चेतन चौहान: सुनील गावस्कर के जोड़ीदार से लेकर राजनीति की बल्लेबाज़ी तक

    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

नियति कई बार अपना ऐसा खेल दिखाती है कि जो ना सोचा जाए वही हो जाता है. रविवार की शाम आते-आते सबको यह दुखद समाचार सुनने को मिला कि भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ चेतन चौहान अब इस दुनिया में नहीं रहे.

पिछले कुछ दिनों से चेतन चौहान कोरोना से पीड़ित थे और दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक अस्पताल में अपना उपचार करा रहे थे.

बताया जा रहा है कि उनकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया था, लेकिन जो भी चेतन चौहान को नज़दीक से जानते हैं उन्हें मालूम है कि चेतन चौहान आसानी से हार मानने वाले नहीं थे. वह अपने व्यक्तित्व और सेहत का बहुत अधिक ध्यान रखते थे.

जिस तरह वह हमेशा अपने परिधानों को संभालते थे उसी तरह वह अपना व्यवहार भी बेहद संतुलित रखते थे. एक खिलाड़ी के तौर पर उनकी पहचान भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर के सलामी जोड़ीदार के रूप में होती रही है.

सुनील गावस्कर के साथ चेतन चौहान कितने कामयाब थे इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके क्रिकेट टीम से हटने के बाद कम से कम पंद्रह खिलाड़ियों ने सलामी बल्लेबाज़ी की लेकिन बाद में कहीं जाकर के श्रीकांत गावस्कर के साथ थोड़ा जम सके.

सुनील गावस्कर जब भी ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ डेनिस लिली से जुड़ा विवादित क़िस्सा याद करते हैं तो कहते हैं, 'अगर मराठा होने के नाते उनका ख़ून गरम था तो दूसरे छोर पर चेतन चौहान भी राजपूत थे.'

ख़ैर गावस्कर अब उस बात के लिए माफ़ी भी मांग चुके हैं और उस क़िस्से को मज़ाक में ही लेते हैं.

तब गावस्कर चेतन चौहान का हाथ पकड़कर उन्हें बाउंड्री लाइन के क़रीब तक ले आए थे बाद में टीम मैनेजर दुर्रानी ने चेतन चौहान को मैदान में वापस भेजा था. अगर दुर्रानी ऐसा ना करते तो भारत जुर्माने सहित मैच हारता.

चेतन चौहान भले ही कोई टेस्ट शतक नहीं लगा सके लेकिन एक सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर उन्होंने सुनील गावस्कर के साथ सबसे अधिक शतकीय साझेदारी की.

चेतन चौहान और सुनील गावस्कर ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ओवल में यादगार दोहरी शतकीय साझेदारी की जिसके बाद भारत जीत के क़रीब पहुंचा लेकिन कुछ रन से भारत जीतते-जीतते रह गया और मैच ड्रॉ रहा.

बरसों खिलाड़ियों के लिए काम किया

चेतन चौहान कई बार भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर भी रहे. जब भारत ने सौरव गांगुली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम का टेस्ट विजयी रथ कोलकाता में रोका था तब दूसरी पारी में वीवीएस लक्ष्मण को नम्बर तीन पर खिलाने वाले चेतन चौहान ही थे क्योंकि वह टीम के मैनेजर थे.

उसके बाद भारत ने ना सिर्फ़ टेस्ट मैच जीता वरन लक्ष्मण ने 281 रनों की एतिहासिक पारी भी खेली थी. चेतन चौहान ऐसे ना जाने कितने क़िस्सों के गवाह बने.

दिल्ली राज्य क्रिकेट संघ के उपाध्यक्ष के रूप में वह बरसों खिलाड़ियों के लिए काम करते रहे.

एक खेल पत्रकार के रूप में ना जाने कितनी बार उनसे डीडीसीए में मुलाक़ात हुई और उनके ढेरों इंटरव्यू किए. वह वरिष्ठ क्रिकेट संघ से भी जुड़े थे जिसके कारण कई बार भारत पाकिस्तान और भारत श्रीलंका वेटरन क्रिकेट सीरीज़ हुई.

साथी क्रिकेटरों की यादों में

उनके निधन को लेकर उनके साथी क्रिकेटर रहे मदन लाल कहते हैं कि चेतन चौहान कुछ साल महाराष्ट्र और फिर दिल्ली और भारत के लिए खेले.

