औरतों ने सुनाई मानव तस्करों के अत्याचार की दास्तां

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इमेज कैप्शन, सैंकड़ों बांगलादेशी महिलाओं को झांसे से सीमा पार करवा कर भारतीय शहर मुंबई और पुणे में देह व्यापार में धकेल दिया गया था

तीन साल पहले अवैध ढंग से बांग्लादेश से भारत लाई गई बांग्लादेशी महिलाओं ने मानव तस्करों के अत्याचारों की दर्दनाक कहानियाँ सुनाई हैं.

इनमें से अधिकतर महिलाओं को भारतीय शहर मुंबई और पुणे में देह व्यापार में धकेल दिया गया था.

भारत की एक गैर सरकारी संस्था की और से मुक्त कराई गई 48 महिलाओं और बच्चों को इस सप्ताह के अंत में बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंप दिया गया और वे अब स्वदेश पहुँच गई हैं.

बांग्लादेश लौटने वाला यह महिलाओं का अब तक का सबसे बड़ा समूह है. महिलाओं ने बताया कि उन्हें झांसा दे कर सीमा पार ले जाया गया.

नशीला पदार्थ खिलाकर ले गए

इनमें से एक 22 वर्षीय मोनिका ने बीबीसी के ढाका संवाददाता एतिराजन एनबरासन को बताया, “हमारे गांव की एक लड़की ने हमें कुछ खाने को दिया और कहा कि हम पिकनिक मनाने के के लिए भारत में जा सकती हैं. बाद में एहसास हुआ कि हमें नशीला पदार्थ खिलाया गया था. हम सभी ने रात में धान के खेत से गुजर कर सीमा पार की थी.”

मोनिका ने आगे बताया, “जब तक हमें होश आया, हमें भारतीय एजेंट को बेचा जा चुका था.” कुछ दिन कोलकाता में बिताने के बाद मोनिका और अन्य लड़कियों को पुणे ले जाया गया.

दक्षिणी बांगलादेश में रहने वाली मोनिका ने बताया, “हम सभी को एक छोटे-छोटे कमरे में रखा गया था. वहां सैंकड़ों लड़कियां थीं. मैं काफी आहत थी लेकिन हमारे पास कोई रास्ता नहीं था क्योंकि स्थानीय एजेंट हमें धमकाते थे ”

मानव तस्करों के चंगुल में फंसी ऐसी महिलाओं का कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है लेकिन महिला अधिकारों के कार्यकर्ताओं का मानना है कि हर साल हजारों की संख्या में बांगलादेशी लड़कियों को भारत और खाड़ी के देशों में अवैध तरीके से भेजा जाता है.

कार्यकर्ताओं के अनुसार मानव तस्कर भारत से लगी सीमा को बेहद ही चालाकी से पार करते हैं.

सीमापार तस्करी

बागलादेश और भारत के बीच 4000 किलोमीटर से भी अधिक की सीमा है. इन लड़कियों को भारत मे नौकरी का झांसा दिया जाता है और बाद में उन्हें भारत के विभिन्न शहरों में योनकर्मियों के तौर पर बेच दिया जाता है.

एक अन्य पीड़ित महिला रूना ने बताया, “हम सभी को सुबह आठ बजे से लेकर आधीरात तक काम करने को मजबूर किया जाता था. पुणे के वेश्यालय में मेरे जैसी सैंकड़ों लड़कियां हैं. यह अत्याचार हफ्तों चलता था और वहां से भागने का काई मौका नहीं था. मैं अब अपने देश लौट कर खुश हूं.”

बेशक यह औरतें घर लौट आईं हैं लेकिन उनके लिए अब भी कई दिक्कतें हैं.

बागलादेशी महिला वकीलों के संघ की सलमा अली ने बीबीसी को बताया, “ये औरतें घर तो लौट आई हैं लेकिन इनका भविष्य अधर में है क्योंकि सामाजिक कलंक के कारण अधिकतर के लिए सामान्य जीवन व्यतीत करना आसान नहीं होगा.”

उन्होंने कहा कि ये साफ है कि भारत और बांग्लादेश को और नियम बनाने ए जाने के बावजूद मानव तस्करी जारी है.

रूना ने कहा, “ हम चाहते हैं कि दोनों ही देश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी कड़ी करें ताकि किसी और लड़की को मेरी तरह के हालात न झेलने पड़ें. ”