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ऑस्कर तबरेज़: छड़ी के सहारे चलने वाला 70 पार का एक फ़ुटबॉल कोच
- Author, प्रशांत चाहल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रूस में चल रहे फ़ुटबॉल विश्व कप के दूसरे नॉक-आउट मुक़ाबले में दक्षिण अमरीकी टीम उरुग्वे ने शनिवार को यूरोप की सबसे मज़बूत टीमों में से एक पुर्तगाल को 2-1 से हरा दिया.
जीत के बाद उरुग्वे टीम के ड्रेसिंग रूम में जब जश्न मनाया जा रहा था, उसी समय टीम के मैनेजर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "हमें बॉल को और ज़्यादा वक़्त तक अपने पास रखना चाहिए था. खेल के क़रीब 61 फ़ीसद समय गेंद पुर्तगाल के पास थी. इसके लिए कुछ करना होगा."
ये हैं 71 साल के उरुग्वे टीम के मैनेजर ऑस्कर वॉशिंगटन तबरेज़ सिल्वा जो अपनी टीम के बीच तीखी आलोचनायें करने के लिए जाने जाते हैं.
हालांकि टीम के खिलाड़ियों को उनकी साफ़गोई बहुत पसंद है. कोच ऑस्कर तबरेज़ के बारे में उनके ख़ास दोस्त मज़ाक में कहते हैं, "ऑस्कर फ़ुटबॉल गेम में आने से पहले प्राइमरी स्कूल का मास्टर रहा है. इसलिए उसकी 'मास्टरों वाली' आदत है."
12 साल लंबा निर्विवाद करियर
60-70 के दशक में ऑस्कर तबरेज़ का एक सीनियर फ़ुटबॉल खिलाड़ी के रूप में 12 साल लंबा निर्विवाद करियर रहा है. लोग उन्हें एक सुलझे हुए शख़्स के तौर पर देखते हैं.
लेकिन उनका टीम मैनेज करने का अनुभव इससे काफ़ी ज़्यादा विस्तृत है. क़रीब 30 साल लंबे कोचिंग करियर में उन्होंने कोलंबिया, अर्जेंटीना, इटली और स्पेन के बड़े फ़ुटबॉल क्लबों को मैनेज किया है.
लोगों की जुबां पर चढ़े हुए और इटली में मुख्यधारा के क्लब समझे जाने वाले एसी मिलान के भी ऑस्कर तबरेज़ मैनेजर रह चुके हैं.
'गिलान बारे सिंड्रोम' से लड़ते रहे
3 मार्च, 1947 को ऑस्कर तबरेज़ का जन्म हुआ था. क़रीब दो दशक पहले ऑस्कर को 'गुलेन बार सिंड्रोम' (जीबीएस) नाम की एक शारीरिक समस्या हो गई थी.
इस सिंड्रोम के कारण आदमी की मांसपेशियाँ कमज़ोर पड़ने लगती हैं और कभी-कभार साँस लेने में भी दिक्कत होती है.
बीते कुछ सालों में ऑस्कर तबरेज़ की तबीयत तेज़ी से बिगड़ी है और उनके शरीर पर इस सिंड्रोम का असर साफ़ तौर पर दिखाई देने लगा है.
यही वजह है कि ऑस्कर मैच के दौरान मैदान के बाहर एक छड़ी के सहारे खड़े दिखाई देते हैं. लेकिन अपनी टीम और फ़ुटबॉल के लिए उनका जोश किसी किस्म की समस्या को ज़ाहिर नहीं होने देता.
साल 2006 के अंत से लेकर अब तक, ऑस्कर तबरेज़ ही उरुग्वे टीम के कोच हैं. उनके होते हुए उरुग्वे टीम ने कुल चार बार फ़ुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालिफ़ाई किया है और एक बार सेमीफ़ाइनल तक पहुंची है.
रूस में चल रहे फ़ुटबॉल विश्व कप, 2018 के ग्रुप स्टेज मुक़ाबलों में कोई भी टीम उरुग्वे के ख़िलाफ़ एक गोल नहीं कर पाई थी.
9 नंबर जर्सी की कहानी
इस बारे में ऑस्कर तबरेज़ ने उरुग्वे की ग्रुप स्टेज मुक़ाबलों में मिस्र पर हुई जीत के बाद कहा था, "गेंद गोल के भीतर जाए या निशाने से दूर. हमें हमेशा गोल दागने के बारे में सोचते रहना चाहिए. जिस आक्रामकता के साथ मेरी टीम खेल रही है, मैं उससे खुश हूँ. हालांकि, उन्हें अंतिम-16 से सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले तक पहुँचने के लिए और ज़ोर लगाना होगा."
ऑस्कर तबरेज़ दुनिया के ऐसे पाँचवें फ़ुटबॉल मैनेजर हैं जिसने चार विश्व कप प्रतियोगिताओं (1990, 2010, 2014 और 2018) में एक ही टीम को मैनेज किया हो.
उनसे पहले इस फ़ेहरिस्त में इंग्लैंड के वॉल्टर विंटरबॉटम, जर्मनी के जोसेफ़ हर्बर्गर, जर्मनी के ही हेलमूट और हंगरी के लोयोश बारतोरी का नाम शामिल है.
उरुग्वे में फ़ुटबॉल प्रेमी अंक '9' को सबसे बेहतरीन और इस खेल के लिए 'लकी नंबर' मानते हैं. यही वजह थी कि जब ऑस्कर तबरेज़ उरुग्वे के लिए खेलते थे तो उनकी जर्सी का नंबर 9 था.
और यही वजह है कि आज उरुग्वे के सबसे स्टार खिलाड़ी लुई सुआरेज़ भी 9 नंबर की जर्सी पहनते हैं.
कावानी को लेकर चिंता
ऑस्कर तबरेज़ बीते कुछ सालों में कई मौक़ों पर ये कह चुके हैं कि लुई सुआरेज़ और एडिन्सन कावानी उरुग्वे के खेल को अगले स्तर पर ले गए हैं.
हालांकि शनिवार को पुर्तगाल के ख़िलाफ़ खेले गए मुक़ाबले में 31 साल के एडिन्सन कावानी के चोटिल होने की वजह से ऑस्कर तबरेज़ थोड़े चिंतित हैं.
उन्होंने कहा है, "कावानी की चोट टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात है. कावानी के पास रिकवर होने के लिए बहुत कम वक़्त है. हम ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी चोट कितनी गंभीर है."
बहरहाल, उरुग्वे की फ़ुटबॉल टीम साल 1930 और 1950 के फ़ुटबॉल विश्व कप में विजेता रह चुकी है.
इस विश्व कप में सेमीफ़ाइनल के लिए उरुग्वे का अगला मुक़ाबला फ़्रांस से है. ये मैच रूस के निज़नी नोवगरॉड मैदान में खेला जाएगा.
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