टोक्यो ओलंपिक: सानिया मिर्ज़ा क्या इस बार दिखा पाएंगी दम

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
सानिया मिर्ज़ा भारत की सबसे कामयाब महिला टेनिस खिलाड़ी हैं. अब तक के करियर में वह छह ग्रैंडस्लैम ख़िताब जीत चुकी हैं, तीन डबल्स में और तीन मिक्स्ड डबल्स में.
महिला खिलाड़ियों की रैंकिंग में डबल्स में वह शीर्ष पायदान पर रह चुकी हैं जबकि सिंगल्स में वह 27वें पायदान तक पहुंची हैं. इसके अलावा उनके खाते में 40 से अधिक दूसरे ख़िताब भी हैं लेकिन आज भी उन्हें अपने पहले ओलंपिक पदक का इंतज़ार है.
34 साल की सानिया मिर्ज़ा का यह चौथा और संभवत: अंतिम ओलंपिक होगा. सानिया इसमें भाग लेने को लेकर बेहद उत्साहित हैं.
उनका कहना है, "मैं ख़ुशक़िस्मत हूँ कि ओलंपिक में मुझे तीन बार खेलने का मौक़ा मिला. यह मेरा चौथा ओलंपिक होगा. माँ बनने के बाद ओलंपिक में खेलना कुछ ऐसा है जिसका मैं सपना देख रही थी."
सानिया मिर्ज़ा टोक्यो में अंकिता रैना के साथ महिला युगल में अपना दावा पेश करेंगी. सानिया मिर्ज़ा ने नौंवी और अंकिता रैना ने 95वीं रैंकिंग के साथ टोक्यो का टिकट हासिल किया. 28 साल की अंकिता रैना का यह पहला ओलंपिक है.

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अंकिता रैना का पहला ओलंपिक
गुजरात के अहमदाबाद शहर में जन्मी अंकिता रैना मौजूदा समय में भारत की नंबर एक महिला एकल खिलाड़ी है.
उन्होंने साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में महिला एकल में कांस्य पदक जीता. टोक्यो से पहले अंकिता रैना ने विम्बलडन में भी हिस्सा लिया लेकिन महिला युगल में वह पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गई.
अंकिता रैना का कहना है कि "सानिया मिर्ज़ा और वह, दोनों मिलकर देश के लिए ऐतिहासिक पदक हासिल करना चाहेंगी."
ओलंपिक में सानिया के पिछले तीन अनुभव
चाहत ओलंपिक में पदक जीतने की है, लेकिन सानिया मिर्ज़ा बख़ूबी जानती हैं कि इसे हक़ीक़त में बदलना क़तई आसान नही है.
इससे पहले साल 2008 में बीजिंग में हुए ओलंपिक में सानिया मिर्ज़ा महिला युगल में सुनीता राव के साथ उतरीं लेकिन तीसरे दौर में रूसी जोड़ी स्वेत्लाना कुज़्नेत्सोवा और दिनारा सफ़ीना से 4-6, 4-6 से हार गईं.
महिला एकल में सानिया मिर्ज़ा पहले ही दौर में चेक गणराज्य की इवेता बेनसोवा से हार गईं.

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इसके बाद 2012 के लंदन ओलंपिक में वह महिला युगल में रुशमी चक्रवर्ती के साथ खेलीं लेकिन पहले ही दौर में चीन ताइपे की शीह सू वेई और चुआंग चिया जुंग से हार गईं. मिश्रित युगल में वह लिएंडर पेस के साथ खेलते हुए क्वार्टर फ़ाइनल में बेलारूसी जोड़ी विक्टोरिया अज़ारेंका और मैक्स मिर्नई से 5-7, 6-7 से हार गईं.
लंदन रवाना होने से पहले सानिया मिर्ज़ा और भारतीय टेनिस संघ में ज़ोरदार टकराव हुआ.
सानिया मिर्ज़ा वहां महेश भूपति के साथ खेलना चाहती थीं. उन्होंने संघ पर उन्हें वस्तु की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. सानिया मिर्ज़ा अपने तीसरे ओलंपिक रियो में साल 2016 में प्रार्थना थंबारे के साथ जोड़ी बनाकर खेलीं लेकिन पहले ही दौर में चीन की पेंग शुआई और झांग शुआई से 6-7, 7-5, 5-7 से हार गईं.
मिश्रित युगल में सानिया मिर्ज़ा रोहन बोपन्ना के साथ मिलकर खेलीं, और यह जोड़ी सेमीफ़ाइनल तक भी पहुँची, लेकिन वहां हारने से पदक हाथ से फिसल गया. चेक गणराज्य की लूसी हर्डेका और रॉडेक स्टेपनेक ने 1-6, 5-7 से इस जोड़ी को हराया और चौथे स्थान पर धकेल दिया.
साल 1988 में टेनिस के दोबारा ओलंपिक में शामिल होने के बाद यह पहला अवसर है जब भारत की कोई पुरूष जोड़ी ओलंपिक में नहीं होगी. रोहन बोपन्ना और दिविज शरण कट ऑफ तारीख़ तक संयुक्त रैंकिंग के आधार पर टोक्यो का टिकट पाने में नाकाम रहे.

