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IND vs AUS: पर्थ में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीता, भारत के दो बड़े बदलाव
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ का दूसरा मुक़ाबले पर्थ में खेला जा रहा है. टॉस ऑस्ट्रेलिया ने जीता और पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया है.
भारत ने अंतिम एकादश में दो बदलाव किए हैं. रोहित शर्मा की जगह हनुमा विहारी को टीम में जगह दी गई है, विहारी छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए उतरेंगे. पर्थ के विकेट क्योंकि तेज़ गेंदबाज़ों के अनुकूल माना जाता है, इसलिए स्पिनर आर अश्विन की जगह उमेश यादव को एकादश में शामिल किया गया है.
भारत इस मैच में चार तेज़ गेंदबाज़ों के साथ उतरा है. ये हैं- ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, उमेश यादव और जसप्रीत बुमराह.
भारत पहला टेस्ट जीतकर सिरीज़ में 1-0 से आगे है. अगर पर्थ में भारत में मेजबान टीम को शिकस्त देने में कामयाब रहा तो न केवल ये उसकी 10 साल के बाद जीत होगी, बल्कि सिरीज़ में हार का विराट एंड कंपनी का डर भी जाता रहेगा.
आंकड़े भारत के पक्ष में नहीं
पर्थ में भारत को आज तक केवल एक टेस्ट मैच में जीत मिली है जबकि तीन बार हार.
वैसे दूसरा टेस्ट मैच पर्थ के नए ऑप्टस स्टेडियम में होगा. वहां आज तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला गया है. दरअसल, पहले अब तक पर्थ में मैच वहां बहने वाली स्वान नदी की दूसरी तरफ मौजूद स्टेडियम में खेले गए हैं और जानकारों की नज़र में नदी की दूसरी तरफ ऑप्टस स्टेडियम में भी तेज़ गेंदबाज़ों का बोलबाला होगा, वैसे भी पर्थ तेज़ गेंदबाज़ों के लिए स्वर्ग माना जाता है.
यह पहली बार है जब मैच ड्रॉप इन विकेट पर खेला जा रहा है. इन दिनों वहां गर्मी का मौसम है.
पर्थ में इससे पहले भारत साल 2012 में महेंद्र सिंह की कप्तानी में खेला था.
वह चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ का तीसरा टेस्ट मैच था जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने भारत को एक पारी और 37 रन से हराया था.
टीम में सहवाग-गंभीर जैसी सलामी जोड़ी और उसके बाद राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण, विराट कोहली और कप्तान धोनी जैसे बल्लेबाज़ थे.
भारतीय टीम पहली पारी में महज़ 161 रन पर सिमट गई थी और मौजूदा कप्तान विराट कोहली ने सर्वाधिक 44 रन बनाए. जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 369 रन बनाए.
दूसरी पारी में भी भारत 171 रन पर ढेर हो गया और ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे ही दिन मैच अपने नाम कर लिया. दूसरी पारी में भी युवा विराट कोहली ने ही सर्वाधिक 75 रन बनाकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों से लोहा लिया.
तब कोहली पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच खेल रहे थे.
बल्लेबाज़ों पर दारोमदार
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही टीमों को अपने तेज़ गेंदबाज़ों पर भरोसा है.
वैसे एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के ऑफ़ स्पिनर नाथन लॉयन ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए पहली पारी में दो और दूसरी पारी में छह विकेट अपने नाम किए.
हालांकि भारतीय बल्लेबाज़ स्पिन खेलने में माहिर माने जाते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क ने जोश हैज़लवुड के साथ मिलकर भारत को समय-समय पर झटके दिए. लेकिन अहम मौक़ो पर उनके खिलाड़ियों का कैच छोड़ना टीम पर भारी पड़ा.
दूसरी तरफ भारत के बल्लेबाज़ों ने भी गैरज़िम्मेदाराना बल्लेबाज़ी की. पहली पारी में रोहित शर्मा जमने के बाद नाथन लॉयन की गेंद पर छक्का लगाने की कोशिश में कैच आउट हुए.
ऋषभ पंत तो ऐसे खेले जैसे वह टी-20 मुक़ाबला खेल रहे हैं. इतना ही नही दूसरी पारी में तो अजिंक्य रहाणे रिवर्स स्वीप करते हुए आउट हुए.
