लेबाज़ थोड़ा और तेज़ खेलते तो शायद परिणाम कुछ और होते.

पहले क्वालिफ़ायर में उन्होंने अक्षर पटेल को चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने भेजा जिन्होंने 11 गेंदों पर 10 रन बनाकर रन रेट को धीमा कर दिया. यही हाल दूसरे क्वालिफ़ायर में मार्कस स्टोइनिस ने तीसरे नंबर पर आकर 23 गेंदों में 18 रन बनाकर किया.

महेंद्र सिंह धोनी राहुल त्रिपाठी

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धोनी लेते हैं दिलचस्प निर्णय

दूसरी तरफ़ पहले क्वालिफ़ायर में चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने दिल्ली के ख़िलाफ़ सुरेश रैना की जगह रॉबिन उथप्पा को टीम में शामिल किया.

एक नाकाम बल्लेबाज़ की जगह दूसरा फ़्लॉप बल्लेबाज़ टीम में आया, लेकिन उथप्पा ने केवल 44 गेंदों पर दो छक्के और सात चौकों की मदद से 63 रन ठोक दिए. उथप्पा को खिलाना धोनी का मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ. इसके अलावा मुश्किल हालात में वो ख़ुद रविंद्र जडेजा से पहले बल्लेबाज़ी करने उतरे और जीत का सेहरा अपने सर बांधने में कामयाब हुए.

उथप्पा ने इन 63 रनों की मदद से अभी तक तीन मैचों में 84 रन बनाए हैं, यानी धोनी जीतने के लिए हर दांव लगाना जानते हैं. धोनी ने पूरे टूर्नामेंट में केवल 14-15 खिलाड़ी खिलाए जबकि कोलकाता ने बीस से अधिक. ये धोनी का अपने खिलाड़ियों पर भरोसे को भी जताता है.

वीडियो कैप्शन, विराट कोहली ने आरसीबी की कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया

दूसरी तरफ़ कोलकाता के कप्तान इयॉन मोर्गन ने दिल्ली के ख़िलाफ़ अपने गेंदबाज़ों ख़ासकर स्पिनरों का बेहतरीन इस्तेमाल किया. मिस्ट्री स्पिनर सुनील नारायण और वरुण चक्रवर्ती के अलावा खब्बू स्पिनर साकिब अल हसन ने शिखर धवन, पृथ्वी शॉ, श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत को जैसे बांध दिया.

फ़ॉफ़ डू प्लेसी और ऋतुराज गायकवाड़

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इमेज कैप्शन, फ़ॉफ़ डू प्लेसी और ऋतुराज गायकवाड़

चेन्नई की ताक़त

चेन्नई के पास रितुराज गायकवाड़ के रूप में बेहद आक्रामक सलामी बल्लेबाज़ हैं, जो अभी तक 15 मैचों में एक शतक और चार अर्धशतक की मदद से 603 रन बना चुके हैं. उनसे अधिक 626 रन पंजाब के केएल राहुल ने बनाए हैं. रितुराज के जोड़ीदार फ़ॉफ़ डू प्लेसी ने भी 15 मैचों में पाँच अर्धशतक की मदद से 547 रन बनाए हैं. अनुभवी अंबाती रायडू ने 15 मैचों में 257 रन बनाकर कई बार पारी को सँभाला है. रविंद्र जडेजा ने भी इतने ही मैचों में 227 रन और 11 विकेट लिए है.

वैसे पहले लीग मैच में चेन्नई ने कोलकाता को 18 रन से हराया था. पहले चरण का यह मुक़ाबला मुंबई में हुआ था जहां चेन्नई ने फ़ॉफ़ डू प्लेसी के नाबाद 95 रन की बदौलत तीन विकेट खोकर 220 रन बनाए. इसके जवाब में कोलकाता 202 रन ही बना सका.

लीग के दूसरे मैच में भी चेन्नई ने कोलकाता को दूसरे चरण में अबुधाबी में दो विकेट से हराया. कोलकाता ने छह विकेट पर 171 रन बनाए जवाब में चेन्नई ने आठ विकेट पर 172 रन बनाए.

कोलकाता नाइट

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कोलकाता का दम

कोलकाता के रहस्यमयी स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने 16 मैचों में 18 विकेट लेकर बल्लेबाज़ों के दबदबे के बीच अपना नाम कमाया है. बल्लेबाज़ी में शुभमन गिल ने दो अर्धशतक की मदद से 16 मैचों में 427 और वेंकटेश अय्यर ने नौ मैच में तीन अर्धशतक के सहारे 320 रन बनाए हैं. सुनील नारायण ने 13 मैचों में 14 विकेट लेकर अपना जलवा बरक़रार रखा है. दिल्ली के ख़िलाफ़ छक्का लगाकर जीत दिलाने वाले राहुल त्रिपाठी ने 16 मैचों में 395 रन बनाए हैं. बाक़ी का काम नीतीश राणा और दिनेश कार्तिक ने पूरा किया है.

