वेस्ट इंडीज़, श्रीलंका का टेस्ट क्रिकेट: अर्श से फर्श पर

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
इन दिनों वेस्ट इंडीज़ की क्रिकेट टीम इंग्लैंड से दूसरा टेस्ट मैच खेल रही है.
इससे पहले वह पहला टेस्ट मैच केवल तीन दिन के भीतर एक पारी और 209 से हार गई थी. दूसरी तरफ श्रीलंकाई टीम भी भारत से एकदिवसीय सिरीज़ खेल रही है.
वह पांच मैचों की सिरीज़ के पहले दो मैच हार चुकी है. इससे पहले वह भारत से टेस्ट सिरीज़ 3-0 से हारी.
भारत ने पहली बार किसी विदेशी टीम को उसी की ज़मीन पर टेस्ट सिरीज़ में एकतरफ़ा रूप से हर टेस्ट मैच में हराया.

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टेस्ट क्रिकेट का गिरता स्तर
आख़िरकार ऐसा क्या हुआ है कि एक समय अपने घर और बाहर बेहद मज़बूत मानी जाने वालीं ये दोनों टीमें अब लगातार पस्त हो रही हैं.
श्रीलंका ने तो फिर भी पिछले दो साल में देश-विदेश में खेले गए 21 में से 8 मैच जीते हैं और 13 हारे हैं.
दूसरी तरफ़ वेस्ट इंडीज़ की टीम ने पिछली और आख़िरी टेस्ट सिरीज़ अपनी ही ज़मीन पर साल 2014 में बांग्लादेश से 2-0 से जीती थी.
वह देश-विदेश में खेले गए पिछले 25 टेस्ट मैचों में केवल 5 में जीत हासिल कर सकी है. 16 में हारी है और चार टेस्ट मैच ड्रॉ करा सकी है.
आख़िरकार वेस्ट इंडीज़ और श्रीलंका के टेस्ट क्रिकेट में गिरते स्तर का क्या कारण है?

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वेस्ट इंडीज़ की टीम
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का मानना है कि यह बात सही है कि इससे ख़राब वेस्ट इंडीज़ की टेस्ट टीम किसी ने नहीं देखी.
उन्होंने कहा, 'हारना अलग बात है लेकिन अगर एक दिन में 19 विकेट गंवाकर कोई टीम हार जाए तो क्या कहा जाए? यह टीम न तो घर में जीत रही है, न बाहर जीत रही है.'
उन्होंने कहा कि अगर आज वेस्ट इंडीज़ को टेस्ट क्रिकेट का दर्जा हासिल करना होता तो शायद उन्हें इंतज़ार करना होता.
यह उस टीम का हाल है जिसे लेकर सबका कहना है कि विश्व में टेस्ट क्रिकेट को जीवंत रखना है तो वेस्ट इंडीज़ का सक्षम होना ज़रूरी है.

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मजबूत टेस्ट टीम
विजय लोकपल्ली मानते हैं कि इसके लिए वेस्ट इंडीज़ का क्रिकेट बोर्ड भी ज़िम्मेदार है, जिससे हमेशा खिलाड़ियों के विवाद होते रहते है.
उन्होंने कहा, 'कभी क्लाइव लॉयड की टीम विश्व की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम थी. हाल के वर्षो में ब्रायन लारा के बाद कोई ऐसा खिलाड़ी या कप्तान वेस्ट इंडीज़ के पास नहीं हैं जो उन्हें जोड़कर रख सके.'
विजय लोकपल्ली ने कहा कि यहां तक कि अब वेस्ट इंडीज़ के खिलाड़ियों के पास टेस्ट क्रिकेट खेलने का धैर्य भी नही हैं. सभी एकदिवसीय और टी-20 लीग खेलकर खुश है.
उन्होंने कहा कि कुछ यही हाल श्रीलंका का है.
लोकपल्ली कहते हैं, 'कभी अर्जुन राणातुंगा, अरविंद डि सिल्वा, मुथय्या मुरलीधरन और चमींडा वास के दम पर उनकी बेहद मज़बूत टेस्ट टीम थी.'

