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पत्नी के पैसे चुराकर ख़रीदा फुटबॉल क्लब!
मौज मनाना किसे अच्छा नहीं लगता है लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए इसकी एक हद होती है और जिसे तोड़ने की इजाजत नहीं होती.
पेशे से कारोबारी सुलेमान अल फहीम प्रीमियर लीग के दौरान इधर-उधर घूम रहे थे, तभी उन्होंने ब्रितानी फुटबॉल क्लब 'पोर्ट्समाउथ' को खरीदने का फ़ैसला कर लिया.
ये 2009 की बात है और 'पोर्ट्समाउथ' की गिनती इंग्लिश फुटबॉल के ऐतिहासिक क्लबों में होती थी. हालांकि उन दिनों 'पोर्ट्समाउथ' आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था.
सुलेमान अल फहीम को भरोसा था कि वो क्लब की दिक्कतों को सुलझा लेंगे.
इससे पहले, साल 2008 में मैनचेस्टर सिटी को अबू धाबी यूनाइटेड ग्रुप ने खरीदा था और इस सौदे को पटाने में सुलेमान ने प्रमुख भूमिका निभाई थी.
पांच साल जेल
लेकिन सुलेमान का ये दुस्साहस केवल छह हफ्तों तक ही चल पाया. 'पोर्ट्समाउथ' को खरीदने की उनकी कोशिश का गंभीर नतीजा सामने आए.
ये नतीजे इस हद तक गंभीर थे कि फुटबॉल क्लब 'पोर्ट्समाउथ' और सुलेमान अल फहीम 10 बरस गुजर जाने के बाद भी इससे उबर नहीं पाए हैं.
इसी साल 15 फरवरी को सुलेमान को एक कोर्ट ने धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज़ और सात मिलियन डॉलर की चोरी में साथ देने के लिए कसूरवार ठहराया.
सुलेमान ने ये चोरी अपनी पत्नी के पैसे की है और इस पैसे से उन्होंने फुटबॉल क्लब के लिए इक्विपमेंट खरीदे थे. उन्हें पांच साल जेल की सज़ा सुनाई गई है.
सुलेमान की पत्नी को इसका शक हो गया था कि वो उनके बैंक खाते से हेराफेरी कर रहे हैं. दुबई की एक क्रिमिनल कोर्ट ने बैंक मैनेजर को भी पांच साल जेल की सजा दी है.
'पोर्ट्समाउथ' का सौदा
जब सुलेमान अल फहीम ने 'पोर्ट्समाउथ' का सौदा किया था तो उन्होंने इसके लिए 80 मिलियन डॉलर से भी ज़्यादा की रकम चुकाई थी.
उस समय इंग्लिश फुटबॉल में 'पोर्ट्समाउथ' प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता था. इसके साल भर पहले ही 'पोर्ट्समाउथ' ने एसोसिएशन कप जीता था.
इतना ही नहीं अपने वजूद में आने के बाद पहली बार यूरोपीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए भी क्वॉलिफ़ाई किया था.
लेकिन 'पोर्ट्समाउथ' को खरीदने के 40 दिन बाद ही उन्हें लगा कि इसकी आर्थिक समस्याएं दूर नहीं होने वाली हैं, उन्होंने अपनी ज़्यादातर हिस्सेदारी बेच दी.
चार साल बाद 'पोर्ट्समाउथ' को दो बार डिफॉल्टर घोषित किया गया और सात बार इसके मालिक बदले.
'पोर्ट्समाउथ' खरीदने के बाद कभी उन्होंने कहा था, हमें नए स्टेडियम, ट्रेनिंग एकैडमी और स्टाफ़ की जरूरत है. 2015 या 2016 तक ये हमारे पास होगा. हम खुद को टॉप-8 क्लबों में शामिल होते देखना चाहते हैं.
ये वादा था जिसे वो कभी पूरा नहीं कर पाए.
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