सौरभ गांगुली क्या आईसीसी के नए चेयरमैन बन सकते हैं?

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शशांक मनोहर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के पहले स्वतंत्र चेयरमैन का पद बुधवार को छोड़ दिया.
शशांक मनोहर दो बार आईसीसी के चेयरमैन रहे हैं, उन्होंने नवंबर 2015 में आईसीसी चेयरमैन का पदभार संभाला था. शशांक मनोहर के इस्तीफ़े के बाद उप चेयरमैन हॉन्गकॉन्ग के इमरान ख़्वाजा अंतरिम चेयरमैन होंगे. जल्द ही नए चेयरमैन का चुनाव होगा और आईसीसी बोर्ड अगले कुछ हफ्तों में चुनाव प्रक्रिया को अपनी मंज़ूरी दे सकता है.
अब सवाल ये है कि क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस प्रतिष्ठित पद के लिए भारत फिर से अपनी दावेदारी करेगा?
क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरभ गांगुली चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार होंगे?
47 साल के गांगुली अगर चुनाव लड़ने का मन बना भी लें तो लोढ़ा समिति की एक सिफ़ारिश उनकी राह में रोड़ा बन सकती है. यानी टीम इंडिया के पूर्व कप्तान गांगुली की दावेदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि उच्चतम न्यायालय उन्हें लोढ़ा समिति के प्रशासनिक सुधारवादी क़दमों के तहत कूलिंग ऑफ़ पीरियड (अनिवार्य ब्रेक) में छूट देकर बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहने का मौक़ा देता है या नहीं.
कार्यकाल

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गांगुली ने पिछले साल अक्तूबर में बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभाली थी, लेकिन लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशों के मुताबिक़ उनका कार्यकाल इसी महीने ख़त्म हो जाएगा.
सौरभ गांगुली और बीसीसीआई के सचिव जय शाह को कूलिंग पीरियड से छूट देने की बीसीसीआई की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के मौजूदा चेयमैन अहसान मानी ने साफ़ तौर पर कहा है कि वो आईसीसी चेयरमैन पद की दौड़ में नहीं हैं.
अहसान मानी 2003 से 2006 तक आईसीसी के अध्यक्ष रहे थे. पिछले दिनों मीडिया में आई ख़बरों में मानी के हवाले से कहा गया था, "कुछ लोगों ने मुझसे आईसीसी चेयरमैन का चुनाव लड़ने के लिए कहा था, लेकिन मैंने कहा कि मैं इच्छुक नहीं हूँ."
इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन 72 साल के कोलिन ग्रेव्स नए चेयरमैन के दावेदारों में से हैं. उनके अलावा वेस्टइंडीज क्रिकेट के पूर्व प्रमुख डेव कैमरन, न्यूजीलैंड के ग्रेगोर बार्कले, क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के क्रिस नेनजानी भी इस पद को लेकर दिलचस्पी दिखा चुके हैं.
शशांक मनोहर की बीसीसीआई से तनातनीये बात किसी से छिपी नहीं है. शशांक मनोहर के बीसीसीआई से संबंध अच्छे नहीं चल रहे थे. पिछले साल दिसंबर में उन्होंने ऐलान कर दिया था कि वो तीसरी बार चेयरमैन पद के दो साल के कार्यकाल के लिए अपना दावा पेश नहीं करेंगे. शशांक मनोहर मई 2016 में आईसीसी के पहले स्वतंत्र चेयरमैन चुने गए थे.
शर्तें

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स्वतंत्र चेयरमैन का पद भी उनकी अध्यक्षता वाले एक पैनल की सिफ़ारिश पर बना था. स्वतंत्र चेयरमैन की शर्तों को पूरा करने के लिए उन्होंने बीसीसीआई का अध्यक्ष पद छोड़ा और फिर आईसीसीसी का चेयरमैन पद भी. जिसके बाद उन्हें स्वतंत्र चेयरमैन चुन लिया गया.
बीसीसीआई ने शुरुआत में तो शशांक मनोहर के चुनाव को 'भारत के लिए गौरव' बताया, लेकिन तनातनी तब शुरू हुई जब शशांक मनोहर ने राजस्व बँटवारे के तत्कालीन मॉडल को लेकर सवाल करने शुरू किए.
दरअसल, आईसीसी में एन श्रीनावसन के कार्यकाल के दौरान एक राजस्व मॉडल तैयार किया गया था, जिसमें कमाई का बड़ा हिस्सा भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के क्रिकेट बोर्ड को मिलना था.
शशांक मनोहर की अगुवाई वाले बोर्ड ने इस व्यवस्था को ख़त्म किया और दूसरा मॉडल पेश किया, जिसमें दूसरे देशों के क्रिकेट बोर्डों की हिस्सेदारी बढ़ गई. यही नहीं, मनोहर के कार्यकाल में भारत ने आईसीसी में वित्त और वाणिज्यिक मामलों की कमेटी में अपनी जगह भी गँवा दी.
बीसीसीआई ने इस राजस्व मॉडल का विरोध किया और कहा कि इससे टेस्ट खेलने वाले दूसरे देशों को भी ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ है. बहरहाल, शशांक मनोहर की आईसीसी से विदाई तय थी और वो पहले ही इसकी घोषणा कर चुके थे.
लेकिन बीसीसीआई, जो दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है, आईसीसी में अपनी धमक किसी हाल में कम नहीं होने देना चाहेगा और इसके लिए अगर चुनावी मैदान में गांगुली उतरे तो निश्चित तौर पर बीसीसीआई का पलड़ा भारी होगा.
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