उन्होंने कहा कि उसके बाद कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने तो ऐसे खिलाड़ी थे जो दुनिया की किसी भी टीम में जगह बना सकते थे. उनके संन्यास लेने के बाद उन जैसे खिलाड़ियो की कमी पूरी नही हो पा रही है.
विजय लोकपल्ली का मानना है कि श्रीलंका के लिए कहा जा सकता है कि टेस्ट क्रिकेट में उनकी नाकामी की अभी शुरुआत है.

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क्रिकेट विरासत
वहीं एक और क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन वेस्ट इंडीज़ और श्रीलंका के टेस्ट क्रिकेट में पतन को लेकर मानते है कि वेस्ट इंडीज़ की टीम तो बहुत ऊंचाई से बहुत नीचे तक आ गई है.
उन्होंने कहा, 'वेस्ट इंडीज़ टीम न सिर्फ़ पिछले 25 टेस्ट मैचों से, बल्कि पिछले 10-12 सालों से ख़राब खेल रही है. उसकी जीत भी मज़बूत टीमों के ख़िलाफ नहीं आई है.'
अयाज़ ने कहा कि इसकी वजह यह है कि वेस्ट इंडीज़ की क्रिकेट विरासत बेहद शानदार रही है.
उनके मुताबिक जिस अंदाज़ में वेस्ट इंडीज़ खेलती थी, वह दिखाई नहीं देता. उन्होंने कहा कि गारफ़ील्ड सोबर्स, रोहन कन्हाई, ग्रिफिथ, हॉल, क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्डस, मार्शल, होल्डिंग और ना जितने नाम हैं, उनके स्तर के खिलाड़ी अब दिखाई नही देते.

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अयाज़ मेमन मानते हैं कि इसकी वजह पैसा है, जिसकी कमी से उनके देश में क्रिकेट का विकास नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा कि वेस्ट इंडीज़ बोर्ड ने भी कुछ ऐसे निर्णय लिए जिससे क्रिकेट को झटका लगा. सबसे बड़ी बात कि खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच अनबन ने बड़ा नुकसान किया.
बहुत से ऐसे खिलाड़ी जिन्हे टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए था लेकिन नही खेल पा रहे है जैसे क्रिस गेल, ड्वेन ब्रावो, सुनील नारायण और दूसरे खिलाड़ी.

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प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अभाव
मेमन ने कहा, 'अब अगर ऐसे खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट नही खेलेंगे तो उनके चाहने वालों की दिलचस्पी भी खेल में कम हो जाती है. वैसे भी वेस्ट इंडीज़ की हालत तब तक ठीक थी, जब तक उनके खिलाड़ी इंग्लिश काउंटी क्रिकेट खेलते थे. अब उनके खिलाड़ी वहां न के बराबर खेलते है और उनकी नज़र अमरीका की तरफ़ है. बास्केटबॉल और एथलेटिक्स में उनका रुझान अधिक है.'
श्रीलंका पर बात करते हुए मेनन बताते हैं कि दूसरी तरफ श्रीलंका के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अभाव इतना नहीं लग रहा है, जितना वेस्ट इंडीज़ को है.
उन्होंने कहा, 'अंडर-19 के बाद वेस्ट इंडीज़ के खिलाड़ियों को संभाला नहीं जाता. नही भूलना चाहिए कि श्रीलंका ने एक साल पहले ही ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सिरीज़ में 3-0 से हराया था.'

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मेमन कहते हैं कि श्रीलंका की टीम अभी फिर से एकजुट हो रही है. अभी वह कुछ दिग्गज खिलाड़ियों के सन्यास लेने से मुश्किल में है. संगकारा, तिल्करत्ने दिलशान, महेला जयवर्धने का विकल्प मिलने में समय लगता है.
उन्होंने कहा, 'श्रीलंका बोर्ड के अधिकारी भी आपस में लड़ रहे है. ऐसे में बोर्ड भी ख़ुद संभल जाए क्योंकि अगर दो टीम टेस्ट क्रिकेट में इतने निचले स्तर पर आ जाए तो आगे जाते टेस्ट क्रिकेट को झटका लगेगा. दर्शकों का विश्वास उठ जाएगा, स्पॉन्सर नहीं आएंगे. तो बहुत नाज़ुक मोड़ पर है वेस्ट इंडीज़ और श्रीलंकाई क्रिकेट.'












