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IND Vs AUS: मेलबर्न टेस्ट में मयंक अग्रवाल का बॉक्सिंग डे पंच
- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मेलबर्न के बॉक्सिंग डे टेस्ट में जब 27 वर्षीय मयंक अग्रवाल अपने करियर का पहला टेस्ट खेलने के लिए बल्ला लेकर पिच की ओर जा रहे थे तो उन पर बहुत-सी उम्मीदें टिकी थीं.
टीम मैनेजमेंट ये आशा कर रहा था कि ऑस्ट्रेलिया जैसी तेज़ विदेशी पिच पर उनके बल्ले से रन निकलें. मयंक ने भी उन्हें निराश नहीं किया.
मयंक ने न केवल 76 रन बनाए बल्कि 55 ओवर्स तक ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ों की धार कुंद करते रहे. इस दौरान उन्होंने आठ चौके और एक छक्का लगाया.
जब ये लगने लगा कि वो पिच पर जम चुके हैं तभी पैट कमिन्स ने अपनी गेंद पर विकेट के पीछे कप्तान टिम पेन के हाथों उन्हें आउट कराया.
इस दौरान मयंक ने चेतेश्वर पुजारा के साथ दूसरे विकेट के लिए 83 रनों की साझेदारी की.
भले ही मयंक अपने पहले टेस्ट में शतक से महरूम रह गये लेकिन पिच पर 55 ओवर्स तक उनका टिके रहना टीम मैनेजमेंट के लिए एक सकारात्मक संदेश दे गया जो, पिछले कुछ दिनों से लगातार सलामी बल्लेबाज़ की समस्या से जूझ रहा है.
मैच में अफने शानदार प्रदर्शन के बाद मयंक ने कहा, "मैं लकी हूं कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में मेरा डेब्यू हुआ."
पत्रकारों के पूछने पर उन्होंने कहा, "पिच शुरुआत में थोड़ा स्लो ज़रूर था लेकिन बाद में पिच भी तेज़ हो गया. "
क्यों बदले गए दोनों ओपनर्स?
ऑस्ट्रेलियाई दौरे में भारत एडिलेड में जीता और पर्थ में हारा लेकिन सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल 2, 44, 2, 0 का तो मुरली विजय 11, 18, 0, 20 का स्कोर ही बना सके.
दोनों ने बेशक चार पारियों में एक अर्धशतकीय साझेदारी निभाई लेकिन दोनों में से कोई भी रनों का अर्धशतक तक नहीं पूरा कर सका.
विजय ने चार पारियों में 12.25 की औसत से 49 तो राहुल ने इतनी ही पारियों में 12 की औसत से 48 रन बनाए.
2014 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर शानदार पारियां (53, 99, 144, 27, 68, 11, 0 , 80) खेलने के बाद से मुरली विजय का बल्ला विदेशी पिचों पर लगभग खामोश ही रहा है. हां, इस बीच बांग्लादेश, इंग्लैंड, श्रीलंका और अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ घरेलू पिचों पर उन्होंने शतक ज़रूर जड़े हैं.
वहीं केएल राहुल ने पिछली 25 पारियों में केवल एक शतक और एक अर्धशतक लगाए हैं. वहीं विजय ने तो पिछली 10 पारियों में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ 105 रनों की पारी को छोड़कर केवल 75 रन बनाए हैं.
पहले दो टेस्ट के अलावा दोनों इंग्लैंड में भी नाकाम रहे थे. लिहाजा टीम मैनेजमेंट को कड़े फ़ैसले लेने पड़े और एक साथ दोनों ही सलामी बल्लेबाज़ों को बदल दिया गया.
हनुमा विहारी से उम्मीदें
केएल राहुल और मुरली विजय की जगह टीम मैनेजमेंट ने मयंक अग्रवाल और हनुमा विहारी को बतौर सलामी बल्लेबाज़ उतारा.
मयंक अग्रवाल के साथी सलामी बल्लेबाज़ हनुमा विहारी को पर्थ टेस्ट खेलने का मौका मिला था और दो पारियों में उन्होंने 48 रन बनाए थे.
हनुमा ने मेलबर्न टेस्ट की पहली पारी में भले ही कोई कारनामा नहीं किया लेकिन ये उनका केवल तीसरा टेस्ट मैच है और पहली बार उन्हें ओपनिंग के लिए उतारा गया है.
दूसरी अहम बात कि वो केवल 25 साल के हैं और मयंक की तरह ही अपने करियर के पहले टेस्ट में अर्धशतकीय पारी खेल चुके हैं, लिहाजा उनसे भी उम्मीदें बहुत हैं.