इस बार का आईपीएल इस रूप में भी विशेष था कि इसका दूसरा चरण संयुक्त अरब अमीरात में शुरू होते ही बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने एलान कर दिया कि ये कप्तान के रूप में उनका आख़िरी टूर्नामेंट है. उन्होंने टी-20 विश्व कप के बाद इस प्रारूप में भारत की कप्तानी छोड़ने का भी निर्णय लिया है. बैंगलोर प्लेऑफ़ में तो पहुँची, लेकिन वहां कोलकाता ने उसे चार विकेट से हरा दिया.

धोनी

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चैम्पियन के तौर पर चेन्नई का इतिहास

चेन्नई की टीम साल 2010 में फ़ाइनल में मुंबई इंडियंस को 22 रन से हराकर पहली बार चैम्पियन बनी थी. चेन्नई के पाँच विकेट पर 168 रन के जवाब में मुंबई सचिन तेंदुलकर के 48 रनों के बावजूद 9 विकेट खोकर 146 रन ही बना सकी.

इसके बाद अगले साल 2011 में भी चेन्नई की टीम ही चैम्पियन बनी. इस बार उसने फ़ाइनल में बैंगलोर का शिकार किया. चेन्नई ने पाँच विकेट पर 205 रन बनाए. इसके जवाब में बैंगलोर की टीम आठ विकेट खोकर 147 रन ही बना सकी.

तीसरी बार चेन्नई सुपर किंग्स साल 2018 में चैम्पियन बना. इस बार फ़ाइनल में उसने सनराइज़र्स हैदराबाद को 14 रन से हराया. चेन्नई के सात विकेट पर 174 रन बनाने के बाद हैदराबाद की टीम नौ विकेट खोकर 160 रन ही बना सकी.

कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख़ ख़ान

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इमेज कैप्शन, कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख़ ख़ान

कोलकाता भी दो बार चैम्पियन बना

कोलकाता ने पहली बार साल 2012 में चैम्पियन बनते हुए चेन्नई का लगातार तीसरी बार ख़िताब जीतने का सपना तोड़ दिया. गौतम गंभीर की कप्तानी में खेलते हुए कोलकाता ने मनविंदर बिस्ला के 89 रन की मदद से पाँच विकेट खोकर 192 रन बनाए, जबकि चेन्नई ने इससे पहले तीन विकेट खोकर 190 रन बनाए थे.

इसके बाद साल 2014 में गौतम गंभीर की कप्तानी में ही कोलकाता दूसरी बार चैम्पियन बना. तब उसने फ़ाइनल में किंग्स इलेवन पंजाब को तीन विकेट से हराया. पंजाब में चार विकेट खोकर 199 रन बनाए, लेकिन पंजाब ने मनीष पांडेय के 94 रन की मदद से सात विकेट पर 200 रन बनाकर मैच और फ़ाइनल जीत लिया.

वरुण चक्रवर्ती

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इमेज कैप्शन, पूर्व क्रिकेटर अशोक मल्होत्रा के अनुसार, वरुण चक्रवर्ती (दाढ़ी में), शाक़िब अल हसन और सुनील नारायण के कुल 12 ओवर इस मैच में निर्णायक हो सकते हैं

पूर्व क्रिकेटर अशोक मल्होत्रा की क्या है राय

आईपीएल- 2021 का फ़ाइनल दुबई में खेला जाएगा और वहीं मौजूद हैं भारत के पूर्व बल्लेबाज़ और चयनकर्ता रहे अशोक मल्होत्रा.

अशोक मल्होत्रा चेन्नई और कोलकाता के बीच होने वाले ख़िताबी मुक़ाबले को लेकर कहते हैं, ''एक तरफ़ महेंद्र सिंह धोनी हैं तो दूसरी तरफ़ कोलकाता के तीन स्पिनर हैं. शाकिब अल हसन, सुनील नारायण और वरुण चक्रवर्ती. इनके 12 ओवर बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं. य​दि 12 नहीं तो कम से कम 8 ओवर तो ज़रूर, जो वरुण चक्रवर्ती और सुनील नारायण करते हैं.

दिल्ली और बैंगलोर के ख़िलाफ़ सब इन्हें देख चुके हैं. दूसरी तरफ़ यदि मौज़ूदा फ़ॉर्म को देखें तो चेन्नई के रितुराज गायकवाड़ और फ़ॉफ़ डू प्लेसी अच्छा खेल रहे हैं, लेकिन फिर भी न जाने क्यों कोलकाता का पलड़ा भारी लग रहा है. गेंदबाज़ी के अलावा उनके पास शुभमन गिल और वेंकटेश अय्यर के रूप में बेहतरीन सलामी जोड़ी है. हालांकि वो केवल 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रहे हैं क्योंकि इयॉन मोर्गन का रोल केवल कप्तानी का है.

