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क्या है हॉकी कोच को हटाने का असली 'खेल'?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
शनिवार को हॉकी इंडिया ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत की सीनियर हॉकी टीम के कोच रोलेंट ओल्टमैन्स की छुट्टी कर दी. ऐसा हाल ही में भारतीय हॉकी टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के देखते हुए किया गया.
रोलेंट ओल्टमैन्स को हटाने से पहले हॉकी इंडिया ने तीन दिन तक भारत के पूर्व ओलंपियन, भारतीय पुरूष टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ियों और पूर्व कोचों की भी राय ली.
कोच के प्रदर्शन पर सवाल
इस पूरे मामले को लेकर साल 1964 में टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के अहम सदस्य और वर्तमान में हॉकी इंडिया की चयन समीति के अध्यक्ष हरबिंदर सिंह ने बीबीसी को ख़ास बातचीत में बताया कि ओलटमैन्स की कोचिंग में टीम आगे नही बढ़ पा रही थी.
पिछले दिनों वर्ल्ड हॉकी लीग सेमीफाइनल्स में भारतीय टीम मलेशिया और कनाडा जैसी टीम से भी हार गई. हरबिंदर सिंह ने माना कि ओलटमैन्स की कोचिंग में भारतीय टीम का फिटनेस स्तर तो बढ़ा लेकिन मैदान पर टीम के प्रदर्शन में कुछ सुधार नही दिखा.
भविष्य पर हैं निगाहें
हरबिंदर सिंह ने यह भी कहा कि ओलटमैन्स की जगह हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर डेविड जॉन को अंतरिम कोच बनाया गया है. नए कोच के लिए आवेदन मंगाए जाएंगे और विचार विमर्श करने के बाद ही उसकी नियुक्ति की जाएगी.
हरबिंदर सिंह के अनुसार हॉकी इंडिया की नज़रें अगले एशिया कप, विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेल और साल 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक पर हैं. नया कोच अपनी नई सोच से टीम में नई जान फूंक सकता है.
'टीम इंडिया में एस्ट्रो टर्फ पर खेलने की ताकत नहीं'
दूसरी तरफ साल 1975 में विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे असलम शेर खान का मानना है कि यह सिर्फ ऑखों में धूल झोकने जैसा है.
वे कहते हैं, ''भारतीय हॉकी टीम के कोच को इस तरह पहली बार नहीं हटाया गया है. दरअसल जब भी टीम खराब खेलती है तब कोच को बली का बकरा बना दिया जाता है, ताकि सबका ध्यान हट सके. हक़ीक़त में आज भारतीय टीम में एस्ट्रो टर्फ पर खेलने की ताक़त ही नही है.''
असलम शेर खान आगे कहते हैं, ''भारतीय हॉकी टीम पर दुनिया में सबसे अधिक पैसा खर्च किया जाता है. हॉकी इंडिया लीग भी हुई. लेकिन परिणाम ढ़ाक के तीन पात ही रहा. आज भारतीय हॉकी टीम के पास जाना-माना स्पॉन्सर भी है और अंतराष्ट्रीय हॉकी संघ को भी सबसे अधिक पैसा भारत से ही मिलता है. उसके अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा हैं जो पहले हॉकी इंडिया के अध्यक्ष थे. वह भी जानते है कि भारतीय हॉकी दुनिया में सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है. लेकिन आज हॉकी को देखने वाले भी कम हो रहे है क्योंकि वह पहले घास के मैदान पर खेले जाने वाली हॉकी जितनी आकर्षक नही है.''
असलम शेर खान का यह भी कहना है कि कोच कोई भी बने लेकिन हालात सुधरने वाले नहीं है. वैसे पिछले कुछ सालों में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन तब था जब वह ओलटमैन्स की कोचिंग में साल 2016 में इंग्लैंड में हुई चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची जहां उसे ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा.
लेकिन इसी साल वह सुल्तान अज़लान शाह कप हॉकी में तीसरे पायदान पर रही. वर्ल्ड हॉकी लीग में भी भारतीय टीम छठे स्थान पर रही और रियो ओलंपिक में वह क्वार्टर फाइनल से आगे नही बढ़ सकी.
तो बरसों से हॉकी में कोच को बदले जाने का खेल जारी है, और एक बार फिर एक नए कोच की तलाश हो रही है.
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