मयंक बने रिकॉर्डधारी
मयंक अग्रवाल ने ऑस्ट्रेलियाई ज़मीन पर 71 साल पुराना पहले टेस्ट में सर्वाधिक रनों का भारतीय रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
1947 में दत्तू फड़कर ने सिडनी टेस्ट में 51 रनों की पारी खेली थी. 76 रनों की पारी की बदौलत अब यह रिकॉर्ड मयंक के नाम हो गया है.
इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अपने टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले मयंक अग्रवाल केवल दूसरे भारतीय सलामी बल्लेबाज़ हैं.
बतौर सलामी बल्लेबाज़ ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले पहले क्रिकेटर आमिर इलाही हैं जिन्होंने 1947 के उसी सिडनी टेस्ट में यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था जिसमें दत्तू फड़कर ने अर्धशतक जमाया था. इलाही का यह पहला टेस्ट था और इसकी दूसरी इनिंग्स में उन्होंने पारी का आगाज किया था.
मयंक सहवाग जैसे बल्लेबाज़
स्कूल के दिनों में मयंक बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल, बैंगलुरू के लिए अंडर-13 क्रिकेट में खेलते थे. उनके कोच इरफान उन्हें वीरेंद्र सहवाग के जैसा बल्लेबाज़ बताते हैं.
कई मौके पर उन्होंने इसे साबित भी किया, 2008-09 की अंडर-19 कूचबिहार ट्रॉफ़ी में 54 की औसत से 432 रन, अंडर-19 क्रिकेट में होबर्ट में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 160 रनों की धुंआधार पारी खेली.
एक इंटरव्यू में कोच ने कहा भी कि मयंक में वीरेन्द्र सहवाग के सभी अच्छे लक्षण हैं और साथ ही यह भी कि वो आसानी से अपना विकेट नहीं गंवाते.
वो कहते हैं कि मयंक में सलामी बल्लेबाज़ के सभी गुण हैं जिसमें वह गेंद को बल्ले पर आने देते हैं और कट तथा पुल शॉट अच्छे से खेलते हैं और मेलबर्न में उनकी पारी के दौरान ये सभी शॉट्स उनके बल्ले से निकलते भी दिखे.
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन
मयंक ने 2010 में घरेलू क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. उनकी शानदार बल्लेबाज़ी से उन्हें 2011 के आईपीएल का कॉन्ट्रैक्ट मिला.
मयंक लगातार बढ़िया खेलते रहे लेकिन साथ ही जानकार कहते रहे कि योग्यता के अनुसार उनका प्रदर्शन तब तक नहीं हुआ था.
13 महीने पहले यानी 2017 के नवंबर में मयंक ने अपनी पहली ट्रिपल सेंचुरी लगाई थी. रणजी ट्रॉफ़ी में कर्नाटक के लिए खेलते हुए महाराष्ट्र के ख़िलाफ़ उन्होंने नाबाद 304 रन बनाए थे. 2017-18 की रणजी ट्रॉफ़ी टूर्नामेंट में 1,160 रनों के साथ टूर्नामेंट के सर्वोच्च स्कोरर रहे. यह महज संयोग ही है कि मेलबर्न में अपने पहले टेस्ट की ही तरह मयंक अपने पहले रणजी मैच में भी शतक बनाने से चूक गये थे.
मयंक अग्रवाल आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू, दिल्ली डेयरडेविल्स, राइज़िंग पुणे सुपरजाइंट्स और किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से खेल चुके हैं.
आईपीएल की 59 पारियों में मयंक ने 16.75 की औसत से 938 रन बनाए हैं. मयंक ने 46 फ़र्स्ट क्लास मैचों में 8 शतक, 20 अर्धशतक और 49.98 की औसत से 3,599 रन बनाए हैं.
घरेलू क्रिकेट में उनका आखिरी मैच गुजरात के ख़िलाफ़ रणजी ट्रॉफ़ी में था जहां उन्होंने 25 और 53 रन की पारी खेली.
मयंक को कैसे मिला मौका?
लगातार घरेलू टूर्नामेंट में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद मयंक को लंबे समय तक भारतीय टीम से बुलावे का इंतज़ार रहा.
और आखिरकार पृथ्वी शॉ के चोटिल होने की वजह से उन्हें बुलावा मिला भी, जिसके बाद मेलबर्न में उन्होंने अपने टेस्ट करियर का आगाज किया.
टेस्ट सिरीज़ शुरू होने से पहले ऑस्ट्रेलिया एकादश के ख़िलाफ़ अभ्यास मैच में फ़ील्डिंग के दौरान 19 वर्षीय शॉ के टखने में चोट लग गई थी. इसके बाद वो ऑस्ट्रेलियाई दौरे से बाहर हो गए.
पृथ्वी शॉ के बारे में तो याद ही होगा कि उन्होंने वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ के दो टेस्ट की तीन पारियों में 134, 70 और नाबाद 33 रनों समेत 118 की औसत से 237 रन बनाए थे.
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