सुनील गावस्कर के साथ तो उनकी जोड़ी मशहूर थी ही. दिल्ली रणजी टीम के तो वह मैच विजेता खिलाड़ी रहे. मदन लाल कहते हैं कि 'चेतन चौहान बड़े ही मृदुभाषी थे. यह दुखद है कि एक शानदार इंसान अपनी ज़िंदगी की जंग हार गया. हमें आज तक याद है कि साल 1996 में हुए आईसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए दिल्ली के तब के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान के नए पैवेलियन को बनाने के लिए दिन रात काम चल रहा था और चेतन चौहान भी तब जी जान से जुटे हुए थे.'

उसे लेकर मदन लाल कहते हैं कि डीडीसीए के पदाधिकारी के रूप में उन्होंने हमेशा अच्छा काम किया. उन्हें मालूम था कि अटके हुए काम कैसे पूरे करने हैं. वह हर मसले को सुलझा लेते थे. डीडीसीए में चेतन चौहान का नाम सम्मान से लिया जाता था.

मदन लाल आगे कहते हैं कि चेतन चौहान के साथ उनके अनेक यादगार क़िस्से है लेकिन ख़ुद मदन लाल भी सुनील गावस्कर और लिली से चेतन चौहान के जुड़ने का क़िस्सा यादगार मानते हैं.

लेकिन मदन लाल कहते हैं कि 'चेतन चौहान ने शायद ही किसी को अप्रिय बात कही हो. चेतन चौहान से बहुत कुछ सीखने को मिला. अब तो बस उनकी यादें बची है. चेतन चौहान का ऐसे जाना सचमुच अफ़सोस जनक है.'

चेतन चौहान को लेकर खेल पत्रकार राकेश राव कहते हैं कि कोरोना के बाद अस्पताल में जब से चेतन चौहान जीवनरक्षक मशीन पर गए तब से वह ख़ुद कई डाक्टरों से बात करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि 73 साल की उम्र में अगर किडनी फेल हो जाए तो फ़िर रिकवरी बहुत मुश्किल है.

'तब यह सुनकर एक आघात भी लगा और उम्मीद भी कम हो गई थी, लेकिन उनके निधन की ख़बर ने तोड़ कर रख दिया है. महाराष्ट्र के बाद जब से वह दिल्ली आए उन्हें नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला. उन्होंने जीवन में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई जैसे पहले वह क्रिकेटर रहे, बाद में डीडीसीए में पदाधिकारी और उसके बाद राजनीति में गए. वह लोकसभा के सदस्य भी रहे.'

निधन से पूर्व वह उत्तर प्रदेश सरकार में कई मंत्रालय का काम देख रहे थे. राकेश राव आगे कहते हैं कि उनका स्वभाव सबको साथ लेकर चलना था.

जब दंगों में अपने सिख साथियों को छुपा दिया

राकेश राव आगे कहते हैं कि वह वो क़िस्सा कभी नहीं भूल सकते जब साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दंगे भड़क उठे थे और नोर्थ ज़ोन की टीम ट्रेन से वापस आ रही थी तो चेतन चौहान ने तेज़ गेंदबाज़ राजिंद्र सिंह घई और नवजात सिंह सिद्धू को छुपा दिया था ताकि कोई उन पर हमला ना कर सके.

रही बात उनके क्रिकेट जीवन की तो हेल्मेट के आने बाद उनका सितारा और चमका. राकेश राव चेतन चौहान की उस पारी को भी याद करते हैं जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में ही डेनिस लिली की गेंदों पर लगातार चार चौक्के जड़े.

दिल्ली के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन से जैसे ही हमने चेतन चौहान के निधन की बात की तो बात पूरी होने से पहले ही उन्होंने कहा कि यह बहुत बुरा हुआ. चेतन चौहान को अपना सीनियर क्रिकेटर बताते हुए अतुल वासन ने कहा कि 'वह साथ-साथ खेले भी और डीडीसीए के लिए मिलकर काम भी किया. चेतन चौहान ने कर्मठ क्रिकेटर की तरह क्रिकेट की सेवा की. वह राजनेता भी थे. इस तरह चेतन चौहान का जाना बहुत बड़ी व्यक्तिगत क्षति भी है. चेतन सदा मुस्कुराते रहते थे और कभी नकारात्मक बात नहीं करते थे.'

चेतन चौहान से जब मेरी भी व्यक्तिगत रूप से इंटरव्यू के लिए मुलाक़ात होती थी तो अगर उनके पास समय होता था तो वह कोई क़िस्सा भी सुनाते थे.

ऐसे ही एक बार उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने हरभजन सिंह और एंड्रयू सायमंडस का विवाद सुलझाया. तब चेतन चौहान ही ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर थे.

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