वह तो ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 36 अतिरिक्त रन दिए जबकि भारत ने 307 रन बनाए थे.
इतने अतिरिक्त रन तो किसी भी टीम की नाव डूबोने के लिए काफी है जबकि मैच बड़े स्कोर वाला ना हो.
अब अगर ऑस्ट्रेलिया के कप्तान सिर्फ अपने तेज़ गेंदबाज़ों के दम पर जीतना चाहते है तो ऐसे तो होने से रहा. उसके बल्लेबाज़ों को भी जमकर खेलना होगा.
उनके सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ एरॉन फिंच और उस्मान ख़्वाजा बेहद ख़राब शॉट खेलकर पवेलियन लौटे.
खासकर दूसरी पारी में जब ऑस्ट्रेलिया जीत के लिए 323 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी.
जब-जब लगा कि शॉन मार्श, कप्तान टिम पेन, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जम गए है तब-तब उन्होंने अपने विकेट गंवाए.
भारत के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा और जसप्रीत बुमराह ने अपना दमख़म दिखाया.
पिछले कुछ वर्षो में विदेशी पिचों पर भारतीय तेज़ गेंदबाज़ कामयाब रहे हैं.
एडिलेड में टीम में शामिल एकमात्र स्पिनर आर अश्विन ने भी छह विकेट झटककर अपना अहम योगदान दिया.
दोनों टीमों में कोई बड़ा अंतर नहीं
पहले टेस्ट मैच के आधार पर पर माना जा सकता है कि दोनों टीमों में कोई विशेष अंतर नहीं है.
भले ही कागज़ पर भारतीय टीम बेहद मज़बूत है लेकिन नज़दीकी हार से ऑस्ट्रेलिया भी बहुत निराश नहीं है.
अगर उनके खिलाड़ियों का आत्मविश्वास जाग उठा तो भारत को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
सलामी जोड़ी मुरली विजय और केएल राहुल ने दूसरी पारी में बेहद महत्वपूर्ण अर्धशतकीय साझेदारी की जो भारत की जीत में निर्णायक साबित हुई.
भारत ने इस बार टीम के चयन में कोई ग़लती नहीं की.
पिछली बार इंग्लैंड में चेतेश्वर पुजारा को पहले टेस्ट से बाहर रखा गया था. लेकिन एडिलेड में वो ही पुजारा टीम के संकटमोचक साबित हुए.
अगर पर्थ में भी भारत को जीत हासिल करनी है तो एडिलेड में हुई कुछ ग़लतियों से सबक लेकर मैदान में उतरना होगा.
टीम के बल्लेबाज़ी कोच संजय बांगड़ कह चुके हैं कि मध्यमक्रम को अपने विकेट की अहमियत समझनी होगी.
अगर भारत पर्थ में जीता तो चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ में 2-0 की बढ़त के साथ सिरीज़ हारने डर भी समाप्त हो जाएगा.
नहीं खेलेंगे रोहित और अश्विन
भारत ने दूसरे टेस्ट मैच के लिए टीम का ऐलान करते हुए रोहित शर्मा और आर अश्विन को टीम में जगह नहीं दी है.
तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार और ख़ब्बू स्पिनर रवींद्र जडेजा की 13 सदस्यीय टीम में वापसी हुई है.
अश्विन को पहले टेस्ट मैच में फील्डिंग करते हुए चोट लगी थी.
विराट कोहली हमेशा पांच गेंदबाज़ों के साथ उतरना पसंद करते हैं लेकिन पहले टेस्ट मैच में वह चार गेंदबाज़ों के साथ खेले.
देखना है कि क्या पर्थ में वह चार तेज़ गेंदबाज़ और स्पिनर रवींद्र जडेजा के साथ खेलते हैं या फ़िर चार गेंदबाज़ों के साथ.
वहीं ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड की टीम में कोई बदलाव नहीं किया है और वहां की हार से सबक सीखकर पर्थ में पलटवार कर सिरीज़ में बराबरी हासिल करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहेगा.
लिहाज़ा पर्थ टेस्ट के बेहद रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है.