यदि कहें कि वो आईपीएल के माइक ब्रेयरली हैं तो ग़लत नहीं होगा. उनकी बल्लेबाज़ी न के बराबर है. कोलकाता के गेंदबाज़ विरोधी टीम को अधिक रन नहीं बनाने दे रहे हैं. इसका फ़ायदा उठाते हुए कोलकाता के बल्लेबाज़ आवश्यक रन आसानी से बनाकर जीत दिला दे रहे हैं.''

वहीं अशोक मल्होत्रा चेन्नई को हल्के में न लेने की सलाह देते हुए कहते हैं, ''वो तीन बार की चैम्पियन है और धोनी को जीतना आता है. उन्होंने एक मज़बूत टीम खड़ी की है. उनकी सलामी जोड़ी रितुराज गायकवाड़ और फ़ॉफ़ डू प्लेसी कमाल की बल्लेबाज़ी कर रही है.

रॉबिन उथप्पा ने जिस तरह सुरेश रैना की कमी पूरी की वो क़ाबिले तारीफ़ है. धोनी की बल्लेबाज़ के रूप में वापसी हुई है और रविंद्र जडेजा पर भी भरोसा किया जा सकता है. गेंदबाज़ी में ब्रावो, दीपक चाहर और राहुल चाहर के अलावा जडेजा हैं, जो मिलजुल कर सशक्त बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी का मिश्रण हैं.

फ़ॉर्म की बात करें तो कोलकाता सरप्राइज़ पैकेज की तरह है, जबकि इतिहास चेन्नई के साथ है. लगता है काँटे की टक्कर होने वाली है और बराबरी का मुक़ाबला होगा.''

प्लेऑफ़ में कम स्कोर वाले मैच हुए. फ़ाइनल में मिलने वाले विकेट को लेकर अशोक मल्होत्रा कहते हैं, ''दुबई में वो बल्लेबाज़ों के पक्ष में रहेगी. शारजाह में सबको मालूम था कि वहां स्पिन गेंदबाज़ी घातक सिद्ध होने वाली है और ये हुआ भी. दुबई में देखना होगा कि स्पिनरों का जादू कितना चलता है.

कोलकाता को जीतना है तो उसके स्पिनरों को चलना होगा. चेन्नई को सब 'डैडस आर्मी' ज़रूर कहते हैं, पर वो सबसे अनुभवी है. अगर चेन्नई की सलामी जोड़ी चल गई तो उन्हें रोकना आसान नहीं होगा.''

महेंद्र सिंह धोनी

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धोनी ने रन बनाए तो सोने पर सुहागा

धोनी अगर टीम को जीता देते हैं तो ये बेहद ख़ास ख़िताब होगा. इसे लेकर अशोक मल्होत्रा कहते हैं, ''वो ज़्यादा बदलाव में यक़ीन नहीं करते. सबको भरपूर मौक़ा देते हैं. उनकी ख़ासियत उनकी कप्तानी है. अगर वह पिछले मैच की तरह बल्लेबाज़ी में भी चल निकलते हैं तो फ़िर ये सोने पर सुहागा होगा.

धोनी को अगर ख़िताब जीतना है तो उनके बल्लेबाज़ों को कोलकाता के गेंदबाज़ों को मारकर खेलना होगा जो दुबई के मैदान में आसान नहीं होगा, लेकिन अगर उनकी टीम जीतती है तो यक़ीनन यह ख़िताब धोनी के लिए बेहद ख़ास होगा.''

क्या धोनी आख़िरी बार पीली जर्सी में चेन्नई के लिए खेल रहे हैं? इसे लेकर अशोक मल्होत्रा कहते हैं, ''ऐसा नहीं लगता. अभी वो एक साल और आईपीएल खेल सकते हैं. सब जानते हैं कि किसी का भी सबसे अच्छा समय खिलाड़ी के रूप में होता है, चाहे बाद में वो मेंटॉर या कोच बन जाए. फ़िर चेन्नई का मैनेजमेंट और धोनी के प्रशंसक भी चाहेंगे कि अभी वो एक साल और खेलें.''

अब ये तो भविष्य के यक्ष प्रश्न हैं. अभी तो सर पर आईपीएल- 21 का फ़ाइनल खड़ा है. देखना है ख़िताब किसकी झोली में जाता है? चेन्नई सुपर किंग्स चौथी बार चैम्पियन बनती है या कोलकाता नाइटराइडर्स तीसरी बार.

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