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BBC ISWOTY- एन रतनबाला देवी: मिडफील्ड की शानदार खिलाड़ी जो है भारतीय फुटबॉल टीम की जान
मणिपुर के बिश्नुपुर ज़िले के नामबोल खाथोंग में पैदा हुईं फुटबॉलर नोंगमाइथेम रतनबाला देवी ने देश की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ियों में से एक बनने के लिए लंबा सफर तय किया है. वो साल 2020 की ऑल इंडिया फुटबॉल फ़ेडरेशन की उभरती हुई खिलाड़ी हैं.
कम उम्र में ही उन्होंने अपने इलाक़े के लड़कों के साथ फ़ुटबॉल खेलना शुरू किया था. उन्होंने शौक-शौक में फ़ुटबॉल खेलना शुरू किया था लेकिन धीरे-धीरे ये उनका जुनून बनता गया और वो अपना अधिकतर वक़्त मैदान पर ही बिताने लगीं.
शुरुआती रुकावटों को पार करना
देवी के पिता एक निजी कंपनी में ड्राइवर के तौर पर थे. उन पर अपने पांच सदस्यों के परिवार को पालने की ज़िम्मेदारी थी. आर्थिक दिक्कतों के बावजूद देवी के पिता ने फ़ुटबॉल के प्रति उनके जुनून को समझा और उनका पूरा सहयोग किया. अपने पिता को देवी, अपना हीरो मानती हैं.
देवी भारत के लिए फ़ुटबॉल खेलना चाहती थीं. उनके सपने को पूरा करने में उनके एक चाचा ने भी पूरा सहयोग किया.
अपने परिवार के सहयोग से वो इंफाल में भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के ट्रेनिंग सेंटर पहुंची. हालांकि देवी कहती हैं कि वो वहां बहुत संतुष्ट नहीं थीं क्योंकि एसएआई की टीम टूर्नामेंटों में हिस्सा नहीं लेती थी जिसकी वजह से उनके पास बहुत ज़्यादा मौके नहीं थे.
इसलिए वो एक स्थानीय फ़ुटबॉल क्लब (केआरवाईपीएसए) से जुड़ गईं जहां उन्होंने कोच ओजा चाओबा से खेल का प्रशिक्षण लिया. देवी बताती हैं कि इस क्लब का ट्रेनिंग प्रोग्राम बहुत अच्छा था और यहां की टीम कई टूर्नामेंटों में हिस्सा लेती थी. वो मानती हैं कि इस क्लब के साथ जुड़ने से उनकी खेल की टेक्नीक में बहुत सुधार हुआ और उनका खेल भी बेहतर हुआ.
सपनों को मिले पंख
स्थानीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन के दम पर देवी जल्द ही मणिपुर की टीम का हिस्सा बन गईं और राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में हिस्सा लेने लगीं. वो ऑल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन में कई आयु वर्ग की टूर्नामेंटों में भी खेलीं. साल 2015 में वो भारत की जूनियर टीम का हिस्सा बन गई जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. उन्हें कई बार टूर्नामेंट की श्रेष्ठ खिलाड़ी का ख़िताब भी मिला.
और फिर साल 2017 में वो भारत की महिला फ़ुटबॉल टीम का हिस्सा बन गईं. वो भारतीय टीम की मिडफील्डर है डिफेंस मज़बूत करना उनकी ज़िम्मेदारी है. वो अपनी टीम के लिए मज़बूत रक्षात्मक भूमिका निभाने के साथ-साथ अपनी तेज़ पैंतरेबाज़ी से कई बार विपक्षी टीम के लिए ख़तरा भी पैदा कर देती हैं.
वो साल 2019 में नेपाल में आयोजित पांचवी सएएफ़एफ़ ट्राफ़ी जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं. इसी साल 13वें एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम में भी वो शामिल थीं. 2019 में स्पेन में आयोजित कोटिफ़ विमेन टूर्नामेंट में उन्होंने भारत के लिए दो गोल भी किए थे.
घरेलू मैचों में भी वो प्रभावशाली खेल दिखाती रही हैं. 2019 में हीरो इंडियन विमेन लीग में उन्हें उभरती हुई खिलाड़ी का ख़िताब दिया गया था. 2020 में हुए लीग के अगले संस्करण में देवी को टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवॉर्ड मिला था. इस सत्र में वो अपने क्लब केआरवाईएचपीएसए की टीम को दूसरे पायदान पर ले गईं थीं.
साल 2020 में ऑल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन की उभरती हुई खिलाड़ी का खिताब जीतने के बाद देवी ने अब तक की अपनी सबसे बड़ी पहचान हासिल की- एआईएफ़एफ़ की वेबसाइट पर दिए गए उनके जीवन परिचय में उन्हें भारतीय टीम की जान कहा गया है.
देवी कहते हैं कि वो अपने सपनों को जी रही हैं और हर दिन अपनी मेहनत के दम पर अपने खेल में और सुधार करना चाहती हैं. वो एक दिन प्रीमियर इंटरनेशनल क्लब के लिए खेलना चाहती हैं.
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