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ओलंपिक से पहलें विम्बलडन में उतरीं सानिया
टोक्यो जाने से पहले अंकिता रैना की तरह सानिया मिर्ज़ा भी विम्बलडन में उतरीं. विम्बलडन में उनकी जोड़ीदार अमेरिका की बेथानी माटेक सैंडस थी, लेकिन यह जोड़ी रूसी जोड़ी एलीना वेस्नीना और वेरोनिका कुदरमेतोवा से 4-6, 3-6 से हारकर दूसरे दौर में ही बाहर हो गई.
सानिया और अंकिता का दमख़म
ख़ुद ओलम्पियन और भारतीय डेविस कप टीम के पूर्व खिलाड़ी रह चुके एवं वर्तमान में भारतीय टेनिस टीम के कोच ज़ीशान अली इस बात से निराश हैं कि पुरूष युगल जोड़ी रोहन बोपन्ना और दिविज शरण ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई नहीं कर पाए.
ज़ीशान अली कहते हैं कि उनके लिए सबसे बड़ा झटका रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्ज़ा का मिश्रित युगल के लिए टिकट ना मिलना रहा जहां पदक जीतने की सबसे अधिक उम्मीद थी. वह पिछले रियो ओलंपिक को भी याद करते हैं जब रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्ज़ा पदक मैच के क़रीब पहुँच गए थे.

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सानिया मिर्ज़ा 34 साल की और अंकिता रैना 28 साल की हैं. ऐसे में उनकी फ़ॉर्म और फ़िटनेस को लेकर ज़ीशान अली कहते हैं कि सानिया मिर्ज़ा लगभग डेढ़ साल बाद टेनिस खेल रही हैं. उन्होंने बेटा होने के बाद आराम के लिए ब्रेक लिया था. पाँच साल पहले उनकी फ़िटनेस का जो स्तर था, अब वैसा नहीं है.
तो क्या उनका अनुभव ही कोई चमत्कार करेगा ? इस सवाल के जवाब में ज़ीशान अली कहते हैं कि यह उनका चौथा ओलंपिक है, वह दुनिया में नम्बर एक रह चुकी हैं तो ऐसा भी नहीं है कि वो फ़िट नहीं है. दूसरी तरफ़ अंकिता रैना पहली बार इतनी बड़ी स्पर्धा में हिस्सा ले रही हैं तो वहां सानिया मिर्ज़ा का अनुभव उनके काम आएगा.
अंकिता रैना ओलंपिक के दबाव में नर्वस हो सकती हैं लेकिन उम्मीद है सानिया मिर्ज़ा का साथ उन्हें मिलेगा. अगर एक अच्छा ड्रा इस जोड़ी को मिला तो यह बेहतर कर सकती है.
अंकिता रैना भले ही सानिया मिर्ज़ा की तरह ग्रैंडस्लैम नहीं जीती हैं लेकिन क्या वह दिमाग़ी मज़बूती से खेल सकती हैं? इसके जवाब में ज़ीशान अली कहते हैं, "निश्चित रूप से, ख़ासकर ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट में अगर यह भाग ले रही हैं तो दिमाग़ी मज़बूती बहुत मायने रखती है."
सानिया मिर्ज़ा को ज़ीशान अली ने उनके बचपन से देखा है और ज़ीशान अली के पिता, पूर्व डेविस कप खिलाड़ी और कोच रहे दिवंगत अख़्तर अली ने सानिया को शुरूआती कोचिंग भी दी थी.
क्या बात है जो सानिया मिर्ज़ा को ख़ास बनाती है?
इसके जवाब में ज़ीशान अली कहते हैं कि सानिया मिर्ज़ा बेहद मेहनती खिलाड़ी हैं.
"भारत में टैलेंट की तो कोई कमी नहीं है लेकिन जो आग किसी खिलाड़ी में होनी चाहिए, जो कुछ भी त्याग या क़ुर्बानी देने के लिए तैयार रहे, कठिनाइयों को सहने की क्षमता हो वह भी युवा दिनों में, वह सब कुछ सानिया में है."

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कोविड पाबंदी का कितना होगा असर
कोविड के कारण टोक्यो में कई तरह के प्रतिबंध भी होंगे. उनके बीच प्रदर्शन करना कितना मुश्किल होगा?
इसे लेकर ज़ीशान अली कहते हैं कि मुश्किलें बहुत होंगी.
"इस बार भारत को लेकर उनके क़ानून थोड़ा अधिक सख़्त हैं क्योंकि यहां कोरोना के मामले अधिक थे. वहां जाने से एक सप्ताह पहले उन्हें रोज़ कोविड टेस्ट कराना होगा. जापान पहुँचने पर एयरपोर्ट पर फ़िर कोविड टेस्ट होगा."
भारत से जा रहे एथलीटों को वहां पहुंचने के बाद तीन दिन क्वारंटीन रहना होगा. इस दौरान वो किसी से नहीं मिल सकेंगे. जापान पहुँचने के बाद वापस आने तक रोज़ाना सुबह शाम कोविड टेस्ट होगा.
जीशान अली बताते हैं, "इन सब बातों का खिलाड़ी के दिमाग़ पर बहुत असर पड़ेगा. कब खाना है, कब कहां जाना है जैसे प्रतिबंध के बीच कैसे खेलना है सोचना पड़ेगा. हालांकि यह सभी देशों के साथ होगा, फ़िर भी थोड़ी मुश्किल तो होगी."
सानिया मिर्ज़ा में ओलंपिक पदक को लेकर कितनी भूख है. इसे लेकर ज़ीशान अली कहते हैं कि खिलाड़ी के लिए तो देश का प्रतिनिधित्व करना ही गौरव की बात होती है चाहे वह ओलंपिक हो, एशियन गेम्स हो, कॉमनवेल्थ गेम्स हो या टेनिस में डेविस कप.
"सानिया मिर्ज़ा भी ओलंपिक को लेकर बहुत उत्साहित हैं. हम सब आगे देख रहे है, अगर डॉ अच्छा मिल जाए तो पदक भी मिल सकता है."
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