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मिस्ट्री बॉलर वरुण चक्रवर्ती के सात अजूबे
- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आईपीएल 2019 के लिए क्रिकटर्स की नीलामी में जिन दो खिलाड़ियों के लिए सबसे अधिक पैसे खर्च किए गए वो हैं वरुण चक्रवर्ती और जयदेव उनादकट.
आईपीएल के 12वें सीज़न के लिए उनादकाट और वरुण चक्रवर्ती को एक बराबर 8.4 करोड़ रुपए में क्रमशः राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब ने ख़रीदा.
जयदेव उनादकाट जहां पहले भी आईपीएल खेल चुके हैं और पिछली सीजन में इसी टीम के लिए खेले थे.
वहीं, वरुण चक्रवर्ती पहली बार आईपीएल खेलेंगे और मंगलवार की शाम जब उनके नाम की बोली लगी, वो तब से चर्चा में बने हुए हैं.
एक तो उनके क्रिकेट छोड़ कर पढ़ाई करने, नौकरी करने और फिर नौकरी छोड़ कर क्रिकेट में वापसी करने से लेकर आईपीएल में चुने जाने तक की उनकी दिलचस्प कहानी की वजह से और दूसरा इस बात के लिए वो कई तरह की गेंदें फेंक सकते हैं. इस कारण वरुण को मिस्ट्री स्पिनर कहा जाता है.
वरुण की ख़ासियत पावरप्ले और स्लॉगओवर्स (मैच के अंतिम ओवर्स) में किफायती गेंदबाज़ी है. तमिलनाडु प्रीमियर लीग के दो लगातार सीज़न में वरुण ने अपनी गेंदों से कहर बरपाया.
भारत में खेल दिवस के दिन जन्मे वरुण ने स्पिन के कुछ गुर सुनील नरेन और कार्ल क्रो से सीखे हैं. क्रो इंग्लैंड के बर्कशायर के लिए खेलते हैं और इस टीम के कोच भी हैं. उन्होंने गेंदबाज़ सुनील नरेन को भी बॉलिंग गुर सिखाए हैं.
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दिनेश कार्तिक ने आईपीएल 2018 में बुलाया
तमिलनाडु क्रिकेट प्रीमियर लीग की वेबसाइट के एक वीडियो इंटरव्यू में वरुण बताते हैं कि आईपीएल 2018 के नेट प्रैक्टिस के लिए दिनेश कार्तिक ने उन्हें कोलकाता बुलाया था और वहां उन्होंने पीयूष चावला, कुलदीप यादव और सुनील नरेन जैसे गेंदबाज़ों को गेंद डालते देखा, इससे गेंदबाज़ी में बहुत मदद मिली.
वो कहते हैं कि आर्किटेक्ट की पढ़ाई की वजह से उन्हें अनुमान लगाने और अपनी गेंदों को तय करने में काफ़ी मदद मिली है.
तमिलनाडु प्रीमियर लीग (टीएनपीएल) में अपनी प्रतिभा दिखा चुके वरुण आखिर किन गेंदों की वजह से मिस्ट्री गेंदबाज़ हैं.
ईएसपीएन की वेबसाइट पर वैसे तो वरुण के नाम के आगे लेगब्रेक गुगली गेंदबाज़ दर्ज है. लेकिन वो इसके साथ ही ऑफ़ ब्रेक, टॉप स्पिन, कैरम बॉल और स्लाइडर गेंदें भी फेंकते हैं.
चलिए जानते हैं कि ये गेंदें कैसे काम करती हैं और क्रिकेट में इनका क्या मतलब है.
लेग ब्रेकः लेग स्पिनर का मुख्य हथियार लेगब्रेक गेंदें होती हैं. लेगब्रेक गेंदें पिच पर गिरने के बाद दाहिनी ओर से बाईं ओर घूमती हैं. वरुण लेग ब्रेक गेंदबाज़ी के माहिर हैं.
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गुगलीः लेग ब्रेक एक्शन से फेंकी जाने वाली यह गेंद पिच पर गिरने के बाद बल्लेबाज़ के सामने ऑफ़ ब्रेक की तरह से आती है. अक्सर बल्लेबाज़ इस गेंद से चकमा खा जाता है क्योंकि इसमें बॉलर को अपना एक्शन बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ती. हालांकि, इसमें लेग ब्रेक की तुलना में कलाई तेज़ी से घूमती है. इस दौरान कलाई मैदान से 180 डिग्री के कोण पर होती है.
