वो मैच जिसमें वीवीएस लक्ष्मण बने थे 'हनुमान'

इन दिनों वनडे और टी20 मैचों की भीड़ कुछ ज़्यादा है लेकिन टेस्ट मैच का अपना अलग जलवा है.

एक ऐसा ही मैच सात साल पहले आज ही के दिन खेला गया था जब वीवीएस लक्ष्मण ने ऑस्ट्रेलिया के जबड़े से जीत खींच ली थी.

ये मैच मोहाली में खेला गया था. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 428 रन बनाए, भारत पहली पारी का जवाब देते हुए 405 रन ही बना पाया, दूसरी पारी में कंगारू टीम 192 रनों पर सिमट गई और भारत के सामने 216 रनों का लक्ष्य आया.

देखने में आसान लगने वाला ये लक्ष्य आगे चलकर मुश्किल बन गया. सहवाग, द्रविड़, तेंदुलकर, रैना जैसे दिग्गज नामों के बावजूद टीम इंडिया ने अपने आठ विकेट महज़ 124 रनों पर खो दिए थे.

कैसे बदली हार जीत में?

हार सामने दिख रही थी और ऑस्ट्रेलिया की टीम काफ़ी मज़बूत नज़र आने लगी.

वीवीएस लक्ष्मण की पीठ में दर्द था लेकिन इसके बावजूद वो मैदान से बाहर नहीं गए. लेकिन इस मैच की हार को जीत में उन्होंने कैसे बदला, ये बड़ा दिलचस्प था.

और इसका श्रेय अकेले उन्हें नहीं दिया जा सकता. उनके साथ तेज़ गेंदबाज़ ईशांत शर्मा और स्पिनर प्रज्ञान ओझा का नाम भी दर्ज है.

ये मैच भारत ने एक विकेट से जीता था और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी उसकी झोली से सरकते-सरकते रह गई.

लक्ष्मण का कमाल

जब जीत कंगारू टीम की झोली में दिख रही थी, लक्ष्मण ने बेहद सधी और समझदारी पारी खेली. और उनका साथ दिया ईशांत ने. इस मैच में तेज़ गेंदबाज़ ने 92 गेंदों का सामना किया और 31 रन बनाए.

मिशेल जॉनसन, हिल्फ़ेनहॉस, बॉलिंजर जैसे तेज़ गेंदबाज़ों ने ऐड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया, लेकिन ईशांत जैसे क़सम खाकर आए थे कि अपनी विकेट नहीं देंगे.

लक्ष्मण (73 रन नाबाद) और ईशांत ने स्ट्राइक रोटेट करनी शुरू की और बीच-बीच में चौक्के भी लगाए.

शुरुआत में लक्ष्मण उन्हें स्ट्राइक देने से झिझक रहे थे लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने विश्वास दिखाना शुरू किया. दोनों ने मिलकर बेहद अहम 81 रन जोड़े.

ईशांत गए तो क्या हुआ?

जब लग रहा था कि दोनों टीम इंडिया को जीत तक ले जाएंगे, तभी हिल्फ़नहॉस ने ईशांत को पगबाधा आउट कर मैच में एक बार फिर दिलचस्पी पैदा कर दी. अब लक्ष्मण के साथ थे 11वें नंबर पर बल्लेबाज़ी कर रहे प्रज्ञान ओझा.

लक्ष्मण पहले से और ज़्यादा संभलकर खेलने लगे. जीत अब भी 11 रन दूर थी. और हर गेंद सांस थाम रही थी.

तनाव इस क़दर बढ़ गया था कि अपनी बल्लेबाज़ी में बर्फ़ से दिखने वाले लक्ष्मण भी आपा खोते नज़र आए और उन्होंने रनिंग में कनफ़्यूज़न पैदा करने को लेकर प्रज्ञान को डांट भी पिलाई.

ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ़ एक विकेट चाहिए थी और टीम ने भारतीय खेमे पर हमला करने की रणनीति अपनाए रखी.

और फिर आया क्लाइमैक्स

जीत तक पहुंचाने वाले रनों से दो रनों से पहले जॉनसन की एक गेंद ओझा के पैड से टकराई तो ऐसा लगा कि लक्ष्मण और ईशांत की सारी मेहनत बेकार चली जाएगी.

जब कंगारू टीम अपील कर रही थी, तो ओझा अपनी क्रीज़ से बाहर निकले और रन आउट होते-होते बचे.

ऑस्ट्रेलियाई फ़ील्डर ने गेंद स्टंप की तरफ़ फेंकी लेकिन वो बाल-बाल बचे. और ओवरथ्रो के चार रन भी मिले.

अगर गेंद स्टंप पर लगती तो ओझा पवेलियन जाते और हार टीम इंडिया की झोली में. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

इसके बाद भारतीय टीम जीत तक पहुंची और पूरी टीम पवेलियन से दौड़े मैदान में पहुंच गए.

कुछ देर पहले ओझा पर चिल्ला रहे लक्ष्मण ने उन्हें गले से लगा लिया. और एक ऐताहासिक जीत दर्ज हुई.

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