गुगली में स्पिनर के हाथ की तीसरी उंगली गेंद को दूसरी दिशा में मुड़ने में मदद करती है. गेंद पर गेंदबाज़ की पकड़ वही रहती है बस इसकी दिशा बदल जाती है.
ऑफ़ ब्रेकः इसमें गेंद स्पिन गेंदबाज़ के हाथ से निकलने के बाद ऑफ़ साइड से लेग की तरफ घूमती है. मूल रूप से इस तरह की गेंदें ऑफ़ स्पिनर डालते हैं और वरुण चक्रवर्ती की खासियत लेग स्पिन है बावजूद इसके वो ऑफ़ ब्रेक गेंदें डालने में भी वो अच्छी पकड़ रखते हैं.
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कैरम बॉलः इस गेंद की शोहरत का श्रेय श्रीलंका के ऑफ़ स्पिनर अजंता मेंडिस को दिया जाता है.
वैसे तो ऑफ़ स्पिनर दूसरा (जिसमें ऑफ़ ब्रेक गेंद उल्टी दिशा में घूमती है) फेंककर भी लेग स्पिन करते हैं लेकिन मेंडिस और फिलहाल भारत के रविचंद्रन अश्विन कैरम बॉल से लेग स्पिन फेंकने की कला में माहिर गेंदबाज़ हैं.
इसके लिए गेंदबाज़ अपनी अनामिका यानी रिंग फिंगर को हथेली की ओर मोड़ता है. इससे गेंद अनामिका और अंगूठे के बीच फंस जाती है और इस तरह से ऑफ़ स्पिन के साथ घूमती हुई गेंद पिच पर गिरने के बाद दाएं हाथ के बल्लेबाज़ के लिए लेग स्पिन के जैसी आती है. कैरम बॉल फेंकने के लिए गेंदबाज़ गेंद को ज़्यादा फ़्लाइट नहीं देता है.
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फ़्लिपरः फ्लिपर के लिए गेंद को अंगूठे और पहली दो उंगलियों का उपयोग करते हुए हाथ के सामने से बाहर किया जाता है.
गेंदबाज़ के हाथ से गेंद निकलने के बाद पिच पर टकराकर दूसरी तरफ मुड़ जाती है और बेहद आसानी से बल्लेबाज़ को छकाती है.
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर क्लेरी ग्रिमेट को इस गेंद का जनक माना जाता है. अपनी फ्लिपर पर ब्रैडमैन के ऑफ़ स्टंप उड़ाने के कारण मशहूर हो गए थे.
भारत के सर्वाधिक विकेट लेने वाले क्रिकेटर अनिल कुंबले और ऑस्ट्रेलियाई फ्लिपर शेन वार्न को फ्लिपर का मास्टर कहा जाता था.
टॉप स्पिनः ये वो गेंदें हैं जो नीचे की तरफ आती हैं और फिर एकदम से उछाल लेती हैं. यह बहुत हद तक टेनिस के स्पिन की तरह काम करता है. इसमें गेंद पिच पर पहले और तेज़ गिरती है.
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स्लाइडरः ये गेंदें शेन वार्न का हथियार थे. इसे डालना आसान नहीं होता है. इसके लिए गेंद को ग्रिप करने की तकनीक बहुत अहम होती है. इसमें गेंद को तीनों उंगलियों से पकड़ा जाता है. पहली दो उंगलियों के बीच की दूरी ज़्यादा होती है और ये दोनों उंगलियां सिलाई पर रखी जाती हैं. तीसरी उंगली मुड़ी होती है जिसकी मदद से गेंद को स्पिन कराया जाता है. गेंद लेग स्पिन की तरह ही डालते हैं लेकिन इसमें कलाई नीचे की ओर झुकी होती है. यानी गेंद कलाई की मदद से डाली जाती है.
अब इतने तरह की गेंदों के साथ वरुण को अजूबा गेंदबाज़ कहना ग़लत तो बिल्कुल नहीं है. हां, एक साथ शेन वार्न और अनिल कुंबले जैसी गेंद डालने वाले होनहार को उनकी घूमती गेंदों के साथ देखने और विकेटें चटकाते देखने के लिए महज़ कुछ महीनों का इंतजार करना होगा.